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‘नफरती/सांप्रदायिक टिप्पणी से नुकसान का क्या?’ चुनाव आयोग से केरल हाईकोर्ट ने पूछा सवाल

केरल हाईकोर्ट ने भाजपा उम्मीदवार के कथित सांप्रदायिक बयान को लेकर निर्वाचन आयोग से सवाल किया है. अदालत ने कहा कि नफरती टिप्पणियों से समाज और देश को हुए नुकसान का क्या होता है और आयोग को दो महीने में शिकायत पर निर्णय लेने का निर्देश दिया.

‘नफरती/सांप्रदायिक टिप्पणी से नुकसान का क्या?’ चुनाव आयोग से केरल हाईकोर्ट ने पूछा सवाल
  • केरल हाईकोर्ट ने EC से पूछा कि नफरती या सांप्रदायिक टिप्पणी करने वाले उम्मीदवार के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है
  • अदालत ने EC को दो महीने में याचिका का निपटारा करने और उपयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया
  • निर्वाचन आयोग ने बताया कि भाजपा नेता के खिलाफ FIR दर्ज की गई और विवादित चुनाव प्रचार वीडियो हटा दिया गया है
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कोच्चि:

केरल हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग से शुक्रवार को सवाल किया कि जब कोई उम्मीदवार समुदाय, समाज और देश को नुकसान पहुंचाने वाली नफरती या सांप्रदायिक टिप्पणी करता है, तो क्या होता है. दरअसल हाईकोर्ट ने यह सवाल उस याचिका पर सुनवाई के दौरान पूछा, जिसमें गुरुवायूर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार बी गोपालकृष्णन के एक चुनाव प्रचार वीडियो में कथित सांप्रदायिक टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ निर्वाचन आयोग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है.

निर्वाचन आयोग को दो महीने में निर्णय का निर्देश

जस्टिस बी. कुरियन थॉमस ने याचिका का निपटारा करते हुए निर्वाचन आयोग को यह निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता गोकुल के. द्वारा 20 मार्च को उसे दिए गए अभ्यावेदन पर विचार करे और उपयुक्त आदेश पारित करे. अदालत ने निर्देश दिया कि आयोग द्वारा अभ्यावेदन प्राप्त होने की तिथि से दो महीने के भीतर उसका निपटारा किया जाए. आयोग ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि बीजेपी नेता के खिलाफ निर्वाचन अधिकारी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और संबंधित प्रचार वीडियो हटा दिया गया है.

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घृणास्पद टिप्पणियों पर अदालत की कड़ी टिप्पणी

अदालत ने हालांकि कहा, ‘‘लेकिन किसी समुदाय, समाज और देश को पहुंचे नुकसान का क्या? जब कोई इस तरह की घृणास्पद या सांप्रदायिक टिप्पणियां करता है तो क्या होता है?'' अदालत ने यह भी कहा कि आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू होने के आधार पर एक तरह से पूरी सरकारी मशीनरी ठप हो जाती है और उसी बहाने अदालत के कई निर्देशों तथा वैधानिक दायित्वों तक का पालन नहीं किया जाता. आयोग ने अदालत से कहा कि आदर्श आचार संहिता अदालत के निर्देशों को लागू करने एवं वैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने पर रोक नहीं लगाती और इसे केवल यह सुनिश्चित करने के लिए लागू किया जाता है कि चुनाव में किसी राजनीतिक दल को कोई अनुचित लाभ न मिले.

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भाजपा नेता के वीडियो को लेकर गोकुल की याचिका

गोकुल ने याचिका में कहा है कि उन्होंने भाजपा नेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए 20 मार्च को निर्वाचन आयोग के समक्ष एक अभ्यावेदन दिया था, लेकिन आयोग द्वारा कोई कदम नहीं उठाए जाने पर उन्हें अदालत का रुख करना पड़ा. भाजपा नेता ने विवादित वीडियो में कथित तौर पर दावा किया था कि गुरुवायूर निर्वाचन क्षेत्र ने करीब पांच दशक से किसी ‘‘हिंदू विधायक'' का चुनाव नहीं किया है और उन्होंने आरोप लगाया था कि वामपंथी एवं कांग्रेस नीत मोर्चे, दोनों ने ही वहां इस समुदाय से उम्मीदवार नहीं उतारे हैं.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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