कॉमनवेल्थ गेम्स की हैट्रिक गोल्ड मेडल विजेता मीराबाई चानू और वेटलिफ़्टिंग कोच विजय कुमार शर्मा मानते हैं कि विदेशी ज़मीन पर भारत के लिए ये अबतक का बेस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स रहा है. ग्लासगो में भारत के मेडल वाले स्पोर्ट- शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, क्रिकेट जैसे गेम्स को हटाकर XXIIIवें क़मनवेल्थ गेम्स आयोजित किए गए और उसके बावजूद भारत 39 मेडल के साथ चौथे नंबर पर आने में कामयाब रहा. 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरे नंबर पर रहा था. ज़ाहिर है भारत ‘अहमदाबाद 2030' में उससे भी आगे जाने की कोशिश करेगा.
‘अहमदाबाद 2030' दुनिया को कर देगा हैरान!
अहमदाबाद 2030 सिर्फ कॉमनवेल्थ गेम्स का स्लोगन या नारा नहीं, ये भारत के खेलों की ताक़त का असली टेस्ट भी होगा. भारत की नज़र 2036 ओलिंपिक्स की मेज़बानी जीतने पर है, इसलिए इसे भारत के ओलंपिक-ऑडिशन के तौर पर भी देखा जा रहा है.
ग्लासगो से अहमदाबाद तक कैसे ट्रांसफ़र हुआ फ्लैग?
कॉमनवेल्थ गेम्स का ध्वज सोमवार सुबह ग्लासगो के OVO Hydro एरेना में सुपरस्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा और IOA अध्यक्ष पी.टी. उषा के हाथों होता हुआ मेज़बान सिटी के मुखिया और गुजरात के उप-मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के हाथों तक पहुंच गया.
ग्लासगो का समापन समारोह हर गेम्स की रस्म भर नहीं था. भारतीय प्रस्तुति के होते ही स्टेडियम रंग और आतिशबाज़ी से झूम उठा. ‘शिव तांडव' और ‘वंदे मातरम' से लेकर ‘सुनो ग़ौर से दुनियावालों….सबसे आगे होंगे हिन्दुस्तानी' जैसे बॉलीवुड के गानों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया.
टीम इंडिया के ‘वसुधैव कुटुंबकम' के उद्घोष के साथ समापन समारोह में अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की. अगले चार साल का रोडमैप तय हो गया. कॉमनवेल्थ फ़्लैग का ग्लासगो टू अहमदाबाद- ट्रांसफ़र पाश्चात्य चकाचौंध से दुनिया के आध्यात्मिक केंद्र तक खेलों की दुनिया के एक परिवार में बंधने का संकेत है- ‘वसुधैव कुटुम्बकम'.
CWG का 100वां साल होगा सबसे स्पेशल!
अहमदाबाद (अमदावाद 2030) में कॉमनवेल्थ गेम्स के 100 साल पूरे हो जाएंगे और 100वें साल में CWG के खेलों का स्तर ऐसा होगा जैसा दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा होगा. टीम इंडिया की प्रस्तुति में कहा गया, ‘जब दुनिया आएगी, अहमदाबाद सिर्फ उसका स्वागत नहीं करेगा, अहमदाबाद दुनिया को अपना लेगा.'
हैमिल्टन, कनाडा के बाद 2030 में अहमदाबाद 2030 में खेलों की सूरत बिल्कुल बदल जाएगी. 1930 हैमिल्टन में सिर्फ़ 11 देशों के 400 एथलीटों ने हिस्सा लिया था. 100 साल बाद अहमदाबाद में 74 देशों के 4000 से ज़्यादा एथलीट 15 से ज़्यादा खेलों में हिस्सा ले सकते हैं.
अहमदाबाद देगा बीजिंग-लंडन-लॉस एंजेल्स को टक्कर
टीम इंडिया की योजना ऐसे भव्य आयोजन की है जो बीजिंग-लंदन और लॉस एंजेल्स ओलिंपिक्स की मेज़बानी को टक्कर दे सके. टीम इंडिया के लिए ‘अहमदाबाद 2030' स्पोर्टिंग पावर के ज़रिये, अपनी डिजिटल, तकनीक और तेज़ी सी बढ़ती आर्थिक क्षमता का नमूना पेश करने का भी शानदार मौक़ा होगा.
ग्लासगो गेम्स 10 खेलों के 215 गोल्ड मेडल्स की होड़ तक सीमित रहे. इन गेम्स में पहले से मौजूद वेन्यु का ही इस्तेमाल किया गया. ना गेम्स विलेज बनाया गया और ना ही कोई नई सिटी. वीज़ा में भी कोई रियायत नहीं थी. ये गेम्स शानदार नहीं कहे जा सकते, व्यावहारिक ज़रूर थे.
अहमदाबाद 2030 अपनी भव्यता के लिए जाना जाएगा. इन गेम्स में लापरवाही से खर्च करके नहीं बल्कि एक आदर्श स्थापित कर अहमादाबाद को मेज़बानी का रोल मॉडल बनाने की कोशिश होगी. इन खेलों की विरासत तैयार करने की कोशिश है.
क्रिकेट, हॉकी, योग, कबड्डी, खो-खो से मिलेंगे मेडल
अहमदाबाद 2030 में शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन क्रिकेट और हॉकी से लेकर कई पारंपरिक खेल, जैसे कबड्डी, खो-खो और मल्लखंब के भी शामिल किये जाने पर चर्चा है. 24वें CWG में भारत 15-18 उन खेलों को शामिल कर सकता है जिसके ज़रिये इन खेलों की लोकप्रियता दुनिया में बढ़ाई जा सकती है. इन गेम्स में ज़ाहिर तौर पर भारत को मेडल्स की भी उम्मीदें रहेंगी.
ग्लासगो में कुश्ती, शूटिंग, बैडमिंटन, हॉकी और क्रिकेट जैसे खेलों की कटौती की गई. मगर भारतीय बॉक्सर्स, जूडो, पैरा एथलीट, वेटलिफ़्टिंग और एथलेटिक्स के खिलाड़ियों ने टीम इंडिया का मनोबल नहीं गिरने दिया. भारत 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा, जिसमें 13 स्वर्ण शामिल हैं.
2030 में भारत कैसे ऑस्ट्रेलिया को दे सकता है टक्कर?
कई एक्सपर्ट्स बेशक ऑस्ट्रेलिया को टक्कर की बात को से इंकार कर सकते हैं लेकिन बतौर मेज़बान भारत क्रिकेट, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, योग और मल्लखंब जैसे खेलों के ज़रिये पदक तालिका में अपनी स्थिति मज़बूत कर सकता है. 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत पदक तालिका में दूसरे नंबर पर रहा था, ऑस्ट्रेलिया के ठीक पीछे. 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने 78 गोल्ड जीते थे, भारत के 38 गोल्ड से ठीक दोगुने. भारत (38 गोल्ड), इंग्लैंड (37 गोल्ड) और कनाडा जैसे देशों को 2010 में पीछे छोड़ने में कामयाब रहा था.
भारत एक बार फिर घरेलू मैदान और पारंपरिक खेलों का फ़ायदा उठाते हुए दूसरे नंबर पर बिल्कुल जा सकता है. 2010 के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है. 2030 में ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़ना बेशक बड़ी चुनौती होगी, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो भारतीय खेलों में क्रान्ति आ सकती है.
जब ऑस्ट्रेलिया ने जीता 0 गोल्ड मेडल
खुद ऑस्ट्रेलिया ने 1976 के मॉन्ट्रियल ओलिंपिक्स में 0 गोल्ड मेडल जीते. 1976 के मॉन्ट्रियल ओलिंपिक्स में ऑस्ट्रेलिया ने 1 रजत के साथ कुल 5 पदक जीते. इसे ऑस्ट्रेलिया के खेलों का काला साल माना गय़ा. पेरिस ओलिंपिक्स 2024 में ऑस्ट्रेलिया ने 18 गोल्ड जीते और वो चौथे नंबर पर रहा. भारत आज उससे कहीं बेहतर हालत में है और अहमदाबाद में वो हनुमान-कूद लगाकर खेलों की दुनिया में अपना रुतबा बढ़ा सकता है.
ग्लासगो CWG 2026 की भारतीय हैरतअंगेज़ कहानियां
ग्लासगो कई मायनों में भारतीय खेलों का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. एक से बढ़कर एक कामयाबी की कहानियां लिखी गईं. भारतीय बॉक्सर्स ने जो ग्लासगो में कर दिखाया वो 96 साल के इतिहास में किसी देश की बॉक्सिंग टीम नहीं कर सकी थी- 10 पदक, 7 गोल्ड, 3 सिल्वर, जूडो में अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने पहली बार इन गेम्स के 36 साल के इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने के कारनामे किये.
एथलेटिक्स में महाराष्ट्र के 28 साल के अतरौलि, उत्तर प्रदेश के नाइब सूबेदार गुलवीर सिंह ने 10,000 मीटर और 5,000 मीटर में डबल मेडल जीतकर इन खेलों को यादगार बना दिया.
तेजस्विन शंकर ने डेकाथलन में कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पहला पदक जीतकर इतिहास कायम कर दिया. दिल्ली के 27 साल के तेजस्विन पिछली बार बर्मिंघम में हाईजंप में ब्रॉन्ज़ जीतकर इतिहास बनाया था. तो इस बार वही कारनामा उन्होंने 10 खेलों के डेकॉथलन में किया. बड़ी बात ये है कि घुटनों की चोट के बावजूद वो 7976 प्वाइंट हासिल कर ब्रॉन्ज़ जीतने में कामयाब रहे.
पोडियम पर एक साथ 2-2 भारतीय- टीम इंडिया का दबदबा
कई गेम्स ऐसे रहे जहां पोडियम पर एक साथ 2-2 भारतीय दिखे. जैवलिन में नीरज चोपड़ा- यशवीर सिंह, ट्रिपल जंप में प्रवीण चित्रावेल- सेल्वा प्रभु तिरुमारन, महिला पैरा शॉटपुट में शर्मिला धनखड़ और शिल्पा शायला, पुरुष पैरा शॉटपुट में सोमन राणा-शुभम जुयाल और पैरा 100 मीटर में दिलीप गावित और मोहम्माद बासिल. इन जोड़ियों ने साबित किया कि भारत एक साथ कई गेम्स में अपना दबदबा साबित कर सकता है.
अहमदाबाद कर रहा है तैयारी
हालांकि दिल्ली 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स शानदार साबित हुए. दुनिया भर में आज भी दिल्ली 2010 की सराहना होती है. लेकन कई वजहों से मीडिया की नज़रें तब इनपर इनायत नहीं हो सकीं. अहमदाबाद दिल्ली 2010 की ग़लतियां नहीं दुहराएगा, इसकी पूरी उम्मीद की जा रही है. अहमदाबाद में वक्त से पहले ज़ोरों से तैयरियां चल रही हैं. 2010 में मीडिया से हुई की गड़बड़ियों का भी ख़्याल रखा जा रहा है.
गुजरात ने अपने ताजा बजट में खेलों की तैयारी के लिए ₹1,278 करोड़ पहले ही तय कर दिए हैं. सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव को केंद्र बनाकर मेट्रो का विस्तार, हवाई अड्डा कनेक्टिविटी और सड़कों को दुरुस्त किया जा रहा है.
इस बात का भी ख़्याल रखा जा है कि इन खेलों की विरासत मज़बूत रहे और उसके फ़ायदे आगे भी मिलते रहें. इन खेलों की कामयाब मेज़बानी भारत के लिए 2036 की मेज़बानी का टिकट साबित हो सकता है.
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