नरसिंह यादव (दाएं) ने सुशील कुमार पर कोर्ट में भी जीत हासिल कर ली थी (फाइल फोटो)
- 25 जून और 5 जुलाई के डोप टेस्ट में नरसिंह यादव हुए थे फेल
- नरसिंह ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज जीत किया था क्वालिफाई
- भारतीय कुश्ती संघ ने किया था नरसिंह यादव का समर्थन
डोपिंग मामले में नाडा की ओर से ओलिंपिक के लिए हरी झंडी पाने वाले पहलवान नरसिंह यादव की किस्मत उस समय चमकी थी, जब दो बार के ओलिंपिक पदक विजेता सुशील कुमार चोटिल होने के कारण क्वालिफाइंग टूर्नामेंट में भाग नहीं ले पाए थे. फिर क्या था नरसिंह ने क्वालिफाई कर लिया, लेकिन बावजूद इसके उनकी राह आसान नहीं रही. दरअसल भारत को जिन खेलों में मेडल की उम्मीद थी, उनमें से कुश्ती भी एक है. खासतौर से सुशील कुमार और नरसिंह यादव दोनों से मेडल की अपेक्षा थी, लेकिन सुशील का साथ किस्मत ने नहीं दिया और नरसिंह डोपिंग में फंस गए. भले ही उन्हें नाडा ने क्लीनचिट दे दी है, लेकिन अब भी मामला वाडा के पास फंस सकता है...फिलहाल तो वह 'हीरो' बन ही गए हैं...
सुशील कुमार चोटिल, नरसिंह को मिला मौका
सुशील कुमार और नरसिंह दोनों एक ही भार वर्ग 74 किलोग्राम से खेलते हैं। क्वालिफाइंग राउंड में चोटिल सुशील के नहीं जा पाने से नरसिंह को इसमें उतरने का मौका मिला और उन्होंने पिछले साल लास वेगास में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर ओलिंपिक कोटा हासिल कर लिया.
सुशील कुमार कोर्ट पहुंचे, नरसिंह की जीत
नरसिंह इसी भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए रियो ओलिंपिक जाने वाले थे, लेकिन बाद में सुशील ने इस पर अपना दावा ठोक दिया और कहा कि ओलिंपिक के लिए नाम फाइनल करने से पहले दोनों के बीच मुकाबला होना चाहिए और जो जीते उसे ओलिंपिक में प्रतिनिधित्व मिले. हालांकि भारतीय कुश्ती संघ ने इस मामले में नरसिंह का साथ दिया और उनका नाम IOA को भेज दिया. बस यहीं से विवाद शुरू हो गया और सुशील मामले को कोर्ट तक खींच ले गए. लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने सुशील कुमार की याचिका खारिज कर दी और नरसिंह का मार्ग प्रशस्त हो गया.
कोर्ट से बचे, तो डोपिंग ने घेरा, यहां भी सफल...
नरसिंह यादव कोर्ट की लड़ाई के बाद राहत की सांस ले ही रहे थे कि डोपिंग ने उन्हें 'डस' लिया. 25 जून को हुए डोप टेस्ट में वह फेल हो गए. फिर क्या था एक बार फिर उनके ओलिंपिक जाने पर सवाल खड़े हो गए. नरसिंह ने अपने खिलाफ साजिश की शिकायत की. जांच भी शुरू हुई. नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (NADA) ने मामले पर सुनवाई शुरू की. सुनवाई के दौरान ही खबर आई कि नरसिंह 5 जुलाई को हुए दूसरे डोप टेस्ट में भी फेल हो गए हैं. ऐसे में लगने लगा कि अब तो नरसिंह यादव के पक्ष में फैसला आना लगभग नामुमकिन है. एक और खबर आई कि उनके गवाह भी मुकर गए हैं. कयास लगाए जा रहे थे कि फैसला तो उनके खिलाफ ही आएगा, लेकिन सोमवार को उनकी किस्मत ने फिर पलटा खाया और नाडा का फैसला उनके पक्ष में आ गया, जो चौंकाने वाला रहा. कुछ भी हो वह फिलहाल तो रियो ओलिंपिक के लिए 75 किग्रा में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं.
लगातार चोटिल रहे सुशील कुमार
वैसे भी सुशील कुमार की महारत 66 किग्रा वर्ग में है. उन्होंने 2014 के ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले सभी प्रदर्शन इसी भार वर्ग में किए थे. ग्लास्गो में सुशील ने अपना भार वर्ग बदल लिया और गोल्ड जीता, लेकिन इसके बाद चोट ने उन्हें घेर लिया और वह लंबे समय तक रिंग से बाहर रहे. वह किसी भी बड़ी राष्ट्रीय या अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सके. 2012 से 2016 के बीच उन्होंने केवल दो अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया था, जबकि इससे पहले 2008 से 2012 के ओलंपिक के बीच उन्होंने 8 प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था.
पिछले 2 साल में नरसिंह का बेहतर रिकॉर्ड
यदि सुशील के पिछले दो साल के रिकॉर्ड को देखें, तो नरसिंह यादव का रिकॉर्ड उनसे बेहतर नजर आता है. खास बात यह कि उन्हें चोट संबंधी कोी समस्या नहीं रही, जो किसी भी खिलाड़ी के लिए अहम है. नरसिंह ने एशियन चैंपियनशिप और एशियन गेम्स-2014 में ब्रॉन्ज मैडल हासिल किया और अभी विश्व रैंकिंग में पांचवें नंबर पर हैं. साल 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में 74 किलो भार वर्ग में वह कांस्य पदक भी जीत चुके हैं. उन्होंने 2010 के राष्ट्रमंडल खेल में स्वर्ण पदक भी जीता था.
बस नरसिंह यादव के सामने अब एक ही मुश्किल होगी, विश्व एंटी डोपिंग एजेंसी (WADA) की सुनवाई में खुद को पाकसाफ साबित करना...
सुशील कुमार चोटिल, नरसिंह को मिला मौका
सुशील कुमार और नरसिंह दोनों एक ही भार वर्ग 74 किलोग्राम से खेलते हैं। क्वालिफाइंग राउंड में चोटिल सुशील के नहीं जा पाने से नरसिंह को इसमें उतरने का मौका मिला और उन्होंने पिछले साल लास वेगास में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर ओलिंपिक कोटा हासिल कर लिया.
सुशील कुमार कोर्ट पहुंचे, नरसिंह की जीत
नरसिंह इसी भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए रियो ओलिंपिक जाने वाले थे, लेकिन बाद में सुशील ने इस पर अपना दावा ठोक दिया और कहा कि ओलिंपिक के लिए नाम फाइनल करने से पहले दोनों के बीच मुकाबला होना चाहिए और जो जीते उसे ओलिंपिक में प्रतिनिधित्व मिले. हालांकि भारतीय कुश्ती संघ ने इस मामले में नरसिंह का साथ दिया और उनका नाम IOA को भेज दिया. बस यहीं से विवाद शुरू हो गया और सुशील मामले को कोर्ट तक खींच ले गए. लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने सुशील कुमार की याचिका खारिज कर दी और नरसिंह का मार्ग प्रशस्त हो गया.
कोर्ट से बचे, तो डोपिंग ने घेरा, यहां भी सफल...
नरसिंह यादव कोर्ट की लड़ाई के बाद राहत की सांस ले ही रहे थे कि डोपिंग ने उन्हें 'डस' लिया. 25 जून को हुए डोप टेस्ट में वह फेल हो गए. फिर क्या था एक बार फिर उनके ओलिंपिक जाने पर सवाल खड़े हो गए. नरसिंह ने अपने खिलाफ साजिश की शिकायत की. जांच भी शुरू हुई. नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (NADA) ने मामले पर सुनवाई शुरू की. सुनवाई के दौरान ही खबर आई कि नरसिंह 5 जुलाई को हुए दूसरे डोप टेस्ट में भी फेल हो गए हैं. ऐसे में लगने लगा कि अब तो नरसिंह यादव के पक्ष में फैसला आना लगभग नामुमकिन है. एक और खबर आई कि उनके गवाह भी मुकर गए हैं. कयास लगाए जा रहे थे कि फैसला तो उनके खिलाफ ही आएगा, लेकिन सोमवार को उनकी किस्मत ने फिर पलटा खाया और नाडा का फैसला उनके पक्ष में आ गया, जो चौंकाने वाला रहा. कुछ भी हो वह फिलहाल तो रियो ओलिंपिक के लिए 75 किग्रा में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं.
लगातार चोटिल रहे सुशील कुमार
वैसे भी सुशील कुमार की महारत 66 किग्रा वर्ग में है. उन्होंने 2014 के ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले सभी प्रदर्शन इसी भार वर्ग में किए थे. ग्लास्गो में सुशील ने अपना भार वर्ग बदल लिया और गोल्ड जीता, लेकिन इसके बाद चोट ने उन्हें घेर लिया और वह लंबे समय तक रिंग से बाहर रहे. वह किसी भी बड़ी राष्ट्रीय या अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सके. 2012 से 2016 के बीच उन्होंने केवल दो अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया था, जबकि इससे पहले 2008 से 2012 के ओलंपिक के बीच उन्होंने 8 प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था.
पिछले 2 साल में नरसिंह का बेहतर रिकॉर्ड
यदि सुशील के पिछले दो साल के रिकॉर्ड को देखें, तो नरसिंह यादव का रिकॉर्ड उनसे बेहतर नजर आता है. खास बात यह कि उन्हें चोट संबंधी कोी समस्या नहीं रही, जो किसी भी खिलाड़ी के लिए अहम है. नरसिंह ने एशियन चैंपियनशिप और एशियन गेम्स-2014 में ब्रॉन्ज मैडल हासिल किया और अभी विश्व रैंकिंग में पांचवें नंबर पर हैं. साल 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में 74 किलो भार वर्ग में वह कांस्य पदक भी जीत चुके हैं. उन्होंने 2010 के राष्ट्रमंडल खेल में स्वर्ण पदक भी जीता था.
बस नरसिंह यादव के सामने अब एक ही मुश्किल होगी, विश्व एंटी डोपिंग एजेंसी (WADA) की सुनवाई में खुद को पाकसाफ साबित करना...
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