- बिल गेट्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी से बढ़ती क्षमता और खतरनाक सीमाओं को लेकर गंभीर चेतावनी दी है
- गेट्स ने कहा कि एआई का प्रभाव पर्सनल कंप्यूटर और इंटरनेट क्रांति से पूरी तरह भिन्न और अधिक गहरा होगा
- माइक्रोसॉफ्ट फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार एआई समाज में बराबरी लाने का जरिया बन सकता है यदि इसे सही दिशा मिले
माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर चेतावनी दी है. उनकी वॉर्निंग ने सोचने पर मजबूर कर दिया है. जीवन भर इनोवेशन के सबसे बड़े पैरोकार रहे बिल गेट्स का खुद AI की बेलगाम रफ्तार को धीमा करने का समर्थन करना बेहद हैरान करने वाला है. दिग्गज टेक विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं की एक लंबी सूची में अब गेट्स भी शामिल हो गए हैं, जिनका मानना है कि उन्नत एआई के विकास की गति को थोड़ा धीमा करना पूरी मानव जाति के लिए फायदेमंद साबित होगा.
माइकलसॉफ्ट युग से कितना अलग है AI?
NDTV को दिए एक इंटरव्यू में बिल गेट्स ने एआई के प्रभावों को लेकर सचेत करते हुए कहा कि जो लोग सोचते हैं कि AI के प्रभावों को संभालना उतना ही आसान होगा जितना कि पिछली तकनीकों को संभालना था, वे गलतफहमी में हैं.
गेट्स ने बताया कि पर्सनल कंप्यूटर (PC) और इंटरनेट क्रांति के दौरान अपने माइक्रोसॉफ्ट करियर में उन्होंने जिस दौर को देखा है, AI उससे पूरी तरह से अलग और बहुत ज्यादा गहरा है.
एआई की तेजी से बढ़ती क्षमता और इसकी संभावित खतरनाक सीमाओं पर बात करते हुए गेट्स फाउंडेशन की 10वीं वार्षिक 'गोलकीपर्स रिपोर्ट' का भी जिक्र किया गया. इस रिपोर्ट के अनुसार, AI समाज में बराबरी लाने का एक बहुत बड़ा जरिया बन सकता है, लेकिन यह तभी संभव है जब इसे खास तौर से उन लोगों के फायदे के लिए बनाया जाए जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है.
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— NDTV (@ndtv) September 15, 2026
दुनिया भर के टेक दिग्गजों ने मिलाया सुर में सुर
यह केवल बिल गेट्स की चिंता नहीं है. दुनिया के कई दिग्गज और एआई विशेषज्ञ इस बात पर एकमत दिख रहे हैं कि एआई का विकास बहुत नाटकीय मोड़ ले सकता है, जिससे हालात को काबू में रखना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा.
OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन और स्पेसएक्स और एआई से जुड़े एलन मस्क जैसे बड़े नाम भी इस बात से सहमत हैं कि एआई के अनियंत्रित विकास पर ब्रेक लगाना जरूरी है. एंथ्रोपिक के पूर्व कर्मचारी जैकब कॉक्सन और गूगल डीपमाइंड के पूर्व शोधकर्ता बिलाल चुगताई जैसे विशेषज्ञों ने पिछले दिनों चेतावनी दी थी. उनका मानना है कि अगर एआई इसी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा, तो यह इस दशक के अंत तक मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है.
भारत के लिए क्या है सबक और राह?
बिल गेट्स ने कहा कि जहां एक तरफ दुनिया एआई की बेकाबू रफ्तार से डरी हुई है, वहीं भारत को इस तकनीक को लेकर अपना एक अलग और संतुलित रास्ता चुनना होगा. भारत को एआई के विनाशकारी पहलुओं से बचते हुए इसके सकारात्मक इस्तेमाल पर जोर देने की दरकार है.
उन्होंने कहा, "भारत में करोड़ों-लाखों किसान AI का सीधा फायदा उठा सकते हैं. मौसम के सटीक अनुमान, फसलों की बीमारी पहचानने और पैदावार बढ़ाने के लिए एआई एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है. भारत की स्वास्थ्य सेवाओं को तेजी से बेहतर बनाने और दूरदराज के गांवों तक इलाज पहुंचाने के लिए एआई का इस्तेमाल संजीवनी का काम कर सकता है. भारत को दुनिया की देखा-देखी सिर्फ रफ्तार की दौड़ में शामिल होने के बजाय, इसे अपने नागरिकों की भलाई के लिए सही दिशा में इस्तेमाल करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए."
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