विज्ञापन

कोटा, दौसा, टोंक, सवाई माधोपुर.... राजस्थान के 11 और जिलों के किसानों के लिए खुशखबरी; बिना झंंझट मिलेगी खाद

राजस्थान के 11 और नए जिलों में खाद की बिक्री के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी गई है. इसके जरिए फार्मर आईडी से 267 रुपये प्रति बोरी की दर पर पारदर्शी तरीके से यूरिया मिलेगा.

कोटा, दौसा, टोंक, सवाई माधोपुर.... राजस्थान के 11 और जिलों के किसानों के लिए खुशखबरी; बिना झंंझट मिलेगी खाद
राजस्थान के 11 और जिलों के किसानों के लिए खुशखबरी
IANS

राजस्थान में खाद की समस्या से परेशान किसानों के लिए राहतभरी खबर है. किसानों को समय पर तय कीमत में पारदर्शी तरीके से खाद उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है. वहीं कृषि विभाग भी और महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है. गुरुवार यानी 27 अगस्त से डीबीटी पीओएस एप्लिकेशन के नए वर्जन 3.77 को प्रदेश के 11 और जिलों में लागू किया जाएगा. इससे पहले 2 चरणों में 7 जिलों में इस डिजिटल व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है. 

इन 11 जिलों में नई व्यवस्था लागू

जिन 11 जिलों में डीबीटी पीओएस एप्लिकेशन के नए वर्जन 3.77 को लागू किया जाएगा, उनमें बारां, दौसा, हनुमानगढ़, डूंगरपुर, जालोर, झालावाड़, करौली, कोटा, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर और टोंक शामिल हैं.  कृषि विभाग के अनुसार, अब तक 1 लाख से अधिक किसानों ने लगभग 15 हजार मीट्रिक टन यूरिया की बुकिंग इस व्यवस्था के माध्यम से की है. 

राजस्थान के 11 और जिलों में ऑनलाइन होगी उर्वरक बिक्री

राजस्थान के 11 और जिलों में ऑनलाइन होगी उर्वरक बिक्री
Photo Credit: IANS

कितने रुपये में मिलती है यूरिया

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि पहले दो चरणों के परिणाम उत्साहजनक और सकारात्मक रहे हैं. किसानों ने डिजिटल बुकिंग प्रक्रिया को सरल, सुविधाजनक और उपयोगी बताया है. सरकार किसानों को एक बोरी यूरिया 267 रुपये की दर पर देती है, जबकि एक बोरी पर करीब 1600 रुपये की सब्सिडी सरकार वहन करती है.

औद्योगिक ग्रेड यूरिया की कीमत 2500 रुपये से अधिक होने के कारण सब्सिडी वाले यूरिया की कालाबाजारी और अनधिकृत उपयोग की संभावना बनी रहती है.

ऐसे में सरकार की नई व्यवस्था से प्रदेशभर में यूरिया खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. साथ ही जरूरतमंद किसानों को उनकी आवश्यकता के हिसाब में खाद मिल सकेगा. कृषि आयुक्त के अनुसार, राजस्थान में फार्मर आईडी से किसानों को खाद मिलेगी. इसके लिए सरकार तेजी के साथ काम कर रही है. प्रदेश में अब तक 88.85 लाख किसानों की फॉर्मर आईडी बन चुकी है, जोकि अपने आप में रिकॉर्ड है. 

नए सिस्टम से किसानों को क्या फायदा

  • नए सिस्टम में खाद की बिक्री डिजिटल रूप में दर्ज होगी.
  • खाद (उर्वरक) की वास्तविक मांग, उपलब्ध स्टॉक और वितरण की प्रभावी निगरानी संभव होगी.
  • किसानों को दुकान पर अनावश्यक कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी.
  • निर्धारित दर से अधिक राशि की वसूली पर प्रभावी नियंत्रण रहेगा.
  • डीलर खाद के साथ अन्य उत्पादों की अनिवार्य टैगिंग नहीं कर सकेंगे.
  • वास्तविक किसान तक सब्सिडी वाली खाद पहुंचना सुनिश्चित होगा.
  • दुकानदारों और अधिकारियों को स्टॉक की वास्तविक स्थिति की जानकारी उपलब्ध रहेगी.
  • सरकार को सब्सिडी वाले उर्वरक के वितरण की बेहतर निगरानी में मदद मिलेगी.
  • कालाबाजारी, जमाखोरी और अनधिकृत बिक्री की संभावनाओं पर अंकुश लगेगा.

बता दें कि डीबीटी पीओएस एप्लिकेशन के नए वर्जन 3.77 को अधिक सरल, तेज और स्थिर बनाया गया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी उर्वरक बिक्री की प्रक्रिया बिना अनावश्यक परेशानी के सुचारू रूप से संचालित हो सके. इस नए सिस्टम को कृषि विभाग द्वारा चरणबद्ध रूप से लागू की जा रही यह व्यवस्था उर्वरक वितरण को पारदर्शी, जवाबदेह और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. इससे सब्सिडी का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचाने, उर्वरक की कालाबाजारी पर रोक लगाने और जरूरत के समय किसानों को निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.

यह भी पढें- जयपुर मेट्रो विस्तार: फेज-2 में एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन से कलेक्ट्रेट, अजमेरी गेट तक 36 स्टेशन कनेक्ट होंगे, टेंडर जारी

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Farmers News, Farmers News Today, Fertilizer Subsidy, Fertilizer Subsidy DBT, Fertilizer Subsidy India
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com