विजेंदर सिंह का फाइल फोटो...
- दिल्ली में उनका मुक़ाबला ऑस्ट्रेलिया के केरी होप से है।
- विजेंदर एक के बाद एक 6 बॉक्सर्स को धूल चटा चुके हैं।
- पेशेवर बॉक्सिंग से पहले विजेंदर का करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा।
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नई दिल्ली:
भारतीय बॉक्सिंग का पोस्टर बॉय विजेंदर सिंह पेशेवर बॉक्सिंग में धूम मचा रहा है। विजेंदर एक के बाद एक 6 बॉक्सर्स को धूल चटा चुके हैं और अब वे पहली बार भारत की जमीन पर पेशेवर बॉक्सिंग लड़ने जा रहे हैं। दिल्ली में उनका मुक़ाबला ऑस्ट्रेलिया के केरी होप से है।
29 जून 2015 को विजेंदर सिंह ने पेशेवर बॉक्सिंग की दुनिया में कदम रखने का फ़ैसला किया। IOS Sports and Entertainment के माध्यम से उन्होने फ़्रैंक वारेन के Queensberry Promotions के साथ करार किया। ये एक बड़ा फ़ैसला था, क्योंकि इसके साथ ही ओलिंपिक में हिस्सा लेने के लिए वे अयोग्य हो गए, लेकिन पेशेवर रिंग में वे सफलता के नए झंडे गाड़ रहे हैं।
पेशेवर बॉक्सिंग से पहले विजेंदर का करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा। साल 2008... बीजिंग ओलिंपिक विजेंदर सिंह के करियर का सबसे यादगार लम्हा था। भिवानी के एक बस ड्राइवर के बेटे विजेंदर सिंह ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारतीय बॉक्सिंग का चेहरा बन गए, लेकिन दौलत और शहरत की चमक-दमक के बीच ये चैंपियन बॉक्सर फिर वो कामयाबी नहीं दोहरा पाया। दिल्ली में 2010 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में उनसे गोल्ड की उम्मीद थी, लेकिन वे ब्रॉन्ज मैडल जीत पाए।
साल 2012 का मार्च महीना में उनके करियर के लिए सबसे स्याह दिन लेकर आया। उन पर ड्रग्स रखने और सेवन का आरोप लगा। इन तमाम मुश्किलों से निकलकर विजेंदर 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ में सिल्वर मेडल जीतने में कामयाब रहे। उसके बाद वे पेशेवर बॉक्सिंग की ओर मुड़ गए।
29 जून 2015 को विजेंदर सिंह ने पेशेवर बॉक्सिंग की दुनिया में कदम रखने का फ़ैसला किया। IOS Sports and Entertainment के माध्यम से उन्होने फ़्रैंक वारेन के Queensberry Promotions के साथ करार किया। ये एक बड़ा फ़ैसला था, क्योंकि इसके साथ ही ओलिंपिक में हिस्सा लेने के लिए वे अयोग्य हो गए, लेकिन पेशेवर रिंग में वे सफलता के नए झंडे गाड़ रहे हैं।
- 20 अक्टूबर 2015 को उनका पहला मुक़ाबला हुआ। टेक्निकल नॉक आउट के आधार पर वे सोनी वाइटिंग को हराने में कामयाब रहे। सोनी वाइटिंग ब्रिटिश बॉक्सर थे।
- 7 नवंबर को उनका दूसरा बाउट डबलिन में हुआ। विजेंदर ने दूसरे ब्रिटिश बॉक्सर डीन गिलेन का पहले ही राउंड में हरा दिया।
- 19 दिसंबर को तीसरे मुक़ाबले में उन्होंने बुलगारिया सैमेट ह्यूसिनोव को शिकस्त दी।
- इस साल 21 मार्च को उन्होने हंगरी के एलेक्ज़ेंडर होरवथ को तीसरे राउंड में हराया।
- पांचवें मुक़ाबले में उन्होंने फ्रांस के मैटियोज़ रोयर को धूल चटाई।
- मई में विजेंदर ने पोलैंड के आंद्रेज़ सोल्द्रा को मात दी।
पेशेवर बॉक्सिंग से पहले विजेंदर का करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा। साल 2008... बीजिंग ओलिंपिक विजेंदर सिंह के करियर का सबसे यादगार लम्हा था। भिवानी के एक बस ड्राइवर के बेटे विजेंदर सिंह ओलिंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारतीय बॉक्सिंग का चेहरा बन गए, लेकिन दौलत और शहरत की चमक-दमक के बीच ये चैंपियन बॉक्सर फिर वो कामयाबी नहीं दोहरा पाया। दिल्ली में 2010 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में उनसे गोल्ड की उम्मीद थी, लेकिन वे ब्रॉन्ज मैडल जीत पाए।
साल 2012 का मार्च महीना में उनके करियर के लिए सबसे स्याह दिन लेकर आया। उन पर ड्रग्स रखने और सेवन का आरोप लगा। इन तमाम मुश्किलों से निकलकर विजेंदर 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ में सिल्वर मेडल जीतने में कामयाब रहे। उसके बाद वे पेशेवर बॉक्सिंग की ओर मुड़ गए।
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