Udaipur News: भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस (BJP Sthapna Diwas) के मौके पर पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया (Gulab Chand Kataria) ने राजस्थान में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए उदयपुर जिले में चल रही राजनीतिक गुटबाजी (Udaipur Politics) पर जवाब दिया. महामहिम ने मावली विधानसभा से भाजपा के विधायक रहे धर्म नारायण जोशी (Dharam Narayan Joshi) का नाम लिए बिना कहा, 'वो तो एक बार चुनाव लड़कर विधासभा ही छोड़कर चले गए. हम तो टिकट देने को तैयार थे, लेकिन पता नहीं उनको क्या हुआ. हम जब पब्लिक की सेवा करते है तो पब्लिक में खड़े रहने का दम रखते है. इनके दर्द कहीं और है, बता कहीं और रहे हैं. इस रोग का कोई इलाज नहीं है. समय अच्छे-अच्छों का इलाज कर देता है. उनकी मूल बीमारी तो वे ही बता सकते हैं. मै तो खाली उनको सुन रहा हूं. वो विद्वान लोग हैं. जो भी कह रहे हैं, अच्छा ही कह रहे होंगे. उनको वर्षों का ज्ञान है. लेकिन मेरा मूल्यांकन जनता करेगी.'
'वो पूछते हैं कि मैं बार-बार राजस्थान क्यों आ जाता हूं'
कटारिया ने आगे कहा, 'वो पूछते हैं कि आप बार-बार आ जाते हो? मैं डे-टू-डे जनवरी, फरवरी और मार्च का सारा कार्यक्रम लाया हूं. मैं गारंटी से कह सकता हूं कि मैं जितना प्रवास चंडीगढ़ में करता हूं, जितना पब्लिक से मिलता हूं, जितने पब्लिक के काम करता हूं. आप डायरेक्टरी उठाना और 20 लोगों को फोन कर पूछना. मुझे छोटा बच्चा भी पहचानता है. कई लोग 5-5 साल राज्यपाल रहने के बाद भी लोग पूछे तो याद नहीं आता है कि राज्यपाल कौन है. लेकिन पंजाब के किसी भी कोने में जाकर अगर पूछेंगे तो वो बता देंगे कि उनका राज्यपाल कौन है.
'गलत काम में इन्वॉल्व होने वाला मेरी आंखों से उतर जाता है'
इस दौरान राष्ट्रपति को लिखी गई चिट्टी पर भी कटारिया ने जवाब दिया. उन्होंने कहा, 'इसका जवाब आप अच्छे से दे सकते हैं. मैं कोई आज से यहां रहता नहीं हूं. मैं 40-50 साल से यही हूं. मैंने 50 साल में कुछ तो किया ही होगा, क्योंकि 50 साल तक जनता मुझे इस क्षेत्र में जिंदा रखती है. बिना उसकी मेहरबानी तो जिंदा नहीं रह सकता हूं. न मेरे पास कोई प्रोपर्टी है, न बड़े घर से पैदा हुआ हूं. सामान्य व्यक्ति हूं. मेरी कुछ कमियां निकाली होगी, पर मेरे कोई दाग नहीं सका. न मैं गलत काम में इन्वॉल्व हुआ हूं और जो इन्वॉल्व हुआ वो मेरी आंखो से उतर जाता है.'
'मैं उनका सीरियसली नहीं लेता हूं...'
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब एक पत्रकार ने राज्यपाल कटारिया से पूर्व विधायक जोशी के आरोपों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, 'मैंने उन्हें सीरीयस नहीं लिया है. आप लोग विद्वान हैं. मैं सारी जानकारी की किताब दे रहा हूं. उन विद्वानों को भी पहुंचा देना, ताकि उन्हें भी समझ आए. मैं किसी की तोहिन नहीं करना चाहता हूं. वो अपने जीवन का एक साल का चार्ट निकाल लें.'
'मैं जब तक जिंदा हूं तब तक...'
आज की स्थिति में उदयपुर भाजपा के हाल पर सवाल पूछने पर कटारिया ने कहा, 'इस बारे बोलने का मेरा अधिकार नहीं है. मैं जिस संवैधानिक पद पर गया हूं उसमें आपको पार्टी लाइन की एक लाइन भी अलग दिखे तो बताओ. जैसे पार्टी ने तैयार किया, वैसे काम किया है. मैं यहां से 11 बार चुनाव लड़ा, 9 बार जीता हूं. जब तक जिंदा रहूंगा, तब तक मेरे प्रेम में कोई कमी नहीं आएगी. मेरा पद तो साल-दो साल रहेगा. उसके बाद भी मैं उदयपुर में रहूंगा. उस समय पर भी मेरा काम देखकर उनको बता देना.'
'इन सब घटनाक्रम से मुझे रत्ती भर पीड़ा नहीं होती है'
बताते चलें कि 1 अप्रैल को धर्म नारायण जोशी ने सोशल मीडिया पर 10 पुराना वीडियो शेयर किया था, जिसमें वो पूर्व सांसद भानूकुमार शास्त्री समेत कई नेताओं के साथ कटारिया की खिलाफत कर रहे थे. इसके बाद जोशी के करीबी भाजपा नेता विजय प्रकाश विपल्वी ने भी राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कटारिया के बार-बार उदयपुर दौरे पर सवाल उठाए थे और इसे सरकारी संसाधनो का दुरूपयोग बताया था. इसके जवाब में कटारिया ने कहा, 'मैं इसे विरोध नहीं कहता हूं. पर तकलीफ क्या है, वो बताएं. उसका सुधार करेंगे. इन सब घटनाक्रम से मुझे रत्ती भर पीड़ा नहीं होती है. मैं 5 मिनट में प्रेम से सो जाता हूं. जिंदगी में इतने उतार चढ़ाव देखे हैं, मेरी नींद कभी डिस्टर्ब नहीं हुई. चुनाव हारना-जितना होता रहता है, पर हिम्मत नहीं करना और मैदान छोड़ देना, यह कहां शोभा देता है. हारना तो संभव है. हम भी इंदिरा गांधी के जमाने में 1100 वोटो से हार गए.'
पूर्व विधायक ने अपनी पोस्ट में क्या लिखा था?धर्म नारायण जोशी ने गुलाबचंद कटारिया पर मुख्य रूप से सुंदरसिंह भंडारी चैरिटेबल ट्रस्ट को अपनी 'जेबी संस्था' बनाकर उसका राजनीतिकरण करने और भाजपा संगठन के समानांतर अपनी व्यक्तिगत सत्ता चलाने का आरोप लगाया था. उन्होंने कटारिया को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि वे अपनी सुविधा और शक्ति प्रदर्शन के लिए भंडारी जी की जयंती की तिथि बदलकर उसे भाजपा के स्थापना दिवस के दिन आयोजित कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन है. साथ ही, जोशी ने उन पर वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा करने, ट्रस्ट की संपत्तियों और धन का उपयोग अपनी निजी छवि चमकाने में करने और भंडारी जी के जीवित रहते उनकी सेवा न करने के बावजूद अब उनके नाम का राजनीतिक लाभ उठाने जैसे गंभीर नैतिक और व्यावहारिक आरोप भी जड़े हैं.
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