मास्टर ब्लास्टर करियर का 100वां शतक बनाने से भले ही चूक गए, लेकिन भारत ने वेस्ट इंडीज़ को पांच विकेट से हराकर शृंखला में 1-0 की बढ़त ले ली।
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New Delhi:
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर केवल 24 रन से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100वां शतक बनाने से भले ही चूक गए, लेकिन उनकी रोमांचक अर्द्धशतकीय पारी की सहायता से भारत ने दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर खेले जा रहे शृंखला के पहले टेस्ट मैच में मेहमान वेस्ट इंडीज़ को बुधवार को चौथे दिन ही पांच विकेट से हराकर शृंखला में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है। दर्शक बुधवार को भारत की जीत और तेंदुलकर के शतकों के शतक की दोहरी खुशी पाने के लिए कोटला मैदान में पहुंचे थे, लेकिन अब महाशतक का पिछले 252 दिन से चला आ रहा इंतजार और आगे बढ़ गया है। बुधवार सुबह से ही प्रवाहमय बल्लेबाजी कर रहे तेंदुलकर ने दर्शकों की उम्मीदों को पंख लगा दिए थे, लेकिन जैसे ही वह 76 रन बनाकर आउट हुए, पूरे स्टेडियम को मानो सांप सूंघ गया, हालांकि तब तक भारत की जीत सुनिश्चित हो चुकी थी। तेंदुलकर जब धीरे-धीरे पैवेलियन की तरफ लौट रहे थे, स्टेडियम में पिन ड्रॉप साइलेंस था। अब सबकी निगाह कोलकाता पर टिकी हैं, जहां 14 नवंबर से इस शृंखला का दूसरा टेस्ट मैच खेला जाएगा। तेंदुलकर के लिए शतकों के मामले में नवंबर का महीना काफी भाग्यशाली रहा है और उम्मीद की जानी चाहिए कि वह इसी शृंखला में इंतजार खत्म करने में सफल रहेंगे। वैसे तेंदुलकर ने अपना आखिरी शतक इसी साल विश्व कप में 12 मार्च को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नागपुर में लगाया था और तब से वह 14 अंतरराष्ट्रीय पारियों में तिहरे अंक तक नहीं पहुंचे हैं। बुधवार को मिली जीत में तेंदुलकर के अलावा मंगलवार को सलामी बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग (55) और बुधवार को वीवीएस लक्ष्मण (नाबाद 58) ने जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे भारत चौथे दिन लंच के बाद 32वें मिनट में पांच विकेट पर 276 रन बनाकर इस मैदान पर सबसे बड़ा लक्ष्य हासिल करने के रिकॉर्ड की बराबरी करने में सफल रहा। सचिन ने अपनी पारी में 148 गेंदें खेलीं तथा 10 चौके लगाए, जबकि लक्ष्मण की 105 गेंदों की पारी में छह चौके शामिल रहे। भारत की यह वेस्ट इंडीज़ पर कोटला में पहली जीत है। इसी के साथ टीम इंडिया ने इस मैदान पर पिछले 24 साल से कोई टेस्ट मैच नहीं गंवाने का रिकॉर्ड भी बरकरार रखा है। वेस्ट इंडीज़ ने 1987 में 276 रन का ही लक्ष्य हासिल करके जीत दर्ज की थी, जो कोटला पर भारत की आखिरी हार थी। भारत ने अपनी सरज़मीं पर दूसरा सबसे बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया। इससे पहले उसने वर्ष 2008 में इंग्लैण्ड के खिलाफ चेन्नई में चार विकेट पर 387 रन बनाकर जीत दर्ज की थी। इस वर्ष जुलाई-अगस्त तक आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में अव्वल नम्बर पर रही टीम इंडिया ने इस साल अब तक खेले नौ टेस्ट मैचों में मात्र दूसरी बार जीत हासिल की है... इससे पहले भारत ने वेस्ट इंडीज़ को ही जून में किंग्सटन के मैदान पर हराया था... इसके अलावा जनवरी में दक्षिण अफ्रीका से ड्रॉ खेलने के अतिरिक्त जून और जुलाई में वेस्ट इंडीज़ से ही दो मैच ड्रॉ रहे थे, जबकि जुलाई-अगस्त में इंग्लैण्ड दौरे पर टीम इंडिया ने अपने चारों टेस्ट मैच हारकर रैंकिंग में पहला स्थान गंवा दिया था... बुधवार सुबह भारत ने जब पारी आगे बढ़ाई, तो उसे जीत के लिए 124 रन दरकार थे, और उसके दो ऐसे बल्लेबाज क्रीज़ पर मौजूद थे, जो टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वालों की सूची में पहले और दूसरे स्थान पर हैं, तथा कुल 27,864 रन बना चुके हैं। सुबह विपक्षी कप्तान डेरेन सैमी के पहले ओवर में एक गेंद तेंदुलकर के पैड से लगकर सीमारेखा पार गई, जबकि बाद में उनके बल्ले ने भी गेंद को बाउंड्री के दर्शन कराए। अगला ओवर करने फिडेल एडवर्ड्स आए, जो मेडन रहा, लेकिन इस तेज गेंदबाज के अगले ओवर की पहली गेंद ही राहुल द्रविड़ (31) के डिफेन्स को तहस-नहस कर गई। द्रविड़ 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मूव करती गेंद पर ड्राइव करने के लिए आगे आ गए, लेकिन उनके कुछ भी कर पाने से पहले ही गेंद उनके विकेट उखाड़ चुकी थी। वह अपने मंगलवार के स्कोर में केवल एक रन जोड़ पाए। इसके बाद लक्ष्मण ने पहली गेंद ही फ्लिक करके फाइन लेग पर चार रन के लिए भेजी, जबकि सैमी के अगले ओवर में तेंदुलकर ने एक्स्ट्रा कवर और प्वाइंट के क्षेत्र से चौके जड़कर उनके महाशतक की उम्मीद में स्टेडियम में पहुंचे दर्शकों को रोमांचित कर दिया। तेंदुलकर ने एडवर्ड्स की गेंद थर्डमैन पर खेलकर अपना 62वां टेस्ट अर्द्धशतक पूरा किया। अब उन्हें एलेन बोर्डर के सर्वाधिक अर्द्धशतकों के रिकॉर्ड की बराबरी के लिए केवल एक और पचासे की जरूरत है। लक्ष्मण ने इस बीच कलाइयों की जादूगरी दिखाते हुए प्वाइंट और स्क्वेयर लेग में चौके जमाए, लेकिन हर कोई तेंदुलकर के बल्ले से रनों की बौछार देखना चाहता था, ताकि यहीं उनका महाशतक पूरा हो जाए, लेकिन तभी देवेन्द्र बिशू की गुगली 15,000 दर्शकों की आह निकाल गई। करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का दिल तोड़ने वाले भारतीय मूल के बिशू भारत में अचानक ही खलनायक बन गए। उनकी यह गेंद विकेटों के आगे खड़े तेंदुलकर के पैड से टकराई, और अंपायर रॉड टकर ने कुछ देर सोचने के बाद अंगुली उठा दी। अभी तक तेंदुलकर के एक-एक रन पर बल्लियों उछल रहे दर्शक सन्न रह गए। लक्ष्मण ने इसके बाद सैमुअल्स की गेंद पर एक रन लेकर टेस्ट क्रिकेट में 55वां और वेस्टइंडीज के खिलाफ 11वां अर्धशतक पूरा किया। भारत को जब जीत के लिए केवल एक रन चाहिए था तो युवराज सिंह (18) के पास विजयी रन बनाने का मौका था, लेकिन सैमी ने उनके बल्ले और पैड के बीच से गेंद निकालकर विकेट उखाड़ दिए। महेन्द्र सिंह धोनी ने सैमी की बाकी बची चार गेंदें सहजता से खेलीं। और अंततः क्रेग ब्राथवेट के अगले ओवर में लक्ष्मण ने तीसरी गेंद पर स्क्वेयर लेग पर एक रन लेकर टीम को जीत दिलाई।
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