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"रंधावा कार्यकर्ताओं को समय नहीं दे रहे", पंजाब में सियासी हलचल के बीच राजस्थान कांग्रेस में उठे विरोध के सुर

सुखजिंदर सिंह रंधावा के रवैये पर राजस्थान में सवाल खड़े हो गए हैं. कांग्रेस नेता ने आलाकमान को लिखे खुले पत्र में प्रभारी के कामकाज पर ही सवाल खड़े कर दिए.

"रंधावा कार्यकर्ताओं को समय नहीं दे रहे", पंजाब में सियासी हलचल के बीच राजस्थान कांग्रेस में उठे विरोध के सुर
कांग्रेस नेता सतवीर चौधरी ने सुखजिंदर रंधावा के खिलाफ खुला पत्र लिखा.

राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं. रंधावा से नाराजगी जाहिर करते हुए आरोप लगाए गए कि वो कार्यकर्ताओं को बात रखने का मौका नही देते. उनके रवैये पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता सतवीर चौधरी ने खुला पत्र लिख दिया. ये पत्र ऐसे वक्त में लिखा गया है जब रंधावा के गृहराज्य पंजाब में भी सियासी हलचल चल रही है. ऐसे में रंधावा के खिलाफ कांग्रेस पदाधिकारी का पत्र सियासी भूचाल खड़ा कर सकता है. यूथ बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे सतवीर चौधरी ने पत्र को सोशल मीडिया पर शेयर भी किया. उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भी टैग किया. रंधावा की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करते हुए सतवीर ने कहा कि संगठन केवल नेताओं तक सीमित रह गया है. वर्षों से कांग्रेस के लिए संघर्ष करने वाले एनएसयूआई, युवा कांग्रेस, सेवादल, महिला कांग्रेस और ब्लॉक स्तर के समर्पित कार्यकर्ताओं से संवाद करना अब प्राथमिकता नहीं रहा.

"रंधावा से सीधे संवाद के इंतजार में हैं कार्यकर्ता"

चौथरी ने लिखा, "पिछले लगभग ढाई साल से रंधावा राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी हैं. राजस्थान कांग्रेस का एक साधारण कार्यकर्ता होने के नाते मैं रंधावा से अनुरोध करना चाहता हूं कि प्रदेश का बड़ा कार्यकर्ता वर्ग आज भी आपके प्रत्यक्ष संवाद और मार्गदर्शन की प्रतीक्षा कर रहा है. प्रभारी का दायित्व केवल बैठकों, नियुक्तियों और बयानबाजी तक सीमित नहीं होता, बल्कि संगठन की नब्ज पहचानना, कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचना और उनकी आवाज़ को नेतृत्व तक पहुंचाना भी होता है."

बोले- प्रभारी से बात कहने का मौका नहीं, कार्यकर्ता निराश

यूथ बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत उसका समर्पित कार्यकर्ता है. वो ही कार्यकर्ता जिसने सत्ता में रहते हुए भी संगठन को मजबूत किया और विपक्ष में रहते हुए भी झंडा नहीं छोड़ा. जब वही कार्यकर्ता अपने प्रभारी से मिलने और अपनी बात कहने के अवसर से वंचित रह जाए, तो स्वाभाविक रूप से निराशा जन्म लेती है.

इस पत्र में तल्ख शब्दों में लिखा कि अगर प्रभारी कार्यकर्ताओं तक नहीं पहुंचेगा तो कार्यकर्ताओं का विश्वास कैसे मजबूत होगा? अगर जमीनी कार्यकर्ताओं की बात सुने बिना संगठन चलेगा तो संगठन की वास्तविक स्थिति का आंकलन कैसे होगा?

हर जिले का दौरा करने की नसीहत

चौधरी ने लिखा कि आपसे आग्रह नहीं, बल्कि संगठन के हित में अपेक्षा है कि अब औपचारिकताओं से आगे बढ़िए. राजस्थान के हर जिले का दौरा कीजिए, बूथ से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर तक कार्यकर्ताओं से खुला संवाद कीजिए. कांग्रेस को मज़बूत करने का रास्ता बंद कमरों से नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच से होकर जाता है.

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