Jhandu Kumar: बिहार के पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने COVID-19 महामारी के दौरान अपने परिवार का पेट पालने के लिए कभी सब्ज़ियां बेचीं और ई-रिक्शा चलाया था. उनके संघर्षों को आखिरकार वह सफलता मिली जिसका वह हकदार थे. झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के पदकों का खाता खोल दिया है. पैरा पावरलिफ़्टिंग में झंडू कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. झंडू ने हैवीवेट वर्ग में 130.9 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफलता हासिल की थी.

झंडू कुमार के माता-पिता नालंदा में बेचते हैं सब्जी
वहीं बिहार के नालंदा जिले के हरनौत में झंडू कुमार का बचपन काफी संघर्षों में बीता, वह परिवार की आर्थिक मदद के लिए अपने माता-पिता के साथ सड़क किनारे सब्जियां बेचते थे.

5 साल की उम्र में पोलियो का शिकार हुए
पांच साल की उम्र में पोलियो की चपेट में आने के बाद झंडू ने काफी संघर्ष किया.बाद में ‘पैरा पावरलिफ्टिंग' ने उन्हें रास्ता दिखाया जिसने उनकी जिंदगी बदल दी. अब गांधीनगर में ट्रेनिंग ले रहे झंडू कुमार भारत के प्रमुख पैरा पावरलिफ्टरों में शामिल हो चुके हैं. उन्होंने पुरुषों के 72 किग्रा वर्ग में राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी अपने नाम किया हुआ है.

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झंडू कुमार ने अपनी पहली कोशिश में 181 किग्रा वजन सफलतापूर्वक उठाया और फिर बाद में 190 किग्रा का भार उठाने में सफल रहे. उन्होंने अपनी आखिरी लिफ्ट में 196 किग्रा उठाने की कोशिश की, लेकिन इसमें वह असफल रहे. दूसरी ओर नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने 208किग्रा वजन उठाकर और 132.8 अंकों के साथ गोल्ड मेडल पर कब्जा दिया. इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने 199किग्रा वजन उठाकर और 131.0 के साथ सिल्वर मेडल जीता. झंडू के मेडल जीतते ही ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने पहला मेडल हासिल कर लिया है.
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