- कोच्चि में भारतीय नौसेना के आयोजन में बारह देशों की नौसेनाओं ने IONS IMEX 2026 अभ्यास में हिस्सा लिया
- यह अभ्यास टेबल‑टॉप एक्सरसाइज था जिसमें कोई वास्तविक जहाज या हथियार इस्तेमाल नहीं किए गए
- अभ्यास में समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और आपदाओं से निपटने पर चर्चा हुई
कोच्चि में 12 देशों की नौसेनाओं ने मिलकर समुद्री सुरक्षा से जुड़े एक बड़े अभ्यास में शिरकत की. इस अभ्यास का नाम IONS IMEX 2026 था, जिसका आयोजन भारतीय नौसेना की तरफ से किया गया. यह अभ्यास कोच्चि स्थित दक्षिणी नेवल कमांड में आयोजित हुआ, जिसमें कई देशों के नौसैनिक अधिकारी शामिल हुए. इस अभ्यास में बांग्लादेश, फ्रांस, इंडोनेशिया, केन्या, मालदीव के साथ‑साथ मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, तंजानिया और तिमोर‑लेस्ते ने हिस्सा लिया. जिसमें सभी देशों के प्रतिनिधियों ने समुद्री सुरक्षा से जुड़े नए और बदलते खतरों पर विस्तार से चर्चा की.
टेबल‑टॉप एक्सरसाइज, बिना जहाज और हथियारों के अभ्यास
IONS IMEX 2026 एक टेबल‑टॉप एक्सरसाइज थी, जिसमें किसी भी असली जहाज या हथियार का इस्तेमाल नहीं किया गया. पूरा अभ्यास कंप्यूटर और सिमुलेशन के जरिए किया गया. अलग‑अलग हालात बनाकर उनके समाधान खोजे गए और संकट की स्थिति में तेज़ फैसले लेने पर जोर दिया गया. अभ्यास के दौरान यह भी चर्चा की गई कि देशों के बीच आपसी तालमेल को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है. इसमें समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और आपदाओं से निपटने जैसे अहम मुद्दों को शामिल किया गया.
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हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा पर जोर
हिंद महासागर क्षेत्र को वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद ही अहम माना जाता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का व्यापार इसी मार्ग से होता है. ऐसे में इस क्षेत्र की सुरक्षा सभी देशों के लिए जरूरी मानी जाती है. भारत 2026 से 2028 तक IONS की चेयरमैनशिप संभालने वाला है. करीब 16 साल बाद भारत को यह जिम्मेदारी मिली है, जिससे यह अभ्यास और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सहयोग और भरोसा बढ़ाने पर रहा जोर
इस अभ्यास में IONS सागर पहल से जुड़े अधिकारी भी शामिल हुए. उन्हें वास्तविक हालात जैसा अनुभव मिला, जिससे देशों के बीच समझ, सहयोग और भरोसा बढ़ा. एक‑दूसरे के काम करने के तरीकों को समझने में मदद मिली और आपसी समन्वय की क्षमता मजबूत हुई. इस पूरे अभ्यास का मकसद साफ था, सभी देश मिलकर समुद्र को सुरक्षित बनाएं और समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करें.
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