AI हर दिन और बेहतर होता जा रहा है. अब यह सिर्फ लिखने या जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल जैसे सेंसिटिव क्षेत्रों में भी अपनी जगह बना रहा है. हाल ही में Harvard Medical School और Beth Israel Deaconess Medical Center की एक नई स्टडी में पाया गया कि AI मॉडल कई मामलों में डॉक्टरों के बराबर, और कुछ स्थितियों में उनसे बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, खासकर क्लिनिकल रीजनिंग यानी मरीज की स्थिति समझकर सही निर्णय लेने में.

स्टडी में पाया गया कि कम से कम एक बड़े लैंग्वेज मॉडल (LLM) ने कई मामलों में डॉक्टरों से ज्यादा सटीक रिजल्ट दिए. इसमें इमरजेंसी रूम में निर्णय लेना, सही बीमारी की पहचान करना और इलाज के अगले कदम तय करना शामिल था. रिसर्च टीम के अनुसार, AI मॉडल ने पुराने मॉडल्स और डॉक्टरों दोनों से बेहतर प्रदर्शन किया. एक रिसर्चर ने कहा कि उन्होंने AI को हर तरह के टेस्ट में जांचा और इसके नतीजे उम्मीद से ज्यादा बेहतर निकले.
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इमरजेंसी रूम में हुआ असली टेस्ट
इस स्टडी में 76 इमरजेंसी केस लिए गए, जहां मरीज की हालत के अनुसार तुरंत फैसले लेने होते हैं, जैसे इलाज की प्राथमिकता तय करना या ICU में भर्ती करना. इन मामलों में AI के जवाबों की तुलना डॉक्टरों के फैसलों से की गई. फिर अन्य डॉक्टरों से बिना बताए यह जांच करवाया गया कि कौन-सा निर्णय इंसान का है और कौन-सा AI का. नतीजों में सामने आया कि AI कई बार डॉक्टरों के बराबर या उनसे थोड़ा बेहतर प्रदर्शन कर रहा था.
स्टडी के दौरान वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि उन्होंने डेटा को पहले से प्रोसेस नहीं किया था, फिर भी AI ने सटीक परिणाम दिए. शुरुआत में उन्हें लगा था कि यह सिर्फ एक प्रयोग होगा और शायद ज्यादा सफल नहीं होगा, लेकिन नतीजे उम्मीद से कहीं ज्यादा अच्छे रहे.
क्या AI डॉक्टरों की जगह ले सकता है?
हालांकि इस स्टडी के नतीजे काफी प्रभावशाली हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि AI डॉक्टरों की जगह ले सकता है. रिसर्चर्स का कहना है कि AI अभी पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से इलाज करने के लिए तैयार नहीं है.
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