Dayashankar Mishra
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धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करती उत्तर प्रदेश सरकार : मंत्री दयाशंकर मिश्र
- Tuesday March 25, 2025
- Reported by: भाषा
खाद्य सुरक्षा मंत्री दयाशंकर मिश्र ने कहा कि विपक्ष का आरोप गलत है. सरकार कोई बंटवारा नहीं करती है. बांटने का कार्य विपक्ष के लोग करना चाहते हैं.
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पुस्तक विमोचन : डिप्रेशन की गुत्थी खोलकर आत्महत्या से बचाने वाली किताब है ‘जीवन संवाद’
- Wednesday January 8, 2020
- Written by: सूर्यकांत पाठक
अवसाद और आत्महत्या के विरुद्ध वरिष्ठ पत्रकार दयाशंकर मिश्र की बहुत मशहूर हुई वेबसीरीज 'डियर जिंदगी- जीवन संवाद' किताब की शक्ल में आ गई. रविवार को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 'जीवन संवाद' का लोकार्पण किया गया. किताब की शक्ल में आने से पहले इस वेबसीरीज को एक करोड़ से अधिक बार डिजिटल माध्यम में पढ़ा जा चुका है.
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ऑपरेशन 'मगरमच्छ' : वीर राजा की कहानी, इसे नोटबंदी से न जोड़ें
- Wednesday November 30, 2016
- दयाशंकर मिश्र
'राजा को लग रहा था कि ऐसा कोई काम किया जाए, जिससे वह इतिहास के आंगन का बरगद बन जाएं, और उनके विरोधी सूरन की तरह धरती में समा जाएं. आखिर वह दिन आ ही गया....'
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'सर्जिकल स्ट्राइक' और सरकार के साथ लेकिन उन्माद और युद्ध के विरुद्ध ….
- Friday September 30, 2016
- दयाशंकर मिश्र
अखबार और मीडिया की गुरुवार और शुक्रवार की हेडलांइस से समाज के हितों का कोई लेना-देना नहीं है. यह बस एकाकी राग है, मूल विषयों से ध्यान भटकाने और उस जंग के उस बेसुरे राग छेड़ने का जिसका कोई लक्ष्य मनुष्य से जुड़ाव नहीं रखता. मनुष्यता और जंग परस्पर विरोधी स्वर हैं.
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पत्नी नहीं, व्यवस्था की लाश ढो रहा है दाना माझी
- Friday August 26, 2016
- दयाशंकर मिश्र
हर छोड़ी बड़ी बात में निराश, मरने-मारने को आतुर शहरी समाज को दीना माझी से सब्र, प्रेम का सबक सीखना चाहिए, और जिद का भी. लाश को कंधे पर लादे यह जो दीना जा रहा है, वह अपनी जीवन संगिनी नहीं हमारी व्यवस्था की लाश ढो रहा है.
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सिंधु की जीत से लड़कियों के लिए 'बासी' रिवाज बदलेंगे!
- Monday August 22, 2016
- दयाशंकर मिश्र
सिंधु जीत गईं. अब फाइनल चाहे जो हो, वे भारतीय लड़कियां जो हमारे सड़े-गले रिवाजों और बासी विचारों की रोज भेंट चढ़ रही हैं, के लिए तो वह फाइनल में पहुंचते ही जीत गईं थीं. महिलाओं के लिए ‘कठिन’ जिस भारतीय समाज से सिंधु आती हैं, वहां से ओलिंपिक का सोना तो सपना ही लगता रहा है. हम मानें या न मानें, लेकिन हमारी बेटियों को हमारे ही देश में निचले दर्जे की नागरिकता हासिल है.
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आपबीती : किन्नर का हमला और छोटे-छोटे सवाल
- Monday August 22, 2016
- दयाशंकर मिश्र
आज सुबह की शुरुआत बेहद खौफनाक रही. मैंने अब तक कभी किसी अप्रत्याशित, सीधी हिंसा का सामना नहीं किया था. तब भी नहीं जब कोई एक दशक पहले मैं 'अशांत' जम्मू-कश्मीर में काम कर रहा था और अक्सर देर रात पैदल या दुपहिया पर घर लौटता था.
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शोभा डे आप ट्विटर की गोल्ड मेडलिस्ट हैं, ओलिंपिक को छोड़ दें...
- Monday August 22, 2016
- दयाशंकर मिश्र
हम ओलिंपिक में खराब प्रदर्शन इसलिए नहीं करते, क्योंकि हमारे खिलाड़ियों में दमखम की कमी है. बल्कि इसलिए क्योंकि हम उन्हें वह माहौल और प्रशिक्षण ही नहीं दे पाते जो मिलना चाहिए. सोमवार को ही NDTV की एक रिपोर्ट में यह दिखाया गया था कि झारखंड में निशानेबाज कैसे ट्रेनिंग हासिल करते हैं.
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दयाशंकर सिंह की बदजुबानी के बाद संसद में दलित मुद्दे पर राजनीति चरम पर
- Friday July 22, 2016
- Reported by: हिमांशु शेखर मिश्र
बीजेपी से बर्खास्त किए गए नेता दयाशंकर सिंह के अभद्र बयान के बाद सभी पार्टियों में खलबली मच गई है। जहां एक तरफ़ बीएसपी में उबाल है वहीं सपा साफ़ तौर पर कुछ बोलने से बचती नज़र आई तो बीजेपी और एनडीए के नेता बचाव की मुद्रा में नज़र आए।
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अच्छा हुआ श्लोक नहीं पूछे! वरना हम तुम्हें बचा नहीं पाते...
- Wednesday July 6, 2016
- दयाशंकर मिश्र
विजय ने कल रात कांपती आवाज में कहा था कि मुझे न तो श्लोक आते हैं और न ही कुरान की आयतें! मैं क्या करता, केटी क्या करता अगर वो श्लोक या कुरान की आयतों पर आमादा हो जाते..
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सबसे भले नेहरू, कम से कम सबके काम तो आ रहे हैं !
- Friday May 27, 2016
- Dayashankar Mishra
नेहरू को समझना है तो उनके विरोधियों के पत्र व्यवहारों से समझिए. पटेल के साथ पत्र व्यवहार को पढि़ए और समझिए. दुर्भाग्य से अपने नायकों को जानने-बूझने के लिए पढ़ने के सिवा हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है और सोशल मीडिया, राष्ट्रप्रेम के रंग में रंगे 'देशप्रेमी' अध्ययन के अतिरिक्त सब कर सकते हैं...
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असम भाजपा को भारत माता का वरदान है...
- Friday May 20, 2016
- Dayashankar Mishra
भाजपा को असम में क्या मिला है, इसे केवल सीटों और बहुमत से नहीं समझा जा सकता है। इसे समझने के लिए असम से उत्तर भारत के उस ‘देश’ की ओर जाना होगा, जहां कुछ महीने पहले बेमेल गठबंधन ने उसे बुरी तरह से पटक दिया था।
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विजय माल्या और मुल्क पर सवार इल्लियां...
- Friday April 22, 2016
- Dayashankar Mishra
यह विजय माल्या का बड़प्पन ही कहा जाएगा कि उन्होंने अब तक ‘जीप पर सवार इल्लियां’ पर प्रतिबंध की मांग नहीं की है, जबकि शरद जोशी ने कई बरस पहले ही उन पर शब्दबाण चलाए थे। हो सकता है माल्या इसका कॉपीराइट लेकर पूरा स्टॉक ही अपने साथ लंदन ले गए हों, ताकि...
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बस्तर ही नहीं, समय के हिंसक होने की दास्तां है, ‘लाल लकीर’
- Friday April 8, 2016
- Dayashankar Mishra
'लाल लकीर'। इसे पूरा करने और इसके बारे में लिखने के बीच खासा अंतर है। इसकी वजह बस इतनी है कि लेखक ने बस्तर के बहाने देश के बड़े हिस्से की पीड़ा का जिक्र कागज के पन्नों पर जाहिर किया है, वह पूरी कहानी आपके दिमाग में उतारने के साथ उतना ही गहरा ‘शॉक’ भी देता है।
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जेएनयू : कन्हैया को क्यों विक्रम का शुक्रगुजार होना चाहिए...
- Thursday February 18, 2016
- Dayashankar Mishra
आपको ऐसा नहीं लगता कि एक समाज के रूप में पिछले कुछ सालों में हम हिंसक हेडलाइंस के भूखे होते जा रहे हैं. ज़रा सा भी सब्र नहीं बस तुरत-फुरत न्याय की जिद और 'मार दो, इसे मार दो' के नारे. सोशल मीडिया में कुछ भी कहने और हिट हो जाने की थ्योरी ने हमारे घर परिवार से लेकर हमारे ‘अवचेतन’ तक पर असर डाला है...
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धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करती उत्तर प्रदेश सरकार : मंत्री दयाशंकर मिश्र
- Tuesday March 25, 2025
- Reported by: भाषा
खाद्य सुरक्षा मंत्री दयाशंकर मिश्र ने कहा कि विपक्ष का आरोप गलत है. सरकार कोई बंटवारा नहीं करती है. बांटने का कार्य विपक्ष के लोग करना चाहते हैं.
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पुस्तक विमोचन : डिप्रेशन की गुत्थी खोलकर आत्महत्या से बचाने वाली किताब है ‘जीवन संवाद’
- Wednesday January 8, 2020
- Written by: सूर्यकांत पाठक
अवसाद और आत्महत्या के विरुद्ध वरिष्ठ पत्रकार दयाशंकर मिश्र की बहुत मशहूर हुई वेबसीरीज 'डियर जिंदगी- जीवन संवाद' किताब की शक्ल में आ गई. रविवार को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 'जीवन संवाद' का लोकार्पण किया गया. किताब की शक्ल में आने से पहले इस वेबसीरीज को एक करोड़ से अधिक बार डिजिटल माध्यम में पढ़ा जा चुका है.
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ऑपरेशन 'मगरमच्छ' : वीर राजा की कहानी, इसे नोटबंदी से न जोड़ें
- Wednesday November 30, 2016
- दयाशंकर मिश्र
'राजा को लग रहा था कि ऐसा कोई काम किया जाए, जिससे वह इतिहास के आंगन का बरगद बन जाएं, और उनके विरोधी सूरन की तरह धरती में समा जाएं. आखिर वह दिन आ ही गया....'
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'सर्जिकल स्ट्राइक' और सरकार के साथ लेकिन उन्माद और युद्ध के विरुद्ध ….
- Friday September 30, 2016
- दयाशंकर मिश्र
अखबार और मीडिया की गुरुवार और शुक्रवार की हेडलांइस से समाज के हितों का कोई लेना-देना नहीं है. यह बस एकाकी राग है, मूल विषयों से ध्यान भटकाने और उस जंग के उस बेसुरे राग छेड़ने का जिसका कोई लक्ष्य मनुष्य से जुड़ाव नहीं रखता. मनुष्यता और जंग परस्पर विरोधी स्वर हैं.
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पत्नी नहीं, व्यवस्था की लाश ढो रहा है दाना माझी
- Friday August 26, 2016
- दयाशंकर मिश्र
हर छोड़ी बड़ी बात में निराश, मरने-मारने को आतुर शहरी समाज को दीना माझी से सब्र, प्रेम का सबक सीखना चाहिए, और जिद का भी. लाश को कंधे पर लादे यह जो दीना जा रहा है, वह अपनी जीवन संगिनी नहीं हमारी व्यवस्था की लाश ढो रहा है.
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सिंधु की जीत से लड़कियों के लिए 'बासी' रिवाज बदलेंगे!
- Monday August 22, 2016
- दयाशंकर मिश्र
सिंधु जीत गईं. अब फाइनल चाहे जो हो, वे भारतीय लड़कियां जो हमारे सड़े-गले रिवाजों और बासी विचारों की रोज भेंट चढ़ रही हैं, के लिए तो वह फाइनल में पहुंचते ही जीत गईं थीं. महिलाओं के लिए ‘कठिन’ जिस भारतीय समाज से सिंधु आती हैं, वहां से ओलिंपिक का सोना तो सपना ही लगता रहा है. हम मानें या न मानें, लेकिन हमारी बेटियों को हमारे ही देश में निचले दर्जे की नागरिकता हासिल है.
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आपबीती : किन्नर का हमला और छोटे-छोटे सवाल
- Monday August 22, 2016
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आज सुबह की शुरुआत बेहद खौफनाक रही. मैंने अब तक कभी किसी अप्रत्याशित, सीधी हिंसा का सामना नहीं किया था. तब भी नहीं जब कोई एक दशक पहले मैं 'अशांत' जम्मू-कश्मीर में काम कर रहा था और अक्सर देर रात पैदल या दुपहिया पर घर लौटता था.
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शोभा डे आप ट्विटर की गोल्ड मेडलिस्ट हैं, ओलिंपिक को छोड़ दें...
- Monday August 22, 2016
- दयाशंकर मिश्र
हम ओलिंपिक में खराब प्रदर्शन इसलिए नहीं करते, क्योंकि हमारे खिलाड़ियों में दमखम की कमी है. बल्कि इसलिए क्योंकि हम उन्हें वह माहौल और प्रशिक्षण ही नहीं दे पाते जो मिलना चाहिए. सोमवार को ही NDTV की एक रिपोर्ट में यह दिखाया गया था कि झारखंड में निशानेबाज कैसे ट्रेनिंग हासिल करते हैं.
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दयाशंकर सिंह की बदजुबानी के बाद संसद में दलित मुद्दे पर राजनीति चरम पर
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बीजेपी से बर्खास्त किए गए नेता दयाशंकर सिंह के अभद्र बयान के बाद सभी पार्टियों में खलबली मच गई है। जहां एक तरफ़ बीएसपी में उबाल है वहीं सपा साफ़ तौर पर कुछ बोलने से बचती नज़र आई तो बीजेपी और एनडीए के नेता बचाव की मुद्रा में नज़र आए।
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अच्छा हुआ श्लोक नहीं पूछे! वरना हम तुम्हें बचा नहीं पाते...
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विजय ने कल रात कांपती आवाज में कहा था कि मुझे न तो श्लोक आते हैं और न ही कुरान की आयतें! मैं क्या करता, केटी क्या करता अगर वो श्लोक या कुरान की आयतों पर आमादा हो जाते..
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सबसे भले नेहरू, कम से कम सबके काम तो आ रहे हैं !
- Friday May 27, 2016
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नेहरू को समझना है तो उनके विरोधियों के पत्र व्यवहारों से समझिए. पटेल के साथ पत्र व्यवहार को पढि़ए और समझिए. दुर्भाग्य से अपने नायकों को जानने-बूझने के लिए पढ़ने के सिवा हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है और सोशल मीडिया, राष्ट्रप्रेम के रंग में रंगे 'देशप्रेमी' अध्ययन के अतिरिक्त सब कर सकते हैं...
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असम भाजपा को भारत माता का वरदान है...
- Friday May 20, 2016
- Dayashankar Mishra
भाजपा को असम में क्या मिला है, इसे केवल सीटों और बहुमत से नहीं समझा जा सकता है। इसे समझने के लिए असम से उत्तर भारत के उस ‘देश’ की ओर जाना होगा, जहां कुछ महीने पहले बेमेल गठबंधन ने उसे बुरी तरह से पटक दिया था।
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विजय माल्या और मुल्क पर सवार इल्लियां...
- Friday April 22, 2016
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यह विजय माल्या का बड़प्पन ही कहा जाएगा कि उन्होंने अब तक ‘जीप पर सवार इल्लियां’ पर प्रतिबंध की मांग नहीं की है, जबकि शरद जोशी ने कई बरस पहले ही उन पर शब्दबाण चलाए थे। हो सकता है माल्या इसका कॉपीराइट लेकर पूरा स्टॉक ही अपने साथ लंदन ले गए हों, ताकि...
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बस्तर ही नहीं, समय के हिंसक होने की दास्तां है, ‘लाल लकीर’
- Friday April 8, 2016
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'लाल लकीर'। इसे पूरा करने और इसके बारे में लिखने के बीच खासा अंतर है। इसकी वजह बस इतनी है कि लेखक ने बस्तर के बहाने देश के बड़े हिस्से की पीड़ा का जिक्र कागज के पन्नों पर जाहिर किया है, वह पूरी कहानी आपके दिमाग में उतारने के साथ उतना ही गहरा ‘शॉक’ भी देता है।
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जेएनयू : कन्हैया को क्यों विक्रम का शुक्रगुजार होना चाहिए...
- Thursday February 18, 2016
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आपको ऐसा नहीं लगता कि एक समाज के रूप में पिछले कुछ सालों में हम हिंसक हेडलाइंस के भूखे होते जा रहे हैं. ज़रा सा भी सब्र नहीं बस तुरत-फुरत न्याय की जिद और 'मार दो, इसे मार दो' के नारे. सोशल मीडिया में कुछ भी कहने और हिट हो जाने की थ्योरी ने हमारे घर परिवार से लेकर हमारे ‘अवचेतन’ तक पर असर डाला है...
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