जब भी हम हवाई जहाज में सफर करते हैं, तो टेकऑफ से पहले एयर होस्टेस और केबिन क्रू हमें सीट बेल्ट और इमरजेंसी एग्जिट से जुड़ी जरूरी जानकारी देते हैं. लेकिन क्या आपने नोटिस किया है कि टेकऑफ और लैंडिंग के समय फ्लाइट अटेंडेंट अपने हाथों पर बैठते हैं! यह पोजीशन थोड़ी अजीब लग सकती है और कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है और क्या इसका मतलब कोई खतरा है? चलिए आज बताते हैं इस सवाल का जवाब.

सेफ्टी के लिए होती है यह खास पोजीशन
असल में, यह कोई अजीब आदत नहीं बल्कि एक जरूरी सेफ्टी तकनीक है. इसे 'ब्रैस पोजीशन' कहा जाता है. यह पोजीशन खासतौर पर टेकऑफ और लैंडिंग के समय अपनाई जाती है. इस दौरान किसी भी इमरजेंसी या अचानक झटके की स्थिति में शरीर को सुरक्षित रखने के लिए यह पोजीशन बेहद मददगार होती है.
हाथों पर बैठने का असली कारण
जब फ्लाइट अटेंडेंट अपने हाथों पर बैठते हैं, तो इसका मकसद उनके हाथों और बाजुओं को स्थिर रखना होता है. इससे अचानक झटके या हादसे के समय हाथ इधर-उधर नहीं जाते और चोट लगने का खतरा कम हो जाता है. इस पोजीशन में शरीर थोड़ा झुका हुआ रहता है, जिससे सिर और शरीर को भी बेहतर सुरक्षा मिलती है.
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दिमाग में चलता है 'साइलेंट चेक'
इस दौरान फ्लाइट अटेंडेंट सिर्फ बैठे नहीं रहते, बल्कि उनके दिमाग में एक 'साइलेंट रिव्यू' चलता रहता है. वे मानसिक रूप से कई जरूरी चीजों की तैयारी करते हैं, जैसे इमरजेंसी एग्जिट कहां हैं? उन्हें कैसे खोलना है, किन यात्रियों से जरूरत पड़ने पर मदद ली जा सकती है और इमरजेंसी में कौन-कौन से निर्देश देने हैं.
क्या यात्रियों को भी ऐसा करना चाहिए?
आम तौर पर यात्रियों को हाथों पर बैठने की जरूरत नहीं होती. लेकिन अगर कोई इमरजेंसी स्थिति बनती है, तो फ्लाइट अटेंडेंट यात्रियों को सही 'ब्रैस पोजीशन' अपनाने के लिए निर्देश देते हैं. यह जानकारी आपको सीट के सामने रखे सेफ्टी कार्ड में भी मिल सकती है, जिसे हर यात्री को उड़ान शुरू होने से पहले जरूर पढ़ना चाहिए.
तो अब अगली बार जब आप फ्लाइट में एयर होस्टेस को हाथों पर बैठे देखें, तो समझ जाएं कि वे अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं और आपकी सुरक्षा सुनिश्चित कर रही हैं.
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