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गुजरात से टेनिस कोर्ट तक: विंबलडन के तौलियों का है भारतीय कनेक्शन

विंबलडन के तौलियों के निर्णाम में खास कॉटन का इस्तेमाल होता है, जिससे यह पसीने को जल्दी सोखता है. इन तौलियों का एक भारतीय कनेक्शन भी है.

गुजरात से टेनिस कोर्ट तक: विंबलडन के तौलियों का है भारतीय कनेक्शन
Wimbledon Towels India Connection

विंबलडन 2026 अपने आखिरी पड़ाव पर है और फैंस को बेसब्री से इंतजार हैं कि इस का ग्रैंड स्लैम टाइटल कौन उठाएगा. विमेंस सिंगल्स सेमीफाइनल गुरुवार को हुए, जिसमें लिंडा नोस्कोवा और कैरोलिना मुचोवा ने फाइनल में अपनी जगह पक्की की. अब ध्यान शुक्रवार को होने वाले मेंस सिंगल्स सेमीफाइनल पर है, जिसमें नोवाक जोकोविच और जैनिक सिनर के बीच ब्लॉकबस्टर मुकाबला होगा. जहां हाई-क्वालिटी टेनिस दर्शकों को लुभाता रहता है, वहीं इस मशहूर टूर्नामेंट की एक और अनोखी बात ने भी हाल के सालों में फैंस का ध्यान खींचा है - खिलाड़ियों के तौलिए.

परंपरागत रूप से, खिलाड़ियों के रैकेट, रिस्टबैंड और कैप फैंस के बीच बेशकीमती यादगार निशानी के तौर पर रही हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में विंबलडन के तौलिए की मांग भी फैंस के बीच बढ़ी है और वो इन्हें निशानी के तौर पर रखते हैं.

विंबलडन के तौलियों का भारतीय कनेक्शन

दिलचस्प बात यह है कि विंबलडन में इस्तेमाल होने वाले तौलियों का भारत से गहरा नाता है. 1987 से, लग्ज़री होम ब्रांड - क्रिस्टी, अधिकारिक तौर पर चैंपियनशिप के लिए तौलियए बनाती आई है. पहले इनका प्रोडक्शन ब्रिटेन में होता था, लेकिन बाद में इनका निर्णाम गुजरात के वापी में होना लगा, जब इंडियन टेक्सटाइल की बड़ी कंपनी वेलस्पन ने 15 साल पहले इस ब्रांड को खरीद लिया और धीरे-धीरे मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स को इंडिया में शिफ्ट कर दिया.

हर साल के तौलियों का डिज़ाइन प्रोसेस टूर्नामेंट से लगभग 18 महीने पहले शुरू हो जाता है. क्रिस्टी की डिज़ाइन टीम तौलियों का लुक फाइनल करने से पहले सीज़नल कलर पैलेट, नए डिज़ाइन ट्रेंड्स और कस्टमर की बदलती पसंद को स्टडी करती है. रिपोर्ट्स की मानें तो इन तौलियों में ह्यग्रो कॉटन का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह पसीने को तेजी से सोखने और जल्दी सूखने में मदद करते हैं. 

खिलाड़ियों को आते हैं पसंद 

खिलाड़ियों से उम्मीद की जाती है कि वे हर मैच के बाद अपने तौलिए लौटा दें, लेकिन कई खिलाड़ी उन्हें रखना पसंद करते हैं. हर साल, कई खिलाड़ी तौलिए को याद के तौर पर घर ले जाते हैं, जबकि कुछ उन्हें फैंस को गिफ्ट करते हैं. इस वजह से, टूर्नामेंट के दौरान केवल लगभग 15 प्रतिशत तौलिए ही लौटाए जाते हैं.

तौलियों की लोकप्रियता ने उन्हें विंबलडन की सबसे पसंदीदा यादगार चीज़ों में से एक बना दिया है, जिससे वे लगभग टूर्नामेंट जितने ही पहचाने जाने लगे हैं.

विंबलडन में इंडियन इन्फ्लुएंसर

ज़्यादातर लोगों के लिए, विंबलडन चैंपियनशिप में जाना एक सपना होता है, लेकिन इंडियन डिजिटल क्रिएटर विजय कुमार के लिए, यह उनके सफ़र में एक और मील का पत्थर रहा. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले के रहने वाले विजय ने सिर्फ़ एक फ़ोन और लोगों को हंसाने के आइडिया  से अपना सफर शुरू किया था. यह सफर आज एक नए मुकाम पर है. विजय की सफलता बताती है कि सोशल मीडिया किसी इंसान की ज़िंदगी कैसे बदल सकता है. उन्होंने अपने विंबलडन विज़िट की तस्वीरें शेयर करते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा, "यह उन लोगों के लिए है जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया. धन्यवाद."

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