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UK में बुलिंग और तीन टुकड़ों में टूटी हड्डी, अर्चना पूरन सिंह के बेटे आर्यमान ने बताया कैसे टूटा फुटबॉलर बनने का सपना

अर्चना पूरन सिंह और परमीत सेठी के बेटे आर्यमान सेठी ने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में बताया कि वह अपने फुटबॉल के सपनों को पूरा करने के लिए इंग्लैंड गए थे, जहां उन्हें अलग-अलग तरह की कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

UK में बुलिंग और तीन टुकड़ों में टूटी हड्डी, अर्चना पूरन सिंह के बेटे आर्यमान ने बताया कैसे टूटा फुटबॉलर बनने का सपना
Archana Puran Singh Son Aaryamann Sethi
Insta/Aaryamann Sethi

अर्चना पूरन सिंह और परमीत सेठी के बेटे आर्यमान सेठी ने एक इंटरव्यू में बताया कि पैर में दो बार गंभीर फ्रैक्चर होने की वजह से उन्हें प्रोफेशनल फुटबॉलर बनने का अपना सपना छोड़ना पड़ा.  आर्यमान 14 साल की उम्र में फुटबॉल की ट्रेनिंग लेने के लिए इंग्लैंड चले गए. शुरुआत में उन्हें आर्सेनल और चेल्सी जैसे क्लबों में ट्रायल देने का मौका मिला था, लेकिन उन्हें कोई दूसरा रास्ता चुनने की सलाह दी गई, जहां उन्हें अपनी काबिलियत दिखाने का बेहतर मौका मिल सके.

आर्यमान सेठी ने 'ऑल फॉर एथलीट्स' पॉडकास्ट को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि वह अपने फुटबॉल के सपनों को पूरा करने के लिए अपनी मां के साथ इंग्लैंड गए थे. उनका पहला ट्रेनिंग सेशन उनके लिए आंखें खोलने वाला अनुभव था, क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि वहां फुटबॉल का स्तर उस स्तर से बहुत अलग था, जिसका अनुभव उन्होंने अब तक किया था.

इंग्लैंड में पढ़ाई जारी रखने की शर्त पर मिली जगह

आर्यमान का ट्रायल अच्छा रहा और उन्हें अकादमी में जगह मिल गई, लेकिन शर्त यह थी कि उन्हें इंग्लैंड में अपनी पढ़ाई भी जारी रखनी होगी. अपने परिवार के सपोर्ट से वह एक बोर्डिंग स्कूल चले गए, जहां वह फुटबॉल की ट्रेनिंग के साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी कर सकते थे.

आर्यमान सेठी को झेलनी पड़ी नस्लवादी टिप्पणियां

आर्यमान सेठी ने 'बुलीइंग' (परेशान किए जाने) के बारे में भी बताया.  उन्होंने बताया कि परिवार और जानी-पहचानी जगहों से दूर रहने के कारण बोर्डिंग स्कूल में अकेलेपन का सामना करना पड़ा. उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें साथी छात्रों द्वारा परेशान किया गया और नस्लवादी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा. उनमें से कुछ छात्रों ने भारत को लेकर रूढ़िवादी बातें कहीं, जैसे कि भारत में लोग हाथी या गधों पर सफर करते हैं, और इस तरह की बातें कहकर उनका मजाक उड़ाया.

उन्होंने याद करते हुए बताया, 'वहां के लोग मुझसे पूछते थे - क्या तुम भारत से आए कोई राजकुमार हो?' उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को लगा कि वह किसी राजघराने से हैं, क्योंकि उनका परिवार आर्थिक रूप से काफी संपन्न था. इन चुनौतियों के बावजूद, आर्यमान धीरे-धीरे ट्रेनिंग रूटीन में ढल गए. तीन हफ्तों के भीतर ही उन्हें लगा कि उनके प्रदर्शन में सुधार हो रहा है और एक खिलाड़ी के तौर पर उनकी पहचान बनने लगी है.

फ्रैक्चर के बाद फुटबॉल करियर को लगा झटका

पैर में दो बार गंभीर फ्रैक्चर होने से आर्यमान सेठी के फुटबॉल करियर को बड़ा झटका लगा. जैसे ही आर्यमान के खेल में प्रगति दिखने लगी, एक अप्रत्याशित चोट ने उनके सफर में रुकावट डाल दी. स्कूल में रग्बी खेलते समय उनका पैर टूट गया; उनकी टिबिया (पिंडली की हड्डी) में हेयरलाइन फ्रैक्चर हो गया. इसके बाद वह ठीक होने के लिए भारत लौट आए.

 तीन टुकड़ों में टूटी हड्डी

ठीक होने के बाद, आर्यमान को महाराष्ट्र की ओर से खेलने की अनुमति मिल गई. लेकिन, वापसी के अपने पहले ही मैच में उन्हें एक और बड़ा झटका लगा, उसी पैर में फिर से फ्रैक्चर हो गया, और इस बार हड्डी तीन टुकड़ों में टूट गई. उन्होंने उस पल को याद करते हुए बताया, "मैं उठा, लेकिन मेरा पैर बिल्कुल बेजान हो गया और मैं ज़मीन पर गिर पड़ा.' इस दूसरे फ्रैक्चर ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वह कभी उस स्तर पर फुटबॉल में वापसी कर पाएंगे, जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी.

दूसरा फ्रैक्चर जनवरी 2011 में हुआ. आर्यमान की सर्जरी हुई और रिहैबिलिटेशन शुरू करने से पहले उन्हें काफी समय तक बैसाखियों के सहारे चलना पड़ा. इन झटकों के बावजूद, वह फुटबॉल में वापसी करने के लिए दृढ़ थे और आखिरकार ट्रेनिंग फिर से शुरू करने के लिए वापस इंग्लैंड चले गए. हालांकि, उनकी रिकवरी योजना के अनुसार नहीं हुई. 

डिप्रेशन और एंग्जायटी पर खुलकर की बात

उन्होंने याद करते हुए बताया, 'मुझे याद है कि कई बार मैं मैदान पर ही रो पड़ा था. मुझे ऐसा लगता था जैसे मेरा शरीर मेरी बात ही नहीं सुन रहा है. मुझे पता था कि क्या करना है और कैसे करना है, लेकिन मानसिक रूप से मैं इतना टूट चुका था कि गेंद को किक मारने के बारे में सोचना भी मेरे लिए नामुमकिन हो गया था.' चूंकि उनकी रिकवरी उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही थी, इसलिए अपने सपने के हाथ से निकल जाने की संभावना को स्वीकार करना आर्यमान के लिए बहुत मुश्किल होता गया.

आखिरकार, उनका कॉन्ट्रैक्ट आगे नहीं बढ़ाया गया, जिसके चलते उन्हें यह मान लेना पड़ा कि उनके प्रोफेशनल फुटबॉल करियर का सफर यहीं खत्म हो गया है. अपनी फुटबॉल यात्रा के अंत के बाद, आर्यमन ने अभिनय, संगीत और डिजिटल सामग्री निर्माण सहित अन्य रचनात्मक गतिविधियों की खोज की. वह अपना यूट्यूब चैनल, एरी व्लॉग्स भी चलाते हैं, जहां वह अपने निजी जीवन के पलों को साझा करते हैं और दर्शकों को अपने परिवार की झलक दिखाते हैं.

अर्चना पूरन सिंह के परिवार में कौन कौन है?

एक्ट्रेस अर्चना पूरन सिंह के परिवार में उनके पति परमीत सेठी और दो बच्चे आर्यमान और आयुषमान हैं. आर्यमान की मंगेतर योगिता बिहानी हैं, जबकि  आयुषमान की पार्टनर समीक्षा शेट्टी हैं. इस सेलिब्रिटी कपल ने अपने दोनों बेटों की पार्टनर का खुले दिल से स्वागत किया है और उन्हें अपनी बेटियों की तरह माना है. हाल ही में एक इंटरव्यू में, अर्चना ने बताया कि यह अपनापन स्वाभाविक रूप से आता है क्योंकि वह अपने बेटों से बहुत प्यार करती हैं.

IANS के साथ बातचीत में, अर्चना ने योगिता और समीक्षा के साथ अपने रिश्ते के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि उनके साथ अच्छे संबंध रखना कभी मुश्किल नहीं लगा, क्योंकि वे अब परिवार का एक अहम हिस्सा बन गई हैं. उन्होंने कहा, 'आपको बस एक इंसान के तौर पर सोचना है. उन्होंने आगे कहा कि अगर आप अपने बच्चों से प्यार करते हैं और उन्होंने किसी को अपना जीवनसाथी चुना है, तो आप अपने आप उन्हें भी प्यार करने लगते हैं.

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