Rajasthan News: राजस्थान अपनी भव्य हवेलियों और किलों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यहां की बावड़ियां भी कम अद्भुत नहीं हैं. जयपुर से करीब 90 किलोमीटर दूर दौसा जिले के आभनेरी गांव में स्थित चांद बावड़ी एक ऐसी ही ऐतिहासिक धरोहर है, जो अपनी अनोखी बनावट और रहस्यमयी संरचना के कारण लोगों को हैरान कर देती है.
9वीं शताब्दी की अद्भुत इंजीनियरिंग
चांद बावड़ी का निर्माण 9वीं शताब्दी में निकुंभ वंश के राजा चंदा ने करवाया था. उस समय राजस्थान में पानी की भारी कमी रहती थी, इसलिए इस तरह की सीढ़ीदार बावड़ियों का निर्माण जल संरक्षण के लिए किया जाता था. यह बावड़ी आज भी उस समय की उन्नत तकनीक और सोच को दर्शाती है.
3500 सीढ़ियों की अनोखी बनावट
इस बावड़ी की सबसे खास बात इसकी ज्यामितीय संरचना है. इसमें लगभग 3500 संकरी और एक जैसी सीढ़ियां हैं, जो पानी के स्तर तक जाती हैं. तीन तरफ सीढ़ियों की कतारें हैं, जबकि चौथी ओर तीन मंजिला भव्य मंडप बना हुआ है. यह डिजाइन इसे एक भूलभुलैया जैसा रूप देता है, जहां हर कोण से दृश्य अलग दिखाई देता है.
प्राकृतिक ठंडक का अद्भुत अनुभव
जैसे-जैसे कोई व्यक्ति बावड़ी के अंदर नीचे उतरता है, वहां का तापमान कम होता जाता है. नीचे पहुंचते-पहुंचते तापमान सतह से 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा हो जाता है. यही कारण है कि यह जगह गर्मियों में लोगों के लिए ठंडी शरणस्थली बन जाती थी.
हर्षत माता को समर्पित पवित्र स्थल
चांद बावड़ी के पास ही 9वीं शताब्दी का प्राचीन हर्षत माता मंदिर स्थित है. हर्षत माता को प्रसन्नता और खुशी की देवी माना जाता है. यह बावड़ी भी उन्हीं को समर्पित मानी जाती है, जिससे इस स्थान का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है.
सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, सामाजिक केंद्र भी
पुराने समय में यह बावड़ी केवल पानी भरने की जगह नहीं थी, बल्कि एक सामुदायिक स्थल भी थी. यहां यात्री, व्यापारी और स्थानीय लोग रुककर आराम करते थे और आपस में मेलजोल बढ़ाते थे. आभनेरी गांव पहुंचने के लिए जयपुर से सिकंदरा होते हुए दौसा और गूलर चौराहा का रास्ता लिया जा सकता है. यहां तक पहुंचने के लिए टैक्सी या जीप आसानी से उपलब्ध हैं.
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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं