कर्नाटक के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को मंत्रिमंडल से इस्तीफे की घोषणा कर दी. इस दौरान वो काफी भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि वाल्मीकि जनजातीय कल्याण निगम घोटाले को लेकर चल रहे विवाद से कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व को असहज स्थिति का सामना न करना पड़े, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया है. बेंगलुरु के विधान सौधा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नागेंद्र ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि विपक्ष ने उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया है.
उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुझे बताया कि मैं हर स्तर पर निर्दोष हूं. उन्होंने कहा कि मुझे इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है, लेकिन पार्टी को किसी तरह की परेशानी न हो, इसलिए मैं स्वेच्छा से अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को सौंप रहा हूं."
नागेंद्र ने मीडिया के उन प्रतिनिधियों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने उनका समर्थन किया. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने जानबूझकर विधानसभा की कार्यवाही बाधित की और राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं होने दी. भाजपा "मनुस्मृति की सोच" को लागू करना चाहती है, जबकि देश संविधान और डॉ. भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों से चलता है. यह शास्त्रों का युग नहीं है. यह संविधान और बाबा साहेब आंबेडकर का युग है.
#WATCH बेंगलुरु: कर्नाटक के मंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद बी. नागेंद्र ने कहा, "मैंने पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया है।" pic.twitter.com/sRaLdfgTCR
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 28, 2026
उन्होंने रामायण के शंबूक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के दौर में इस तरह के भेदभाव की कोई जगह नहीं है, क्योंकि संविधान वंचित समुदायों को अधिकार देता है. भाजपा की सोच है कि दलित, आदिवासी, महिलाएं, शूद्र और अल्पसंख्यक स्वतंत्र रूप से आगे न बढ़ें और सत्ता में भागीदारी न करें. विपक्ष ने विधानसभा में उचित चर्चा के बिना उनसे इस्तीफे की मांग की.
उन्होंने दावा किया कि सूखा, कावेरी जल विवाद, केपीएससी भर्ती विवाद और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी, क्योंकि सदन की कार्यवाही बाधित की गई. उन्होंने भाजपा की प्रस्तावित पदयात्रा की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और वह वाल्मीकि निगम मामले को घोटाले के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, जबकि उनका इसमें कोई रोल नहीं है.
नागेंद्र ने अपने बचाव में कहा कि मामले में कई जांच हो चुकी हैं. मैं यह बात कई बार कह चुका हूं. 2024 में भी मैंने पार्टी को असहज स्थिति से बचाने के लिए इस्तीफे की पेशकश की थी. उसके बाद हर तरह की जांच हुई. भाजपा सीआईडी और एसआईटी का मजाक उड़ाती है, लेकिन हमें अपनी एसआईटी पर गर्व है.
उन्होंने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें गिरफ्तार किया था और वह तीन महीने जेल में रहे, जिसके बाद उन्हें जमानत मिली. क्या मैंने कहीं कोई हस्ताक्षर किए? क्या मैंने कोई आदेश जारी किया? क्या मेरे पास से एक रुपया भी बरामद हुआ?
नागेंद्र ने कहा कि उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है तो केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत आता है. मुझे ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? क्या इसलिए कि मैं दलित या आदिवासी हूं?
उन्होंने राज्यपाल के उस फैसले पर भी सवाल उठाया जिसमें उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई. उनका कहना था कि केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के खिलाफ इसी तरह का मामला सालों से लंबित है. क्या यही न्याय है? क्या मेरे लिए एक नियम और दूसरों के लिए दूसरा नियम है?
नागेंद्र ने कहा कि वह अपनी बात जनता तक पहुंचाएंगे और कांग्रेस हाईकमान के सामने भी अपनी स्थिति रखेंगे. वह उन 15 विधानसभा क्षेत्रों में लोगों से मिलेंगे जहां अनुसूचित जनजाति समुदाय की बड़ी आबादी है. मैं सिर्फ नागेंद्र हूं. मैं संविधान के आगे सिर झुकाता हूं. मैं इस्तीफा इसलिए दे रहा हूं क्योंकि नहीं चाहता कि मेरी वजह से पार्टी नेतृत्व या मुख्यमंत्री के विकास कार्यों पर कोई असर पड़े.
उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का जिक्र करते हुए कहा कि कर्नाटक से आने वाले इतने वरिष्ठ नेता को इस विवाद की वजह से असहज स्थिति में नहीं डाला जाना चाहिए. उनका इस्तीफा पूरी तरह व्यक्तिगत फैसला है और वह अपने ऊपर लगे आरोपों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे.
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