भुवनेश्वर में चल रही इंटर स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में केरल की एंसी सोजन ने 6.88 मीटर जंप लगाकर भारत का 22 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया. एथेंस ओलिंपिक्स 2004 में भारत की स्टार एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज ने 6.83 मीटर जंप लगाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था. वो एथेंस ओलिंपिक्स में पांचवें नंबर पर रहीं थीं. NDTV संवाददाता विमल मोहन से EXCLUSIVE बात करते हुए अंजू ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं. रिकॉर्ड टूटने के लिए ही बनते हैं. आख़िरकार ये 22 साल पुराना रिकॉर्ड टूट गया है. मुझे उम्मीद थी कि एंसी सोजन या शैली मेरा रिकॉर्ड तोड़ेंगी. ये आज हो ही गया.”
ओलिंपिक का मेडल ज़रूरी है
वर्ल्ड चैंपियनशिप्स मेडल विजेता अंजू जॉर्ज कहती हैं, “2004 में मैंने तीन बार बड़े जंप लगाए थे. 2003 में पेरिस वर्ल्ड चैंपियनशिप्स में 6.70 मीटर जंप लगाकर ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था. मुझे लगता है वक्त आ गया है. ये खिलाड़ी अब वर्ल्ड चैंपियनशिप्स और ओलिंपिक्स के लिए तैयार हैं. मुझे ये भी लगता है कि ये 7 मीटर का बैरियर भी तोड़ देंगी.”
जल्दी टूटेगा 7 मीटर का बैरियर?
लेकिन अगर भारत को ओलिंपिक्स में मेडल चाहिए तो 7 मीटर जंप लगाना ज़रूरी होगा. पेरिस ओलिंपिक्स 2024 में अमेरिका की तारा डेविस वुडहॉल ने 7.10 मीटर के साथ गोल्ड, जर्मनी की मलाइका मिहाम्बो ने 6.98मीटर के साथ सिल्वर और अमेरिका की जैस्मिन मूर ने 6.96 मीटर के साथ ब्रॉन्ज़ जीता. इटली की लैरिसा लैपिचिनो 6.87 मीटर जंप लगाकर चौथे नंबर पर रही थीं. इसलिए एंसी का 6.88 मीटर जंप उन्हें चौथे स्थान तक पहुंचा सकता था.
2022 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में एंसी ने 6.53 मीटर के साथ सिल्वर जीता था. जबकि, जापान की सुमिरे हाता ने 6.75 मीटर के साथ गोल्ड जीता था. एंसी सोजन का भुवनेश्वर का 6.88 मीटर का जंप उन्हें एशियाड में गोल्ड दिला सकता है. बर्मिंघम में 2022 में हुए क़मनवेल्थ गेम्स में भी नाइजीरिया, ऑस्ट्रेलिया और घाना की खिलाड़ियों ने 7:00 मीटर, 6.95 मीटर और 6.94 मीटर की छलांग के साथ क्रमश: गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज़ जीता था.
यानी एंसी सोजन के थोड़ा और बेहतर करते ही एशियाड गोल्ड, और कॉमनवेल्थ और ओलिंपिक्स के मेडल उनकी पहुंच में आ सकते हैं. पूर्व ओलिंपियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप्स पदक विजेता अंजू जॉर्ज को यकीन है कि एंसी सोजन और शैली सिंह ये कारनामा कर सकती हैं. आनेवाले दो बड़े टूर्नामेंट- ग्लासगो में होनेवाले कॉमनवेल्थ गेम्स (23 जुलाई- 2 अगस्त, 2026) और एइचि-नागोया, जापान में होनेवाले एशियन गेम्स (19 सितंबर से 4 अक्टूबर, 2026) में भारत की एंसी सोजन और शैली सिंह से बड़ी उम्मीदें रहनेवाली हैं.
ऑटो चलाते थे एंसी सोजन के पिता
केरल की 25 साल की एंसी इंडियन नेवी में चीफ़ पेटी अफ़सर (Chief petty officer in Indian Navy) हैं और कोच अनूप जोसेफ़ के साथ ट्रेनिंग करती हैं. वो अपनी बहन अंजलि को भी ट्रेनिंग देती हैं. बचपन में एंसी सोजन का सफ़र आसान नहीं रहा है. एंसी के पिता एक लेवल पर एथलीट थे. लेकिन बाद में ऑटो ड्राइवर बन गए. एंसी के पिछले साल हॉरमोनल इश्यूज़ का भी सामना करना पड़ा.
एमएस धोनी की फ़िलासफ़ी से मिली मदद
एंसी पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी की फ़ैन रही हैं. वो धोनी के ही सिद्धांत, “प्रोसेस ओवर रिज़ल्ट्स” यानी अपनी ट्रेनिंग के तरीके पर ध्यान देती हैं और रिज़ल्ट की ज़्यादा परवाह नहीं करतीं.
2022 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के बाद एंसी सोजन ने कहा था, "जब आप कंपटीशन में जाते हो तो सब रिजल्ट के बारे में सोचते हैं. रिजल्ट को साइड रखो. पहले ट्रेनिंग करो और जो ट्रेनिंग में किया है वो कंपटीशन में दो. धोनी हमेशा कहते थे 'Control the controllables.' मैं बस अच्छे रन-अप और टेक-ऑफ पर फोकस की. वही दिया और अच्छा प्रदर्शन मिला. यही मेरा प्रोसेस है."
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