भारत की शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के अपने ऐतिहासिक स्वर्ण पदक को अपनी नेत्रहीन मां को समर्पित किया. शर्मिला ने महिलाओं की शॉट पुट एफ57 का खिताब जीतने के लिए 9.81 मीटर का सीजन का सबसे अच्छा थ्रो किया. वह कॉमनवेल्थ पैरा-एथलेटिक्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली पैरा-एथलीट हैं. उनकी जीत ने न सिर्फ कॉमनवेल्थ गेम्स पैरा-एथलेटिक्स मेडल के लिए भारत का 20 साल का इंतजार खत्म किया, बल्कि हमवतन शिल्पा शायला के साथ मिलकर एक लैंडमार्क डबल पोडियम फिनिश भी हासिल किया. शिल्पा शायला ने कांस्य पदक जीता.
ऐतिहासिक जीत के बाद शर्मिला ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, 'मैं यह पदक अपनी मां को समर्पित करूंगी. मेरी मां अंधी हैं, और हर तरफ से बुराई के बावजूद, वह बचपन से ही मेरा साथ दे रही हैं. मैं बहुत खुश हूं कि मैंने अपनी मां का सपना पूरा किया.' यह जीत न सिर्फ 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स कैंपेन के लिए बल्कि पूरे भारतीय पैरा-एथलेटिक्स के लिए भी एक बड़ी कामयाबी है. शर्मिला ने कहा कि यह पदक देश का है और उम्मीद है कि यह आने वाले सालों में कई और लोगों को पोडियम फिनिश के लिए प्रेरित करेगा.
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उन्होंने कहा, 'हम बहुत खुश हैं. हम अपने देश के लिए मेडल जीतते रहेंगे. हम कड़ी मेहनत करते रहेंगे. हम अगले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए अच्छी तैयारी करेंगे. यह हमारे पैराथलेटिक्स का पहला स्वर्ण पदक है.' ग्लासगो में इतिहास रचने के बावजूद, नई कॉमनवेल्थ चैंपियन को इस कामयाबी की अहमियत अभी पूरी तरह समझ नहीं आई थी.
शर्मिला ने कहा, 'मैं यह पदक जीतकर बहुत खुश हूं. लेकिन मुझे नहीं पता. मुझे 2-3 दिन बाद पता चलेगा कि मैंने पदक जीत लिया है. यह एक सपने जैसा लगता है.'
अपना पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीतने के बाद, शर्मिला ने अपना ध्यान आने वाली चुनौतियों पर लगा दिया है. उन्होंने कहा कि हम अगले ओलंपिक गेम्स में खेलेंगे. यह मेरा पहला पदक है और मैं भविष्य में और पदक जीतना चाहती हूं.
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