विज्ञापन

बचपन में कटा हाथ, पर नहीं ही मानी हार, 'स्वर्णवीर' निषाद कुमार की संघर्षमयी कहानी, 2013 बना टर्निंग प्वाइंट

निषाद कुमार ने सोमवार को पैरा एशियाड में भारत के लिए लंबी कूद में स्वर्ण पदक जीता. और ऊंची कूद में भी भी पिछली बार स्वर्ण जीतने वाले निषाद से इस बार भी सोने की उम्मीद है

बचपन में कटा  हाथ, पर नहीं ही मानी हार, 'स्वर्णवीर' निषाद कुमार की संघर्षमयी कहानी, 2013 बना टर्निंग प्वाइंट
निषाद कुमार ने सोमवार को लंबी कूद में स्वर्ण पदक जीता
source: X

भारत के निषाद कुमार ने सोमवार को यहां एची नोगाया में खेले जा रहे एशियाई पैरा खेलों में पुरुषों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता की लंबी कूद टी47 स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता. इस 27 वर्षीय खिलाड़ी ने पिछले एशियाई पैरा खेलों में भी ऊंची कूद की टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था. उन्होंने मौजूदा खेलों की पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता के पहले दिन लंबी कूद में अपने तीसरे और पांचवें दोनों प्रयासों में 7.11 मीटर की छलांग लगाई.कुल मिलाकर यह निषाद कुमार का लगातार दूसरे पैरा एशियाड में स्वर्ण पदक है. और वह अपने इस प्रदर्शन के दम पर देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं.एक ऐसे खिलाड़ी, जिन्होंने जीवन में तमाम मुसीबतों और बाधाओं से पार पाते हुए ये उपलब्धियां हासिल कीं. चलिए निषाद कुमार के बारे में आप डिटेल से जानिए. और यह भी जानिए कि पैरा खिलाड़ियों की टी47 कैटेगिरी के क्या नियम हैं. 

1. बचपन में दुखद हादसे में चला गया हाथ

निषाद कुमार का जन्म हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के अंब उपमंडल स्थित 'बदाओ' गांव में हुआ. बचपन में वह अन्य सामान्य बच्चों की तरह बेहद चंचल और खेल-कूद के शौकीन थे, लेकिन 8 साल की उम्र में एक दर्दनाक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी. घर के खेत में चारा काटने वाली थ्रेशर मशीन की चपेट में आने से उनका दाहिना हाथ कट गया. इस गंभीर हादसे ने उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन निषाद ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.

Latest and Breaking News on NDTV

2. माता-पिता का सहयोग और अटूट त्याग

निषाद के इस कठिन सफर में उनके माता-पिता की भूमिका सबसे अहम रही.  उनके पिता रशपाल सिंह एक साधारण किसान हैं और मां पुष्पा देवी एक गृहणी हैं.हादसे के बाद जब समाज की नजरों में सहानुभूति और संशय था, तब माता-पिता ने निषाद को कभी 'दिव्यांग' महसूस नहीं होने दिया. और जब बाद में उन्होंने खेल के मैदान पर जोर-आजमाइश करने की ठानी, तब भी माता-पिता ने उन्हें हतोत्साहित नहीं किया. 


3. अभाव और गरीबी ने ली लगातार परीक्षा

एक सामान्य किसान परिवार से होने के बावजूद उनके पिता ने निषाद की खुराक, खेल उपकरण और कोचिंग के खर्चों के लिए कड़ी मेहनत की और कभी संसाधनों की कमी नहीं होने दी. मां ने हर मोड़ पर निषाद का हौसला बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. हादसे के बाद भी निषाद का खेलों के प्रति जुनून कम नहीं हुआ. स्कूल के दिनों में वे सामान्य बच्चों के साथ ही ऊंची कूद में भाग लिया करते थे.

साल 2013 बना टर्निंग प्वाइंट

साल 2013 में उनके स्कूल शिक्षक और कोच ने निषाद की असाधारण कूदने की क्षमता को पहचाना और उन्हें सामान्य स्पर्धाओं के बजाय आधिकारिक रूप से पैरा-एथलेटिक्स में किस्मत आजमाने की सलाह दी. फिर कुछ साल मेहनत करने के बाद निषाद  कुमार  वर्ष 2017 में जब वे साई (स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया) के केंद्र पहुंचे, और कोच विक्रम चौधरी के मार्गदर्शन में पेशेवर प्रशिक्षण शुरू किया. तब उन उनके करियर ने एक नया मोड़ लिया. इसके बाद नेशनल चैंपियनशिप में उनके शानदार प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय मंच के रास्ते खोल दिए.

अंतरराष्ट्रीय सफलता और पहचान

निषाद कुमार (T47 श्रेणी) ने विश्व पटल पर भारत का नाम लगातार ऊंचा किया है. और उन्होंने देश के लिए नियमित अंतराल पर उपलब्धियां हासिल कीं. टोक्यो पैरालंपिक 2020 में उन्होंने टी47 ऊंची कूद स्पर्धा में 2.06 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक  जीतने के साथ ही एशियाड में रिकॉर्ड बनाया.वहीं, चार साल बाद पेरिस पैरालंपिक में शानदार प्रदर्शन को दोहराते हुए भारत के लिए रजत पदक जीता. पैरालपिक से अलग निषाद पिछले दो एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुके हैं. पिछली बार उन्होंने हाई जंप में जीता था, तो इस बार लंबी कूद में भी अपना सिक्का जमा दिया. 

जानें क्या है T-47 कैटेगिरी

पैरालंपिक खेलों में टी-47 (T47) श्रेणी (जिसे कभी-कभी अनौपचारिक रूप से टी-27 या अन्य रूप में संदर्भित किया जाता है. हालांकि आधिकारिक वर्गीकरण T47 है जो ऊपरी अंग की विकलांगता वाले एथलीटों के लिए है) में ऊंची कूद के नियम पारंपरिक एथलेटिक्स नियमों के समान ही होते हैं, लेकिन इसमें एथलीटों की शारीरिक बनावट (जैसे हाथ का न होना या प्रभावित होना) को ध्यान में रखा जाता है. 

1. टेक-ऑफ और लीगल जंप के नियम 

एक पैर से कूदना अनिवार्य: एथलीट को कूदने के लिए जमीन से केवल एक ही पैर का उपयोग करना होगा यदि कोई एथलीट दोनों पैरों से टेक-ऑफ करता है, तो प्रयास अमान्य माना जाता है.

ऊपरी अंगों का संतुलन: T47 श्रेणी ऊपरी अंगों (हाथों की कमी या कमजोरी) से संबंधित है. ऊंची कूद के दौरान एथलीटों को दौड़ते समय और कूदते समय अपने असंतुलित ऊपरी शरीर के साथ तालमेल बिठाना होता है. इसके लिए नियमों में कोई अतिरिक्त सहायता की अनुमति नहीं होती. एथलीट अपनी प्राकृतिक शारीरिक क्षमता के अनुसार ही कूद लगाते हैं.

बार को पार करना: खिलाड़ी को बिना क्रॉसबार को गिराए उसके ऊपर से निकलना होता है.

2. फाउल या असफल प्रयास के नियम

बार का गिरना: यदि एथलीट के प्रयास के दौरान क्रॉसबार अपनी जगह से हिलकर नीचे गिर जाता है.

जमीन या मैट को छूना: यदि एथलीट क्रॉसबार के प्लेन से आगे जमीन या लैंडिंग एरिया को छू लेता है और बिना बार को पार किए.

खंभे से संपर्क: बार पार करने के बाद यदि एथलीट गलती से खंभे को छूकर बार को गिरा देता है.

3. प्रयास का समय और ऊंचाइयों का निर्धारण 

समय सीमा: पैरा-एथलेटिक्स के नियमानुसार, प्रत्येक एथलीट को अपना जंप पूरा करने के लिए सामान्यतः 60 सेकंड (1 मिनट) का समय मिलता है. बार की ऊंचाई की घोषणा के बाद उन्हें निर्धारित समय में प्रयास करना होता है.

ऊंचाई बढ़ाना: प्रतियोगिता शुरू होने से पहले गेम्स कमेटी शुरुआती ऊंचाई तय करती है. जैसे-जैसे प्रतियोगी बाहर होते जाते हैं, बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है. जब केवल एक ही प्रतियोगी बच जाता है, तो वह अपनी अगली ऊंचाई खुद चुन सकता है.

टाई होने के नियम: यदि दो या दो से अधिक एथलीट समान ऊंचाई पार करते हैं, तो उस ऊंचाई पर सबसे कम प्रयास करने वाले खिलाड़ी को विजेता घोषित किया जाता है.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Sports News, Athletics
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com