- ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद नया शिपिंग रूट ओमान के क्षेत्रीय जल में विकसित हुआ है
- चार बड़े जहाज जिनमें एक भारतीय झंडे वाला पोत शामिल है, इस नए मार्ग से सुरक्षित होकर होर्मुज पार कर चुके हैं
- नया रूट पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय मार्ग या ईरान के हालिया रास्ते से अलग ओमान के क्षेत्रीय जल के भीतर स्थित है
ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज मार्ग बंद क्या हुआ, पूरी दुनिया में तेल और गैस सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो गई. अभी ईरान युद्ध खत्म नहीं हुआ है, मगर होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के बीच वैश्विक शिपिंग के लिए राहत के संकेत सामने आए हैं. लेटेस्ट उपलब्ध डेटा के अनुसार, एक नया शिपिंग रूट सामने आया है, जिसके जरिए तेल, एलएनजी और सामान्य कार्गो ले जा रहे चार बड़े जहाज, जिनमें एक भारतीय झंडे वाला पोत भी शामिल है, सुरक्षित रूप से इस अहम जलमार्ग को पार कर चुके हैं.

ओमान के क्षेत्रीय जल से होकर गुजर रहा नया रूट
AIS और रिमोट सेंसिंग डेटा से पता चला है कि यह नया रूट न तो पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग से गुजरता है और न ही हाल ही में ईरान द्वारा बनाए गए रास्ते से. यह मार्ग ओमान के क्षेत्रीय समुद्री दायरे के भीतर रहते हुए जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने का ऑप्शन देता है. डेटा के मुताबिक, मार्शल आइलैंड के झंडे वाले VLCC हाब्रुत और ढालकुट, साथ ही पनामा‑फ्लैग्ड सोहार LNG ने यूएई के रास अल खैमाह के पास ओमान के क्षेत्रीय जल में प्रवेश किया. इसके बाद ये जहाज मुसंदम प्रायद्वीप के पास अपने पोजीशन सिग्नल ट्रांसपोंडर बंद करते हुए आगे बढ़े. 3 अप्रैल को ये जहाज मस्कट, ओमान की मुख्य भूमि के तट से करीब 350 किलोमीटर दूर देखे गए.
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20 लाख बैरल कच्चे तेल से लदे थे दो VLCC
फर्म टैंकरट्रैकर्स के अनुसार, ढालकुट और हाब्रुत जहाज क्रमशः सऊदी अरब और यूएई के 20 लाख बैरल कच्चे तेल से लदे हुए थे. वहीं, सोहार LNG 21 मार्च को यूएई के पोर्ट ऑफ अल हमरियाह से रवाना हुआ था, लेकिन यह साफ नहीं हो सका कि उस पर माल लदा था या नहीं. AIS डेटा में जहाज की स्थिति “आंशिक रूप से लदा” दिखाई गई.
भारतीय झंडे वाला कार्गो जहाज भी इसी रूट से गुजरा
इन तीनों जहाजों के पीछे एक भारतीय झंडे वाला कार्गो पोत MSV Quba MNV 2183 भी इसी नए रूट से गुजरा. यह जहाज 31 मार्च को दुबई से रवाना हुआ था और इसकी आखिरी स्थिति ओमान के पोर्ट से करीब 40 किलोमीटर दूर खुले समुद्र में दर्ज की गई. यह साफ नहीं हो सका है कि जहाज पर माल था या वह कहां जा रहा था.
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हमलों के बाद ठप हो गया था शिपिंग मार्ग
अमेरिका और इज़राइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हवाई हमलों के कुछ दिन बाद ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से जहाजों पर हमले शुरू कर दिए थे. इसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली ऊर्जा आपूर्ति लगभग ठप हो गई थी. दुनिया की करीब एक‑पांचवीं ऊर्जा आपूर्ति इसी जलमार्ग से गुजरती है, जिससे भारत समेत कई एशियाई देशों की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई थी.
ईरान का नया रूट और टोल व्यवस्था
इसके बाद ईरान ने जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक नया और लंबा शिपिंग रूट बनाया. यह मार्ग ईरान के क्षेत्रीय जल और क़ेश्म व लारक द्वीपों के बीच संकरे रास्ते से गुजरता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, IRGC जहाजों को केस‑टू‑केस आधार पर अनुमति देता है और नौसैनिक अड्डों से उनकी पहचान की जाती है. इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से प्रति बैरल एक डॉलर का टोल भी वसूला जाता है.
क़ेश्म नौसैनिक अड्डे की आग से जुड़ा संयोग
इन जहाजों की आवाजाही का समय IRGC के प्रमुख नौसैनिक अड्डे क़ेश्म में लगी बड़ी आग की घटनाओं से भी मेल खाता है. विश्लेषकों का मानना है कि यह आग वहां मौजूद कम से कम चार गोदामों पर हुए हवाई हमलों के कारण लगी थी.
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