विज्ञापन
This Article is From Dec 24, 2012

भारतीय फुटबॉल टीम के लिए मिश्रित सफलता वाला रहा बीता साल

जीत से लेकर हार तक भारतीय फुटबॉल ने बीते साल अच्छे, बुरे और खराब सारे पल देखे लेकिन इस साल की सबसे बड़ी सुर्खी जर्मनी के बावारियन क्षेत्र से एक मशहूर क्लब का भारत दौरा रही।
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली: जीत से लेकर हार तक भारतीय फुटबॉल ने बीते साल अच्छे, बुरे और खराब सारे पल देखे लेकिन इस साल की सबसे बड़ी सुर्खी जर्मनी के बावारियन क्षेत्र से एक मशहूर क्लब का भारत दौरा रही।

भारत ने इस साल अपनी सरजमीं पर नेहरू कप में खिताबी जीत की हैट्रिक पूरी की। इसके बाद नेपाल में एएफसी चैलेंज कप में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा।

ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के बीच आई लीग के मैच में हुई हिंसा भी बीते साल भारतीय फुटबाल की शर्मनाक घटनाओं में से रही। इसके कारण मैच रद्द करना पड़ा जब मोहन बागान ने सुरक्षा कारणों से दूसरे हाफ में मैदान पर उतरने से इनकार कर दिया। मोहन बागान पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है लेकिन इस पर फैसला अभी नहीं लिया गया है।

भारत की अंडर 22 टीम के एएफसी चैम्पियनशिप क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में प्रदर्शन को देखकर भविष्य उज्जवल लग रहा है। भारतीय टीम ने लेबनान और तुर्कमेनिस्तान को हराया जबकि संयुक्त अरब अमीरात से ड्रॉ खेला।

सीनियर टीम के लिये शुरुआत अच्छी नहीं रही क्योंकि एएफसी टूर्नामेंट में उसने सारे मैच गंवाए। फीफा के अंतरराष्ट्रीय दोस्ताना मैचों की कमी से भारत रैंकिंग में खिसककर 169वें स्थान पर पहुंच गया। अब भारतीय फुटबाल प्रशासकों को फीफा की तारीखों के भीतर अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने पर जोर देना चाहिए ताकि रैंकिंग में सुधार हो सके।

नेहरू कप में मिली जीत प्रशंसनीय थी लेकिन इससे रैंकिंग में सुधार नहीं हुआ। मैच फीफा की तारीखों पर नहीं हुए थे और कैमरून ने दोयम दर्जे की टीम भेजी थी।

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
भारतीय फुटबॉल, 2012, Indian Football
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com