कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (Commonwealth Games 2026) का रोमांच हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा है. टूर्नामेंट के पांच दिन समाप्त हो चुके हैं. छठवें का खेल जारी है. देशवासियों को पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाली वेटलिफ्टर निरुपमा देवी सेराम (Nirupama Devi Seram) से काफी उम्मीदें थी. मगर खिताब हासिल करने से वह चंद कदम दूर रह गईं. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में वह मेडल राउंड के दौरान मुकाबले को पूरा नहीं (DNF (Did Not Finish) कर पाईं. जिससे उन्हें मायूसी हाथ लगी. हालांकि, इसके बावजूद उनके खेल की चारों तरफ सराहना हो रही है. कॉमनवेल्थ गेम्स के 23वें सीजन में देश की तरफ से वह 63 किग्रा भार वर्ग में चुनौती पेश कर रहीं थी. जहां निराथा हाथ लगी.
सुविधाओं से जुझते हुए ग्लासगो तक पहुंची थीं निरुपमा
निरुपमा को अपने शुरुआती करियर में बुनियादी सुविधाओं का काफी सामना करना पड़ा था. इसके बावजूद वह कड़ी जद्दोजहद करते हुए ग्लासगो तक पहुंचने में कामयाब रहीं. निरुपमा को शुरुआती दौर में प्रॉपर तरीके से जिम, डाइट और रिकवरी की सुविधा नहीं प्राप्त हुई थी. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने सपने को पूरा करने के लिए जद्दोजहद करती रहीं.
यहीं नहीं पिछले साल मणिपुर में हुई हिंसा का असर उनके खेल पर भी पड़ा था. मजबूरी में ट्रेनिंग छोड़कर उन्हें भी अन्य खिलाड़ियों की तरह घर लौटना पड़ा था. जिससे वो काफी आहत थीं. उनकी ट्रेनिंग में भी काफी अड़चने आईं थी.
मीराबाई चानू हैं निरुपमा की प्रेरणा
निरुपमा को वेटलिफ्टिंग में करियर संवारने की प्रेरणा लाखों लड़कियों की तरह देश की स्टार महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू से मिली थी. उनका हमेशा से मानना था कि अगर दीदी कर सकती हैं तो हम भी कर सकते हैं.
निरुपमा का भविष्य है उज्जवल!
निरुपमा मौजूदा समय में 24 साल की हैं. उनका भविष्य काफी उज्जवल है. कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में शिरकत करना ये दर्शाता है कि आने वाले दिनों में वह देश के लिए काफी मेडल ला सकती हैं.
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