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AI का डार्क साइड: बिना सोचे-समझे भरोसा करने वाले 10 में से 8 लोग खा रहे हैं धोखा!

रिसर्चर्स का कहना है कि AI पर भरोसा करना पूरी तरह गलत नहीं है. अगर AI सही और भरोसेमंद है, तो यह हमारे फैसलों को बेहतर बना सकता है.

AI का डार्क साइड: बिना सोचे-समझे भरोसा करने वाले 10 में से 8 लोग खा रहे हैं धोखा!

एक नई स्टडी में सामने आया है कि लोग धीरे-धीरे अपनी खुद की सोच और समझ को छोड़कर AI चैटबॉट्स पर ज्यादा भरोसा करने लगे हैं. पहले लोग किसी भी जानकारी को खुद सोच-समझकर जांचते थे, लेकिन अब वे AI के जवाबों को बिना ज्यादा सोचे-समझे सही मान लेते हैं. यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है और रिसर्चर्स का कहना है कि अगर इसे कंट्रोल नहीं किया गया, तो यह इंसानों की सोचने की क्षमता पर असर डाल सकता है.

AI से मदद भी और नुकसान भी

इसमें कोई शक नहीं है कि AI इंसानों की मदद कर रहा है. यह काम को तेज बना रहा है, प्रोडक्टिविटी बढ़ा रहा है और लोगों को कम समय में ज्यादा काम करने में मदद दे रहा है. लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है. जब लोग हर छोटे-बड़े काम के लिए AI पर निर्भर होने लगते हैं, तो वे खुद सोचना कम कर देते हैं. इससे धीरे-धीरे उनकी लॉजिकल सोच कमजोर हो सकती है और वे बिना जांचे AI के जवाबों को सच मानने लगते हैं.

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कॉग्निटिव सरेंडर क्या होता है?

इस स्टडी में एक खास शब्द इस्तेमाल किया गया है 'कॉग्निटिव सरेंडर'. इसका मतलब है कि इंसान अपनी सोच को छोड़कर AI पर पूरी तरह निर्भर हो जाता है यानी जब AI कोई जवाब देता है, तो लोग उसे बिना सवाल किए स्वीकार कर लेते हैं, चाहे वह सही हो या गलत. यह एक खतरनाक स्थिति हो सकती है, क्योंकि इससे गलत फैसले लेने का खतरा बढ़ जाता है.

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सोचने का काम कम

रिसर्च के अनुसार, पहले इंसानों की सोच दो तरीकों से काम करती थी एक तेज और सहज सोच (इंट्यूटिव), और दूसरी धीमी और समझदारी वाली सोच (एनालिटिकल). लेकिन अब AI के आने से तीसरा तरीका भी जुड़ गया है, जिसे 'सिस्टम 3' कहा गया है. इसमें इंसान अपनी सोच का काम मशीन को दे देता है. यानी लोग खुद सोचने के बजाय AI से जवाब लेकर उसी पर भरोसा करने लगते हैं.

रिसर्चर्स ने एक टेस्ट किया, जिसमें लोगों को एक AI चैटबॉट का इस्तेमाल करने का विकल्प दिया गया. यह चैटबॉट केवल 50% समय ही सही जवाब दे रहा था, बाकी समय गलत जानकारी दे रहा था. इसके बावजूद, लोगों ने 93% बार AI के सही जवाबों को स्वीकार किया और हैरानी की बात यह है कि लगभग 80% बार उन्होंने AI के गलत जवाबों को भी सही मान लिया. इसका मतलब है कि लोग बिना जांचे AI पर भरोसा कर रहे हैं.

रिसर्चर्स का कहना है कि AI पर भरोसा करना पूरी तरह गलत नहीं है. अगर AI सही और भरोसेमंद है, तो यह हमारे फैसलों को बेहतर बना सकता है. लेकिन असली खतरा तब होता है जब लोग बिना सोचे-समझे AI पर पूरी तरह निर्भर हो जाते हैं. इसलिए जरूरी है कि हम AI का इस्तेमाल समझदारी से करें और उसके जवाबों को हमेशा एक बार खुद भी जांचें.

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