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शराब की दुकानों से होने वाली लीकेज रोको... CM विजय ने TASMAC और 'पार्टी फंड सिस्टम' पर की बड़ी कार्रवाई

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय को जानकारी मिली थी कि तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) के जरिए सरकारी खजाने में हेरफेर किया जा रहा है. इसके बाद थोक और खुदरा नेटवर्क में चल रहे अनौपचारिक नकद वसूली सिस्टम को तुरंत खत्म करने के निर्देश दिए हैं.

शराब की दुकानों से होने वाली लीकेज रोको... CM विजय ने TASMAC और 'पार्टी  फंड सिस्टम' पर की बड़ी कार्रवाई
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय.
IANS

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं. सीएम को जानकारी मिली थी कि सरकारी खजाने में हेरफेर किया जा रहा था. इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) द्वारा शराब बिक्री से जुड़ी कथित गड़बड़ियों, अनौपचारिक वसूली और “पार्टी फंड” के तौर-तरीकों पर कड़ी कार्रवाई शुरू की है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि शराब की बिक्री से होने वाली हर पाई राज्य के खजाने में जमा हो. साथ ही TASMAC के थोक और खुदरा नेटवर्क में लंबे समय से चल रहे अनौपचारिक नकद वसूली सिस्टम को तुरंत खत्म करने का निर्देश दिया.

सरकार के वरिष्ठ सूत्रों ने बताया कि CM विजय को पता चला था कि TASMAC के कामकाज के दौरान अनौपचारिक “पार्टी फंड” वसूली के जरिए हर महीने लगभग ₹102 करोड़ का हेरफेर किया जा रहा था. सरकारी अनुमानों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में राज्य के खजाने से लगभग ₹1,600 करोड़ का गबन किया गया हो सकता है. सूत्रों का कहना है कि इससे DMK द्वारा TASMAC के कथित इस्तेमाल पर भी सवाल उठ रहे हैं और जांच की बात हो रही है.

अनौपचारिक नकद वसूली सिस्टम होगा खत्म

सीएम ने अधिकारियों को TASMAC के थोक और खुदरा नेटवर्क में लंबे समय से चल रहे अनौपचारिक नकद वसूली सिस्टम को तुरंत खत्म करने का निर्देश दिया, जिसमें लगभग 4,048 आउटलेट रजिस्टर्ड हैं. TASMAC से जुड़ी गड़बड़ियों को निषेध और आबकारी मंत्री के. विग्नेश की देखरेख में सुधारा जा रहा है. आबकारी विभाग के सूत्रों के मुताबिक, TASMAC सप्लाई चेन में लगभग दो दशकों से अनौपचारिक वसूली एक सिस्टम बन गई थी.

TASMAC देखती है राज्य में शराब का काम

बता दें कि तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (TASMAC) एक सरकारी कंपनी है, जो राज्य में शराब की थोक और खुदरा का एकाधिकार रखती है. इसी के अंतर्गत राज्य में शराब के ठेके खोले जाते हैं.

शराब की पेटी से वसूली का ये था सिस्टम

अधिकारियों ने बताया कि तमिलनाडु में शराब की सप्लाई के लिए बोतल के साइज के हिसाब से पेटी बनाई जाती है. जैसे 180 मिली की 48 बोतलों की एक पेटी बनती है, जबकि 375 मिली की 24 बोतलें एक पेटी में आती हैं. ऐसे ही 750 मिली की 12 बोतलें एक पेटी में आती हैं, जबकि बीयर की 12 बोतलों की एक पेटी बनती है.

क्या है वसूली का तरीका

एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि शराब की हर पेटी पर 90 रुपये पार्टी फंड के तौर पर वसूले जाते थे, जबकि बीयर की पेटी पर 40 रुपये. वाइन की पेटी से पैसे 20 रुपये मंत्री या राजनीतिक फंड के लिए जाते थे. वसूली का काम वेयरहाउस, ट्रांसपोर्ट और रिटेल आउटलेट से किया था.

हर महीने 88 लाख ग्राहक खरीदते शराब

TASMAC के आउटलेट्स से लगभग हर महीने 88 लाख ग्राहक शराब खरीदते हैं. इतनी बिक्री की वजह से करोड़ों रुपये की वसूली की जाती है, जिसमें से हर महीने कम से कम 102 करोड़ रुपये की गड़बड़ी हो रही थी. सीएम ने वैसे हर विभाग में गड़बड़ियों को सुधारने के निर्देश दिए, लेकिन TASMAC पर सबसे पहले कार्रवाई की वजह अनौपचारिक वसूली की वजह से राजस्व को होने वाला नुकसान था. सूत्रों के अनुसार, सीएम विजय अगली जांच खनन विभाग की कर सकते हैं.

भ्रष्टाचार के पैसे की जरूरत नहीं- मंत्री

के. विग्नेश ने NDTV को बताया, “सीएम ने कैबिनेट बैठक में स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार या लोगों की तकलीफों से मिलने वाले राजस्व की टीवीके सरकार को जरूरत नहीं है. उन्होंने गड़बड़ियों को रोकने और जनता का पैसा वापस खजाने में लाने का निर्देश दिया.

सूत्रों से पता चला है कि शराबबंदी लागू करने वाले अधिकारी और शराब बनाने वाली कंपनियां को पहले ही सूचना दे दी है कि TASMAC के कामकाज से जुड़े सभी अनौपचारिक वसूली सिस्टम को खत्म किया जाएगा.

सरकारी खजाने में जाएगा शराब बिक्री का पैसा

यह TASMAC के कामकाज में बड़े प्रशासनिक बदलाव की शुरुआत है, जिसमें शराब की खरीद और गोदाम से भेजने से लेकर खुदरा बिक्री, बोतल वापसी और दुकान-स्तर पर होने वाली वसूली तक सब शामिल है. मंत्री विग्नेश ने कहा कि सरकार एक “पूरी तरह पारदर्शी सिस्टम” पर काम कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शराब की बिक्री से होने वाला सारा राजस्व सीधे राज्य के खजाने में पहुंचे. आरोप है कि हर महीने ₹100 करोड़ 'पार्टी फंड' के तौर पर इधर-उधर किए जाते थे.

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