दुनिया भर में इंटरनेट की स्पीड और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए फाइबर ऑप्टिक केबल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इन्हें अब तक सबसे सुरक्षित और तेज इंटरनेट तकनीक माना जाता था. माना जाता था कि इन केबल्स को हैक करना या इन पर नजर रखना बेहद मुश्किल है. लेकिन अब एक नई स्टडी ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिसर्चर्स का कहना है कि फाइबर ऑप्टिक केबल्स पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं और इनके जरिए आस-पास की आवाजों या कंपन को भी महसूस किया जा सकता है. इस खुलासे ने डिजिटल प्राइवेसी को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है.

कैसे काम करती हैं फाइबर ऑप्टिक केबल्स?
फाइबर ऑप्टिक केबल्स बहुत पतले ग्लास या प्लास्टिक फाइबर से बनी होती हैं. इनमें डेटा बिजली से नहीं बल्कि लाइट सिग्नल्स के जरिए ट्रांसफर होता है. यही वजह है कि इनकी स्पीड नॉर्मल इंटरनेट केबल्स से कई गुना ज्यादा होती है. वीडियो कॉलिंग, ऑनलाइन गेमिंग, क्लाउड सर्विस और हाई स्पीड इंटरनेट के लिए आज दुनिया भर में इनका इस्तेमाल किया जा रहा है.
क्या हो सकता है इसका खतरा?
रिसर्च में सामने आया है कि फाइबर ऑप्टिक केबल्स बेहद संवेदनशील होती हैं. अगर इनके पास कोई आवाज, हलचल या कंपन होता है तो उसका असर केबल में गुजरने वाले लाइट सिग्नल पर पड़ सकता है. मॉडर्न सेंसर और AI की मदद से इन बदलावों को पढ़ा जा सकता है.
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इसका मतलब यह है कि भविष्य में इन केबल्स का इस्तेमाल केवल इंटरनेट डेटा भेजने के लिए ही नहीं बल्कि निगरानी के लिए भी किया जा सकता है. अगर इस तकनीक का गलत इस्तेमाल हुआ तो लोगों की निजी बातचीत, ऑफिस मीटिंग्स या आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है. यही वजह है कि साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स अब इसे डिजिटल प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं.
फिलहाल आम यूजर्स के लिए घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह जरूर साफ हो गया है कि टेक्नोलॉजी जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर खतरे भी उतनी ही तेजी से बदल रहे हैं.
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