हरियाणा की मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद के पहले ही दिन जिस स्तर की अव्यवस्था, लापरवाही और खुली लूट देखने को मिली है, उसने भाजपा की नायब सिंह सरकार की पूरी तरह पोल खोल दी है. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने तीखा हमला करते हुए कहा कि प्रदेश की 90% से अधिक मंडियों में सरकारी खरीद पूरी तरह ठप पड़ी रही, जबकि हजारों किसान सुबह 5 बजे से शाम 7 बजे तक अपनी फसल लादे लाइन में पसीना बहाते रहे.
उन्होंने कहा कि राज्य भर में सरसों की आवक 1.2 लाख क्विंटल से अधिक पहुंच चुकी है, लेकिन सरकारी एजेंसियों ने 5% तक खरीद भी नहीं की. यह सीधे-सीधे साबित करता है कि सरकार खरीद करना ही नहीं चाहती. जबकि सरकार खुद 13 लाख मीट्रिक टन सरसों खरीदने का लक्ष्य तय कर चुकी है, ऐसे में पहले दिन की यह हालत सरकार की नीयत और तैयारी दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
अनुराग ढांडा ने कहा कि जींद, हिसार, फतेहाबाद, रेवाड़ी, रोहतक और कई अन्य जिलों में किसानों को घंटों धूप में खड़ा रहना पड़ा. जींद में तो किसान खाली हाथ वापस लौटते दिखे.उन्होंने कहा कि ई-खरीद पोर्टल पूरी तरह ध्वस्त रहा. सर्वर क्रैश, डेटा वेरिफिकेशन में करीब 70% गड़बड़ी और सिस्टम अपडेट न होने के कारण किसानों को गेट पास तक नहीं मिल सके. 5000 से ज्यादा किसानों को “रिकॉर्ड मैच नहीं” का बहाना बनाकर वापस भेज दिया गया. यह सवाल सीधा है कि जब खरीद की तारीख पहले से तय थी, तो सरकार का IT सिस्टम क्यों सोया रहा? यह डिजिटल इंडिया नहीं, बल्कि किसानों के साथ डिजिटल धोखा है.
अनुराग ढांडा ने कहा कि मंडियों में हालात और भी बदतर हैं. न बारदाना उपलब्ध है, न तुलाई के कांटे, न पर्याप्त लेबर. पीने के पानी, शौचालय और बैठने की व्यवस्था तक नहीं है. किसान अपनी फसल लेकर धूप में तड़पते रहे, लेकिन सरकार और उसके अधिकारी गायब रहे. यह सरकार किसानों की नहीं, अव्यवस्था और लापरवाही की सरकार बन चुकी है.
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