- विजय ने चेन्नई की पेरंबूर और त्रिचिरापल्ली ईस्ट विधानसभा सीटों से सत्तारूढ़ DMK को चुनौती दी है
- पेरंबूर सीट पर विजय ईसाई समुदाय और युवाओं के समर्थन से DMK के मजबूत संगठनात्मक आधार को तोड़ने का प्रयास
- त्रिचिरापल्ली ईस्ट सीट DMK के नेता का गढ़ है, जहां विजय को अपनी स्टार पावर और युवा मतदाताओं पर भरोसा
दो विधानसभा सीटों से चुनावी ताल ठोककर TVK प्रमुख विजय ने सत्तारूढ़ DMK को उसके ही गढ़ में सीधी चुनौती दे डाली है. चेन्नई की पेरंबूर और मध्य तमिलनाडु की त्रिचिरापल्ली ईस्ट सीट से मैदान में उतरकर विजय ने सत्ताधारी पार्टी के मजबूत इलाकों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है. गौर करने वाली बात ये है कि ये दोनों ही सीटें DMK के परंपरागत प्रभाव वाले क्षेत्र मानी जाती हैं, जहां पार्टी का संगठनात्मक आधार काफी मजबूत रहा है. ऐसे में दोहरी उम्मीदवारी के जरिए विजय का यह कदम तमिलनाडु की राजनीति में मुकाबले को और दिलचस्प बना रहा है.
पेरंबूर: कोलाथुर के करीब DMK का मजबूत इलाका
चेन्नई की पेरंबूर विधानसभा सीट, जो इंटीग्रल कोच फैक्ट्री के लिए पहचानी जाती है, मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र के बेहद करीब स्थित है. यहां ईसाई आबादी की संख्या अच्छी खासी है, जो परंपरागत रूप से DMK की सपोर्ट में रही है. विजय खुद ईसाई समुदाय से आते हैं और युवाओं खासतौर पर महिलाओं के बीच उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग बेहद तगड़ी है. ऐसे में वह इसी सामाजिक आधार और अपनी लोकप्रियता के सहारे इस सीट पर सेंध लगाने की मशक्कत में है.
DMK ने यहां मौजूदा विधायक आर. डी. शेखर को फिर से मैदान में उतारा है, जिन्होंने 2021 में 54,967 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. पिछले छह चुनावों में DMK और AIADMK ने अपने वामपंथी सहयोगियों के साथ मिलकर तीन‑तीन बार इस सीट पर जीत हासिल की है. इस बार AIADMK ने यह सीट अपने सहयोगी PMK को दी है.
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त्रिचिरापल्ली ईस्ट: के. एन. नेहरू का प्रभाव वाला क्षेत्र
करीब 300 किलोमीटर दूर स्थित त्रिचिरापल्ली ईस्ट भी DMK का गढ़ माना जाता है. अपेक्षाकृत छोटे मतदाता आधार वाले इस इलाके में कई प्रमुख ईसाई संस्थान हैं और इसे वरिष्ठ DMK नेता व मंत्री के. एन. नेहरू का गृह क्षेत्र माना जाता है. DMK के उम्मीदवार और मौजूदा विधायक इनिगो इरुदयराज की ईसाई समुदाय में अच्छी पकड़ है, खासकर उनके “क्रिस्तुवा नल्लेन्ना इयक्कम” के जरिए. AIADMK ने यहां के. राजशेखरन को प्रत्याशी बनाया है.
पिछले छह चुनावों में DMK ने चार बार त्रिचिरापल्ली ईस्ट सीट जीती है, जबकि AIADMK को दो बार सफलता मिली है. यहां भी विजय अपनी स्टार पावर और युवा मतदाताओं से मजबूत सपोर्टिंग पर भरोसा कर रहे हैं. त्रिचिरापल्ली में उनके पहले चुनावी दौरे के दौरान भारी भीड़ उमड़ी और एयरपोर्ट से कार्यक्रम स्थल तक उनके काफिले के चलते कई घंटों तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही.
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युवा मतदाताओं पर नजर, लेकिन चर्च का रुख नहीं बदला
हालांकि मुख्यधारा के चर्च, जो परंपरागत रूप से DMK के समर्थक रहे हैं, उसने अभी तक अपना रुख नहीं बदला है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि युवाओं का एक वर्ग विजय की ओर भी दरक सकता है.
चेन्नई में DMK के शहरी गढ़ को भेदने की कोशिश
TVK चेन्नई में DMK के शहरी प्रभाव को कमजोर करने की रणनीति के तहत कई प्रमुख नेताओं को अलग‑अलग सीटों पर उतार रही है. एक तरफ जहां पार्टी ने टी. नगर से बुस्सी आनंद, विल्लीवक्कम से आधवा अर्जुन, एग्मोर से राज मोहन और आर. के. नगर से मैरी विल्सन को मैदान में उतारा है. वहीं, निष्कासित AIADMK नेता के. ए. सेंगोट्टैयन अपने गृह क्षेत्र गोबीचेट्टीपलायम से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं.
बिना बड़े गठबंधन के चुनावी मैदान में विजय
सत्ता में हिस्सेदारी की पेशकश के बावजूद विजय किसी बड़े राजनीतिक दल से गठबंधन करने में सफल नहीं हो पाए हैं. कई फिल्मी सितारों की तरह नहीं, जो राजनीति में लोकप्रियता को सत्ता में नहीं बदल पाए, विजय अपने अभिनय करियर के शिखर को दरकिनार कर राजनीति में उतरे हैं. वह खुद को सी. एन. अन्नादुरै और एम. जी. रामचंद्रन जैसे नेताओं की पहली चुनावी सफलता से जोड़कर देखते हैं, हालांकि द्रविड़ दल उनके इस दावे को जरूरत से ज्यादा महत्वाकांक्षी बता रहे हैं. मौजूदा हालात में तमिलनाडु एक पांच‑कोणीय मुकाबले की ओर बढ़ता दिख रहा है, जिसमें विजय समेत चार मुख्यमंत्री पद के दावेदार चुनावी मैदान में हैं.
(मित्रा आनंद के इनपुट्स के साथ)
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