बैंकों की हालत
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बैंकों पर आए भीषण संकट के बीच कैसे सुरक्षित रख सकते हैं अपना पैसा
- Thursday March 16, 2023
- Translated by: विवेक रस्तोगी
क्षेत्रीय अमेरिकी बैंकों की वित्तीय हालत को लेकर भी चिंता बरकरार है. डिपॉज़िट और निवेश को लेकर इसके क्या मायने हैं - पर्सनल फाइनेंस विशेषज्ञों ने ऐसे टिप्स दिए हैं, जिनसे आप ऐसे वक्त में शांत रहकर अपने पैसे का प्रबंधन कर सकते हैं.
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आर्थिक मार झेल रहे किसान दशरथ लक्ष्मण केदारी के सुसाइड नोट के बाद 'अन्नदाताओं' की हालत पर चर्चा तेज लेकिन..
- Wednesday September 21, 2022
- Reported by: सुनील कुमार सिंह
केदारी के पास अपनी 30 गुंठा जमीन थी, दूसरों के खेत लेकर भी वे खेती किया करते थे लेकिन भारी बारिश की वजह से इस बार उनकी सोयाबीन और टमाटर की पूरी फसल बर्बाद हो गई.ऊपर से खेती के लिए अलग-अलग सहकारी बैंकों, फाइनेंस कंपनियों और परिचितों से लिए लगभग 8 से 10 लाख रुपये के कर्ज का बोझ उन पर था.
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बजट 2020: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अरुण जेटली को दी श्रद्धांजलि, कहा- उनके चलते GST लागू हुआ
- Saturday February 1, 2020
- Written by: अल्केश कुशवाहा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने संसद में बजट (Budget 2020-21) का भाषण दिया. वित्तमंत्री के रूप में उन्होंने दूसरी बार बजट पेश किया. इस दौरान उन्होंने GST का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने अरुण जेटली को याद किया और कहा कि उनकी दूरदर्शिता के चलते GST लागू हुआ और इससे डरावना इंस्पेक्टर राज खत्म हो गया है. बैंकिंग सिस्टम सुधार आया है जिससे बैंकों की हालत में सुधार हुआ है. अब तक 40 करोड़ का जीएसटी फाइल हो चुका है.
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आर्थिक सुस्ती के बीच RBI गवर्नर ने बैंकों से कहा- आ सकती हैं चुनौतियां, रहें तैयार
- Thursday December 12, 2019
- भाषा
देश में इन दिनों अर्थव्यवस्था की हालत अच्छी नहीं है. इसी बीच रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैंकों से चुनौतियों सेते लिए तैयार रहने को कहा है.
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देश के आर्थिक हालात पर वित्त मंत्री का बयान, कहा - हमारी विकास दर दूसरों से बेहतर है
- Friday August 23, 2019
- Written by: प्रभात उपाध्याय
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने शुक्रवार को देश के आर्थिक हालत पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया.
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मोदी सरकार का ये आर्थिक सर्वे क्या इशारा कर रहा है?
- Friday July 5, 2019
- रवीश कुमार
अर्थव्यवस्था की हालत क्या है. जो ख़बरें बिजनेस अखबारों में छप रही हैं उन्हें देखकर लगता है कि चुनौतियां गंभीर होती जा रही हैं. लगातार 9 महीने से ऑटोमोबिल कंपनियों में उत्पादन ठप्प है. लघु एवं मझोले उद्योग का विकास रुक गया है. इनके लिए लोन की कमी हो गई है. जिन संस्थाओं से लोन मिलता है, उनकी हालत खराब है. एकर आरटीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2019 में दूसरी तरफ मुदा लोन का एनपीए 126 प्रतिशत बढ़ा है. बैंकों की अपनी पूंजी लड़खड़ा रही है. वो सरकार की मदद पर निर्भर है.
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बैंकों में ग़ुलामी आई है, शेयर खरीदें मैनेजर-क्लर्क, पैसा नहीं तो लोन लें
- Tuesday February 26, 2019
- रवीश कुमार
मैंने बैंक सीरीज़ की शुरुआत में ही और शायद पिछले साल इसी वक्त लिखा था कि बैंकों के भीतर गुलामी चल रही है. तब लगा था कि मैं गलत हूं. मैं कौन सा समाजशास्त्री हूं. इतनी बड़ी बात कैसे कह दी कि बैंकों में ग़ुलामी की प्रथा चल रही है. लेकिन अब मैं इसे होते हुए देख रहा हूं. अगर बैंकर गुलाम हो सकते हैं तो बाकियों की क्या हालत होगी. सोचिए आज बैंकरों के लिए कोई नहीं है. बैंकर भी ख़ुद के नहीं हैं.जब मनुष्य मनुष्य नहीं रह जाता तो सब एक-दूसरे की पीठ की चमड़ी उधेड़ने लगते हैं.
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सरकारी बैंकों की हालत क्यों ख़राब है?
- Thursday December 27, 2018
- रवीश कुमार
2018 का साल आया नहीं था, कि न्यूज़ चैनलों पर 2019 को लेकर चर्चा शुरू हो गई. सर्वे दिखाए जाने लगे. काश ऐसा कोई डाटा होता कि एक साल में 2019 को लेकर कितने सर्वे आए और चैनलों पर कितने कार्यक्रम चले तो आप न्यूज़ चैनलों के कंटेंट को बहुत कुछ समझ सकते थे.
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ये क्या! मार्च में फिर नोटबंदी जैसे हालात? एटीएम के आगे लग सकती हैं लंबी-लंबी लाइनें
- Monday November 26, 2018
- ख़बर न्यूज़ डेस्क
साल 2016 में 8 नवंबर को किए गए नोटबंदी के फैसले की यादें अभी पूरी तरह से मिटी नही हैं. बैंकों में पुराने नोट लिए और जरूरत के लिए करेंसी निकालने के लिए लंबी- लंबी लाइनों को लोग याद करते ही डर जाते हैं. करीब 50 दिन तक पूरे देश में ऐसी ही हालत थे. हालांकि केंद्र सरकार का दावा करती रही है कि इस फैसले के पीछे कालाधन और भ्रष्टाचार मिटाने की कवायद है. हालांकि अभी तक यह बहस का मुद्दा है कि इससे से क्या फायदा हुआ है.
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बैंकरों का विरोध प्रदर्शन, आखिर क्यों बैंकर बेचें बीमा पॉलिसी?
- Wednesday March 21, 2018
- रवीश कुमार
पिछले दो साल से बैंक से संबंधित ख़बरों को दिलचस्पी से पढ़ता रहा हूं. चेयरमैनों के इंटरव्यू से बातें तो बड़ी बड़ी लगती थीं लेकिन बैंक के भीतर की वे समस्याएं कभी नहीं दिखीं जो बैंकर के जीवन में बहुत बड़ी हो गई हैं. बैंक सीरीज़ के दौरान सैकड़ों बैंकरों से बात करते हुए हमारी आज की ज़िंदगी को वो भयावह तस्वीर दिखी जिसे हम जानते हैं, सहते हैं मगर भूल गए हैं कि ये दर्द है. इसे एक हद के बाद सहा नहीं जाना चाहिए.
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बैंकों पर आए भीषण संकट के बीच कैसे सुरक्षित रख सकते हैं अपना पैसा
- Thursday March 16, 2023
- Translated by: विवेक रस्तोगी
क्षेत्रीय अमेरिकी बैंकों की वित्तीय हालत को लेकर भी चिंता बरकरार है. डिपॉज़िट और निवेश को लेकर इसके क्या मायने हैं - पर्सनल फाइनेंस विशेषज्ञों ने ऐसे टिप्स दिए हैं, जिनसे आप ऐसे वक्त में शांत रहकर अपने पैसे का प्रबंधन कर सकते हैं.
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आर्थिक मार झेल रहे किसान दशरथ लक्ष्मण केदारी के सुसाइड नोट के बाद 'अन्नदाताओं' की हालत पर चर्चा तेज लेकिन..
- Wednesday September 21, 2022
- Reported by: सुनील कुमार सिंह
केदारी के पास अपनी 30 गुंठा जमीन थी, दूसरों के खेत लेकर भी वे खेती किया करते थे लेकिन भारी बारिश की वजह से इस बार उनकी सोयाबीन और टमाटर की पूरी फसल बर्बाद हो गई.ऊपर से खेती के लिए अलग-अलग सहकारी बैंकों, फाइनेंस कंपनियों और परिचितों से लिए लगभग 8 से 10 लाख रुपये के कर्ज का बोझ उन पर था.
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बजट 2020: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अरुण जेटली को दी श्रद्धांजलि, कहा- उनके चलते GST लागू हुआ
- Saturday February 1, 2020
- Written by: अल्केश कुशवाहा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने संसद में बजट (Budget 2020-21) का भाषण दिया. वित्तमंत्री के रूप में उन्होंने दूसरी बार बजट पेश किया. इस दौरान उन्होंने GST का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने अरुण जेटली को याद किया और कहा कि उनकी दूरदर्शिता के चलते GST लागू हुआ और इससे डरावना इंस्पेक्टर राज खत्म हो गया है. बैंकिंग सिस्टम सुधार आया है जिससे बैंकों की हालत में सुधार हुआ है. अब तक 40 करोड़ का जीएसटी फाइल हो चुका है.
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आर्थिक सुस्ती के बीच RBI गवर्नर ने बैंकों से कहा- आ सकती हैं चुनौतियां, रहें तैयार
- Thursday December 12, 2019
- भाषा
देश में इन दिनों अर्थव्यवस्था की हालत अच्छी नहीं है. इसी बीच रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैंकों से चुनौतियों सेते लिए तैयार रहने को कहा है.
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देश के आर्थिक हालात पर वित्त मंत्री का बयान, कहा - हमारी विकास दर दूसरों से बेहतर है
- Friday August 23, 2019
- Written by: प्रभात उपाध्याय
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने शुक्रवार को देश के आर्थिक हालत पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया.
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मोदी सरकार का ये आर्थिक सर्वे क्या इशारा कर रहा है?
- Friday July 5, 2019
- रवीश कुमार
अर्थव्यवस्था की हालत क्या है. जो ख़बरें बिजनेस अखबारों में छप रही हैं उन्हें देखकर लगता है कि चुनौतियां गंभीर होती जा रही हैं. लगातार 9 महीने से ऑटोमोबिल कंपनियों में उत्पादन ठप्प है. लघु एवं मझोले उद्योग का विकास रुक गया है. इनके लिए लोन की कमी हो गई है. जिन संस्थाओं से लोन मिलता है, उनकी हालत खराब है. एकर आरटीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2019 में दूसरी तरफ मुदा लोन का एनपीए 126 प्रतिशत बढ़ा है. बैंकों की अपनी पूंजी लड़खड़ा रही है. वो सरकार की मदद पर निर्भर है.
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बैंकों में ग़ुलामी आई है, शेयर खरीदें मैनेजर-क्लर्क, पैसा नहीं तो लोन लें
- Tuesday February 26, 2019
- रवीश कुमार
मैंने बैंक सीरीज़ की शुरुआत में ही और शायद पिछले साल इसी वक्त लिखा था कि बैंकों के भीतर गुलामी चल रही है. तब लगा था कि मैं गलत हूं. मैं कौन सा समाजशास्त्री हूं. इतनी बड़ी बात कैसे कह दी कि बैंकों में ग़ुलामी की प्रथा चल रही है. लेकिन अब मैं इसे होते हुए देख रहा हूं. अगर बैंकर गुलाम हो सकते हैं तो बाकियों की क्या हालत होगी. सोचिए आज बैंकरों के लिए कोई नहीं है. बैंकर भी ख़ुद के नहीं हैं.जब मनुष्य मनुष्य नहीं रह जाता तो सब एक-दूसरे की पीठ की चमड़ी उधेड़ने लगते हैं.
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सरकारी बैंकों की हालत क्यों ख़राब है?
- Thursday December 27, 2018
- रवीश कुमार
2018 का साल आया नहीं था, कि न्यूज़ चैनलों पर 2019 को लेकर चर्चा शुरू हो गई. सर्वे दिखाए जाने लगे. काश ऐसा कोई डाटा होता कि एक साल में 2019 को लेकर कितने सर्वे आए और चैनलों पर कितने कार्यक्रम चले तो आप न्यूज़ चैनलों के कंटेंट को बहुत कुछ समझ सकते थे.
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ये क्या! मार्च में फिर नोटबंदी जैसे हालात? एटीएम के आगे लग सकती हैं लंबी-लंबी लाइनें
- Monday November 26, 2018
- ख़बर न्यूज़ डेस्क
साल 2016 में 8 नवंबर को किए गए नोटबंदी के फैसले की यादें अभी पूरी तरह से मिटी नही हैं. बैंकों में पुराने नोट लिए और जरूरत के लिए करेंसी निकालने के लिए लंबी- लंबी लाइनों को लोग याद करते ही डर जाते हैं. करीब 50 दिन तक पूरे देश में ऐसी ही हालत थे. हालांकि केंद्र सरकार का दावा करती रही है कि इस फैसले के पीछे कालाधन और भ्रष्टाचार मिटाने की कवायद है. हालांकि अभी तक यह बहस का मुद्दा है कि इससे से क्या फायदा हुआ है.
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बैंकरों का विरोध प्रदर्शन, आखिर क्यों बैंकर बेचें बीमा पॉलिसी?
- Wednesday March 21, 2018
- रवीश कुमार
पिछले दो साल से बैंक से संबंधित ख़बरों को दिलचस्पी से पढ़ता रहा हूं. चेयरमैनों के इंटरव्यू से बातें तो बड़ी बड़ी लगती थीं लेकिन बैंक के भीतर की वे समस्याएं कभी नहीं दिखीं जो बैंकर के जीवन में बहुत बड़ी हो गई हैं. बैंक सीरीज़ के दौरान सैकड़ों बैंकरों से बात करते हुए हमारी आज की ज़िंदगी को वो भयावह तस्वीर दिखी जिसे हम जानते हैं, सहते हैं मगर भूल गए हैं कि ये दर्द है. इसे एक हद के बाद सहा नहीं जाना चाहिए.
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