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This Article is From Sep 23, 2015

EXCLUSIVE INTERVIEW: मैराज बनना चाहते थे क्रिकेटर, 39 साल की उम्र में जीता ओलिंपिक का टिकट

EXCLUSIVE INTERVIEW: मैराज बनना चाहते थे क्रिकेटर, 39 साल की उम्र में जीता ओलिंपिक का टिकट
मैराज अहमद खान
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के खुर्जा के रहने वाले मैराज अहमद खान इटली में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप से ओलिंपिक का टिकट लेकर लौटे हैं। बड़ी बात यह है कि 39 साल के मैराज पहले भारतीय शूटर हैं जिन्होंने स्कीट के जरिये ये कारनामा किया है। उनके हौसले इतने बुलंद हैं कि वे रियो ओलिंपिक्स में खुद के लिए पोडियम से कम कुछ नहीं सोचते। मैराज ने लोनैटो वर्ल्ड चैंपियनशिप से लौटकर NDTV से खास बातचीत में बताया कि ओलिंपिक का गोल्ड जीतना ही ही उनका निशाना है.

लक्ष्य हमेशा से ही ओलिंपिक का गोल्ड जीतना
सवाल:
स्कीट के जरिए ओलिंपिक का टिकट हासिल करने वाले आप पहले भारतीय शूटर हैं। पिछले एक साल से आप फ़ॉर्म में हैं लेकिन कितना मुश्किल रहा है यह सफर?
मैराज अहमद खान: मैं पिछले दो साल से कंसिस्टेंट परफारमेंस दे रहा हूं। कॉमनवेल्थ में टीम का गोल्ड जीतने के बाद से मेरा प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। पिछले पंद्रह साल से मैं लगातार कड़ी मेहनत कर रहा हूं। मेरा लक्ष्य हमेशा से ही ओलिंपिक का गोल्ड जीतना रहा है। भारतीय शूटिंग संघ ने 2013 से स्कीट के लिए इटली के एन्नियो फाल्को को हमारा कोच बनाया। वे 1996 के अटलांटा ओलिंपिक में गोल्ड जीत चुके हैं। उन्होंने हमें स्कीट शूटिंग में अच्छा गाइड किया है। शायद इसलिए अब नतीजे आने लगे हैं।

टारगेट-दर-टारगेट शूट करता हूं
सवाल:
आपने शॉटगन शूटिंग के जरिए रियो ओलिंपिक्स का खाता खोला है, लेकिन करीब साल भर पहले ओलिंपिक के गोल्ड की बात कहकर कहीं आपने ऊपर दबाव तो नहीं बना लिया?
मैराज अहमद खान:  देखिए जब मैं शूटिंग करता हूं तो किसी भी स्तर पर करूं, मुझे टारगेट शूट करना होता है। मैं यह नहीं सोचता कि सीधे ओलिंपिक का मेडल जीत लेना है। मैं टारगेट-दर-टारगेट शूट करता हूं और अल्लाह की मर्जी रही तो जरूर मेडल जीतूंगा।

गांगुली की तरह बल्लेबाजी करना चाहता था
सवाल:
आप चालीस साल के हैं। क्रिकेट की भाषा में कहें तो आप अपनी दूसरी पारी खेल रहे हैं। क्रिकेट में आपको कौन अच्छा खिलाड़ी लगता था?
मैराज अहमद खान: (हंसते हुए) मैं चालीस का नहीं 39 का हूं, लेकिन क्रिकेट मेरा पहला स्पोर्ट रहा है। मैं वीरेन्द्र सहवाग के साथ खेलता था। सहवाग मेरे जूनियर थे। मैं नंबर 3 पर बल्लेबाजी करता था और सहवाग को देखकर और क्रिकेट खेलने का उत्साह बढ़ जाता था। मैंने जामिया यूनिवर्सिटी के लिए सहवाग के साथ क्रिकेट खेला है। मैंने विज्ज़ी ट्रॉफी, सीके नायडू ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंटों में भी हिस्सा लिया है, लेकिन मैं सौरव गांगुली का बहुत बड़ा फैन हूं। मैं लेफ्ट हैंडर हूं और गांगुली की तरह ही बल्लेबाजी करना चाहता था। मैं उनसे मिला भी हूं, लेकिन किस्मत ने शायद मेरे लिए ओलिंपिक का रास्ता चुना है तो अब वहीं निशाना लगा रहा हूं।

मुश्किल खेल, क्योंकि गन को माउंट नहीं कर सकते
सवाल:
क्यों मुश्किल है स्कीट शूटिंग?
मैराज अहमद खान: देखिए यह मुश्किल स्पोर्ट माना जाता है, क्योंकि आप इसमें गन को माउंट नहीं कर सकते। इसकी क्ले की स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा है (डबल ट्रैप की स्पीड 70 किलोमीटर प्रति घंटा है)। इसके अलावा इसमें अंतर्राष्ट्रीय शूटर्स का स्कोर बहुत ऊपर जाता है। मैंने लोनैटो में 125 मे 122 का स्कोर किया फिर भी सातवें नंबर पर रहा। इसमें गलती की गुंजाइश बहुत कम है। मेडल के लिए आपको हमेशा 125 में 123 या 124 का स्कोर करने की जरूरत होगी।

सही ट्रेनिंग ली तो ओलिंपिक का गोल्ड पहुंच से बाहर नहीं
सवाल:
आपने ओलिंपिक के पदक के लिए राज्यवर्धन सिंह राठौड़, अभिनव बिन्द्रा या गगन नारंग जैसे खिलाड़ियों को मेहनत करते देखा है। यहां से रियो तक आपके लिए कितना बड़ा फासला है?
मैराज अहमद खान: देखिए मैं जानता हूं कि मेरी मुश्किल का सफर अभी शुरू ही हुआ है, लेकिन मुझे मौका मिला है तो मैं जबरदस्त मेहनत करूंगा। मुझे और परफेक्ट होने की जरूरत है। मैं राज्यवर्धन राठौड़, गगन नारंग और अभिनव बिन्द्रा की मेहनत जानता हूं, लेकिन कोच फाल्को के अनुसार मैं अगर सही ट्रेनिंग करता रहा तो ओलिंपिक का गोल्ड पहुंच से बाहर भी नहीं।

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