नई दिल्ली:
भारतीय हॉकी टीम का अगला कोच कौन होगा, ये हॉकी का सबसे बड़ा सवाल बन गया है। डच कोच पॉल वैन हास के भारत नहीं लौटने के बाद ये विवाद गहरा गया है। भारतीय हॉकी टीम शिलारू में फ़िटनेस कैंप में जुटी हुई है। वर्ल्ड हॉकी लीग सेमीफ़ाइनल टूर्नामेंट के दौरान कोच हास और हॉकी इंडिया के अध्यक्ष के बीच अनबन के बाद ये विवाद और गहरा गया।
वैन हास ने आरोप लगाया कि हॉकी इंडिया ने उन्हें कोच का पद छोड़ने पर मजबूर किया है जबकि हॉकी इंडिया के अध्यक्ष नरिंद्र बत्रा का कहना है कि कोच हास ने उनके साथ बदसलूकी है। पिछले पांच सालों में, हास चौथे विदेशी कोच हैं जिन्हें हॉकी इंडिया का साथ विवाद के बाद पद छोड़ना पड़ा है।
रियो ओलिंपिक्स के लिए तैयारी कर रही टीम हॉकी इंडिया के कोच को लेकर कई जानकार तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। तीन बार ओलिंपिक का गोल्ड मेडल जीत चुके बलबीर सिंह सीनियर का मानना है कि अगर बार-बार कोच को बदलना पड़ रहा है तो इसका मतलब है कि सिस्टम में कोई दिक्कत है। पूर्व स्पेनिश कोच होसे ब्रासा भी भारतीय सिस्टम को लेकर खफ़ा हैं। वो कहते हैं कि भारत में कोच को कठपुतली की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
भारतीय हॉकी का अगला कोच कौन बनेगा इसके लिए हॉकी की इवैल्युएशन कमेटी (आकलन समिति) के पास तीन-चार विकल्प नज़र आते हैं:
1. कोच पॉल वैन हास को वापस बुला लें और रियो तक टीम की ज़िम्मेदारी सौंप दें।
2. हाई परफ़ॉरमेंस डायरेक्टर रोलैंट ऑल्टमैन्स को टीम का कोच बना दें। दिसंबर में भुवनेश्वर में हुई चैंपियंस ट्रॉफ़ी में वो टीम के कोच रह चुके हैं।
3. किसी और विदेशी कोच को टीम की ज़िम्मेदारी सौंपें, लेकिन ये विकल्प कमज़ोर नज़र आता है।
4. किसी भारतीय कोच को ज़िम्मेदारी सौंपें, ये विकल्प सबसे कमज़ोर है। इस बात को लेकर ना तो जानकार
ना हॉकी इंडिया फ़िलहाल राज़ी नज़र आती है।
कोच की चयन समिति या इवैल्युएशन कमेटी में हॉकी की कमेटी में पूर्व भारतीय कप्तान हरबिन्दर सिंह (अध्यक्ष), पूर्व कप्तान वी भास्करन, पूर्व कप्तान बीपी गोविन्दा, एबी सुबैया, पूर्व ओलिंपियन आरपी सिंह, पूर्व भारतीय कप्तान असुन्ता लाकड़ा, पूर्व भारतीय कप्तान जसजीत कौर और पूर्व ओलिंपियन थोएबा सिंह जैसे सदस्य शामिल हैं जिन पर भारतीय हॉकी के लिए बड़ा फ़ैसला लेने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
वैन हास ने आरोप लगाया कि हॉकी इंडिया ने उन्हें कोच का पद छोड़ने पर मजबूर किया है जबकि हॉकी इंडिया के अध्यक्ष नरिंद्र बत्रा का कहना है कि कोच हास ने उनके साथ बदसलूकी है। पिछले पांच सालों में, हास चौथे विदेशी कोच हैं जिन्हें हॉकी इंडिया का साथ विवाद के बाद पद छोड़ना पड़ा है।
रियो ओलिंपिक्स के लिए तैयारी कर रही टीम हॉकी इंडिया के कोच को लेकर कई जानकार तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। तीन बार ओलिंपिक का गोल्ड मेडल जीत चुके बलबीर सिंह सीनियर का मानना है कि अगर बार-बार कोच को बदलना पड़ रहा है तो इसका मतलब है कि सिस्टम में कोई दिक्कत है। पूर्व स्पेनिश कोच होसे ब्रासा भी भारतीय सिस्टम को लेकर खफ़ा हैं। वो कहते हैं कि भारत में कोच को कठपुतली की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
भारतीय हॉकी का अगला कोच कौन बनेगा इसके लिए हॉकी की इवैल्युएशन कमेटी (आकलन समिति) के पास तीन-चार विकल्प नज़र आते हैं:
1. कोच पॉल वैन हास को वापस बुला लें और रियो तक टीम की ज़िम्मेदारी सौंप दें।
2. हाई परफ़ॉरमेंस डायरेक्टर रोलैंट ऑल्टमैन्स को टीम का कोच बना दें। दिसंबर में भुवनेश्वर में हुई चैंपियंस ट्रॉफ़ी में वो टीम के कोच रह चुके हैं।
3. किसी और विदेशी कोच को टीम की ज़िम्मेदारी सौंपें, लेकिन ये विकल्प कमज़ोर नज़र आता है।
4. किसी भारतीय कोच को ज़िम्मेदारी सौंपें, ये विकल्प सबसे कमज़ोर है। इस बात को लेकर ना तो जानकार
ना हॉकी इंडिया फ़िलहाल राज़ी नज़र आती है।
कोच की चयन समिति या इवैल्युएशन कमेटी में हॉकी की कमेटी में पूर्व भारतीय कप्तान हरबिन्दर सिंह (अध्यक्ष), पूर्व कप्तान वी भास्करन, पूर्व कप्तान बीपी गोविन्दा, एबी सुबैया, पूर्व ओलिंपियन आरपी सिंह, पूर्व भारतीय कप्तान असुन्ता लाकड़ा, पूर्व भारतीय कप्तान जसजीत कौर और पूर्व ओलिंपियन थोएबा सिंह जैसे सदस्य शामिल हैं जिन पर भारतीय हॉकी के लिए बड़ा फ़ैसला लेने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
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