डिस्कस थ्रोअर सागर थायत ने एक सामान्य एथलीट के तौर पर शुरुआत की थी, लेकिन 2012 में हुए एक हादसे में उनके दोनों टखने (एंकल) बुरी तरह घायल हो गए और उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई. पैरा डिस्कस थ्रोअर थायत कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में F43/44 कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. ये गेम्स स्कॉटलैंड के ग्लासगो में गुरुवार से 2 अगस्त तक खेले जाएंगे.
SAI मीडिया से बातचीत में 26 साल के सागर ने उस भयानक हादसे और उससे जुड़ी मुश्किलों को याद करते हुए कहा, 'मैं देहरादून स्पोर्ट्स कॉलेज में था, जो आर्मी फायरिंग रेंज के पास है. गलती से किसी ने हॉस्टल में मोर्टार फेंक दिया. इसके बाद मैं ढाई साल तक अस्पताल में रहा. उस दौरान मेरी 20 से ज्यादा सर्जरी हुईं. मुझे स्कूल छोड़ना पड़ा और 2015 में मैंने फिर से स्कूल जॉइन किया. ठीक होने में मुझे 5-6 साल लग गए.'
देवेंद्र झाझरिया से मिली प्रेरणा
उत्तराखंड के बागेश्वर के रहने वाले सागर ने बताया कि पैरालिंपिक्स में दो गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय देवेंद्र झाझरिया के बारे में पढ़ने के बाद उन्हें पैरा-एथलेटिक्स में आने की प्रेरणा मिली. उन्होंने कहा, '2019 में अखबारों में देवेंद्र झाझरिया सर के बारे में पढ़कर मुझे पैरा-स्पोर्ट्स के बारे में पता चला. बाद में, जब गांधीनगर के NCoE में मेरा सिलेक्शन हुआ, तो मुझे उनके साथ ट्रेनिंग करने का मौका मिला.'
शॉट पुट एथलीट के तौर पर की शुरुआत
सागर ने शॉट पुट एथलीट के तौर पर शुरुआत की थी और बाद में पैरालिंपिक्स को ध्यान में रखते हुए डिस्कस थ्रो अपना लिया. उन्होंने बताया, '2019 में मैंने पैरा-एथलेटिक्स नेशनल्स में हिस्सा लिया. मैंने शॉट पुट में मुकाबला किया; तब मैं जूनियर था लेकिन सीनियर कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता. स्विट्जरलैंड में पैरा-एथलेटिक्स जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए मेरा सिलेक्शन हुआ, जहां मैंने शॉट पुट में गोल्ड जीता, जबकि डिस्कस थ्रो में मैं चौथे स्थान पर रहा.
कोच ने दी डिस्कस थ्रो अपनाने की सलाह
उन्होंने बताया कि, 'सभी मेडल जीतने वालों का सीधे खेलो इंडिया स्कीम के लिए सिलेक्शन हुआ, इसलिए मुझे गांधीनगर के NCoE में एडमिशन मिल गया. वहां मेरे कोच मधु कुमार सर और कोच सुनील ने मुझे डिस्कस थ्रो अपनाने की सलाह दी क्योंकि शॉट पुट पैरालिंपिक्स का हिस्सा नहीं है.'
नेशनल लेवल पर उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले सागर एक बहुत होनहार पैरा-एथलीट बनकर उभरे हैं. उन्होंने दुबई पैरा-एथलेटिक्स ग्रां प्री (2025) में गोल्ड मेडल, इंडियन ओपन पैरा-एथलेटिक्स इंटरनेशनल चैंपियनशिप (2026) में एक और गोल्ड और ट्यूनीशिया पैरा-एथलेटिक्स ग्रां प्री (2023) में ब्रॉन्ज मेडल जीता है.
सागर को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
उन्होंने वर्ल्ड पैरा-एथलेटिक्स 2025 में 51.93 मीटर का अपना बेस्ट थ्रो दर्ज किया और उम्मीद है कि CWG के दौरान वे इससे बेहतर प्रदर्शन करेंगे. 'ट्रेनिंग के दौरान मैंने 55-56 मीटर तक थ्रो किया है. मुझे भरोसा है कि मैं 51.93 मीटर से बेहतर कर सकता हूं.'
नेशनल लेवल पर उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले 26 वर्षीय सागर ने गांधीनगर के SAI, NCoE में बिताए अपने समय के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि, 'NCoE में मेरी ट्रेनिंग सही मायने में शुरू हुई. यह एक शानदार सुविधा है जहां बहुत अच्छी कोचिंग और सभी जरूरी सुविधाएं मिलती हैं. यह भारत में पैरा-एथलीटों के लिए सबसे अच्छी जगह है और दिव्यांगों के लिए बहुत अनुकूल है.'
वे अपने कोच, मधु कुमार को अपना रोल मॉडल मानते हैं. 'मैंने उनसे (मधु कुमार) कभी नहीं कहा कि वे मेरे आदर्श हैं. वे बहुत अच्छे कोच हैं. वे अपनी बात बहुत अच्छे से समझाते हैं और बड़े भाई की तरह बहुत प्यार से सुधार के सुझाव भी देते हैं. वे हमें सलाह देते हैं कि हालात से तनाव न लें. बस सालों से ट्रेनिंग में जो सीखा है, उसे लागू करें. वे कहते हैं कि कॉम्पिटिशन के दौरान कुछ अलग करने की कोशिश न करें, बस ट्रेनिंग पर ध्यान दें.'
ओपन लर्निंग के जरिए BA कर रहे सागर ने चोट के दिनों में मिले सहयोग के लिए अपने परिवार का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि, 'घर के लोगों ने हमेशा बहुत सहयोग किया है, चाहे मेरे ताऊजी हों, चाचियां हों, पिताजी हों या कोई और. उन्होंने कभी मुझ पर नौकरी करने का दबाव नहीं डाला और जब मैंने अपने जुनून को आगे बढ़ाने का फ़ैसला किया, तो उन्होंने मेरा साथ दिया.'
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