ठेके की प्रक्रिया शुरू होने से पहले CWG फेडरेशन के डेलिगेट्स को कैसे लिखित रूप में बताया जा सकता है कि ठेका स्विस कंपनी को मिल रहा है।
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नई दिल्ली:
सुरेश कलमाडी जिस स्विस कंपनी को ठेका देने के आरोप में जेल में है उसके बारे में अहम खुलासा हुआ है। आपको बता दें कि नवंबर 2009 में ठेका हुआ था लेकिन ऐलान अक्तूबर में ही हो गया था। आयोजन समिति ने स्विस टाइमिंग कंपनी को स्कोर टाइमिंग और रिजल्ट बताने के उपकरण लगाने के लिए दिया था। एनडीटीवी के शारिक खान की ख़ास रिपोर्ट बताती है कि ठेके की प्रक्रिया शुरू होने से पहले कॉमनवेल्थ फेडरेशन के डेलिगेट्स को कैसे लिखित रूप में बताया जा सकता है कि ठेका स्विस कंपनी को मिल रहा है। इस हरकत से आपके देश को 95 करोड़ का चूना लगा है। इस संबंध में एक सीडी एनडीटीवी के हाथ लगी है जो यह साफ दर्शाती है कि आयोजन समिति के पूर्व डीजी वीके वर्मा ने ठेका दिए जाने से पूर्व डेलीगेटों से यह बात कही दी थी कि टाइमिंग मशीन का ठेका किसे दिया जाएगा। वर्मा का यह ऐलान कोई चोरी छिपे नहीं दिया गया था बल्कि सरेआम कॉमनवेल्थ फेडरेशन के डेलिगेट्स की बैठक में डंके की चोट पर किया गया। ये बैठक अक्टूबर में हुई थी जबकि ठेका हुआ कई हफ्ते बाद नवंबर में हुआ था। मिली सीडी में साफ देखा और सुना जा सकता है कि वर्मा ने कह रहे हैं कि टाइमिंग, स्कोरिंग और रिजल्ट सिस्टम का ठेका स्वीस टाइमिंग को जाएगा। सीबीआई के लिए यह सीडी एक बेहद अहम सबूत है जो बताती है कि CWG आयोजन समिति के अधिकारियों ने कैसे मिलजुलकर 107 करोड़ के ठेके में घपला किया। यही ठेका एमएसएल स्पेन को देकर पूरे 95 करोड़ रुपये बचाए जा सकते थे। इस मामले मे वीके वर्मा और पूर्व महासचिव ललित भनोट के बाद बीते सोमवार को सुरेश कलमाडी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही सीबीआई के पास आयोजन समिति के दो अफसरों के बयान भी हैं जिसके मुताबिक वीके वर्मा और कलमाडी ने उन्हें स्विस टाइमिंग के लिए रास्ता साफ करने को कहा था। तो क्या यह मान लिया जाए कि वर्मा और कलमाडी ने तय कर लिया था कि ठेका किसे और कितने का देना है और बाकी जो कुछ होता दिखा वो सब ड्रामा था।