- कोटा जिले के कुन्हाड़ी थाना इलाके में दो पक्षों के बीच भैंस और उसके बच्चे की मिल्कियत पर विवाद थाने तक पहुंचा
- दोनों पक्षों ने भैंस की उम्र को लेकर अलग-अलग दावे किए, एक ने सात साल और दूसरे ने साढ़े चार साल बताई
- पुलिस ने विवाद सुलझाने के लिए भैंस और उसके बच्चे को थाने में रखा और पशु चिकित्सकों से मेडिकल परीक्षण करवाया
राजस्थान के कोटा जिले में पुलिस के सामने एक ऐसा अजीबोगरीब मामला आया, जिसने खाकी वर्दीधारियों के पसीने छुड़ा दिए. मामला किसी चोरी या डकैती का नहीं, बल्कि एक भैंस और उसके बच्चे (पाड़े) की असली मिल्कियत की पहचान का था. दो दावेदारों के बीच उलझे इस विवाद को सुलझाने के लिए पुलिस को अंततः भैंस का 'मेडिकल टेस्ट' करवाना पड़ा.
क्या था पूरा मामला?
यह घटना शनिवार दोपहर कोटा के कुन्हाड़ी थाना इलाके की है. यहां एक भैंस और उसके बच्चे पर मालिकाना हक को लेकर दो पक्ष आपस में भिड़ गए. विवाद इतना बढ़ा कि मामला थाने तक पहुंच गया. दोनों ही पक्ष भैंस को अपनी बताने पर अड़े थे और किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं थे.

जब थाने पहुंची भैंस
पुलिस के लिए यह तय करना मुश्किल हो गया कि आखिर सच कौन बोल रहा है. स्थिति को देखते हुए थाना अधिकारी कौशल्या गालव ने भैंस और उसके बच्चे को गाड़ी में लोड करवाकर थाने मंगवा लिया. करीब 4 घंटे तक थाने के बाहर गहमागहमी बनी रही और पुलिस असमंजस में रही.

उम्र के फेर में फंसा 'झूठ'
विवाद सुलझाने के लिए पुलिस ने दोनों पक्षों से भैंस की उम्र पूछी. यहीं से मामले में निर्णायक मोड़ आया. पहला पक्ष बालिता रोड निवासी इंद्रजीत केवट ने दावा किया कि भैंस उसकी है और उसकी उम्र 7 साल है. दूसरा पक्ष रामलाल मेघवाल ने भैंस को अपना बताते हुए उसकी उम्र साढ़े 4 साल बताई.
मेडिकल रिपोर्ट ने किया दूध का दूध और पानी का पानी
सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस ने पशु चिकित्सकों की टीम को बुलाया. डॉक्टरों ने भैंस का शारीरिक परीक्षण (मेडिकल) किया। मेडिकल रिपोर्ट में भैंस की उम्र 4 से 5 साल के बीच पाई गई. चिकित्सकों की इस रिपोर्ट ने रामलाल मेघवाल के दावे की पुष्टि कर दी, जबकि इंद्रजीत का दावा गलत साबित हुआ. इसके बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर भैंस और उसके बच्चे को रामलाल मेघवाल के सुपुर्द कर दिया.
थाना अधिकारी ने कहा, "दोनों पक्षों में विवाद बढ़ रहा था, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए मेडिकल का सहारा लिया गया. मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर भैंस असली मालिक को सौंप दी गई है."
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