2002-2003 मुंबई बम धमाकों का दोषी मुज्जमिल अख्तर अंसारी (फाइल फोटो)
मुंबई:
धमाकों के दोषी को एक झटके में मौत देना पीड़ितों के प्रति नाइंसाफी होगी, उसे ताउम्र कैद में रख बम धमाकों के पीड़ितों के दर्द का एहसास दिलाना ही सही न्याय होगा। ये बात किसी और ने नहीं मुंबई 2002-2003 बम धमाकों की सुनवाई कर रहे पोटा जज पी आर देशमुख ने कही।
इसलिए उन्होंने बम धमाकों के प्लांटर, पोटा सहित धारा 302 और रेल कानून के तहत मौत की सजा के हकदार एक मात्र दोषी मुज्जमिल अख्तर अंसारी को फांसी की सजा ना देकर आजीवन कारावास की सजा दी। मुज्जमिल के वकील शरीफ शेख के मुताबिक ये मामला रेयरेस्ट ऑफ द रेयर की कैटेगरी में नहीं आने और वो मामले में सिर्फ एक मोहरा होने की वजह से अदालत ने उसे राहत दी है।
अदालत ने मुज़म्मिल के अलावा फरहान अब्दुल मलिक खोत और डॉक्टर वाहिद जब्बार अंसारी को भी उम्रकैद की सज़ा सुनाई। लेकिन पडघा के साकिब अब्दुल हमीद नाचन सहित आतिफ नासिर मुल्ला, हसीब जुबेर मुल्ला और गुलाम अकबर खोतल को भी 10-10 साल की सजा। तो सिर्फ हथियार रखने के मामले में दोषी मोहम्मद कमील जमील शेख, नूर मोहम्मद अंसारी और अनवर अली जावेद अली को सिर्फ 2-2 साल की सजा सुनाई।
फैसला 13 साल बाद आया है इसलिए 2 साल की सजा पाए दोषी उससे ज्यादा सजा काट चुके हैं और कुछ की सज़ा पूरी होने वाली है। बावजूद इसके बचाव पक्ष के वकील अब्दूल वहाब खान ने फैसले को चुनौती देने की बात कही। मुंबई सेंट्रल, विलेपार्ले और मुलुंड में हुए बम धमाकों में 11 लोगों की मौत हुई थी और 100 के करीब जख्मी हुये थे। मामले मे कुल 13 आरोपियों पर मुकदमा चला और 10 दोषी पाए गए, साल 2005 के बाद रद्द कर दिये गये पोटा कानून के तहत दर्ज देश में ये आखिरी मुकदमा बाताया जा रहा है।
इसलिए उन्होंने बम धमाकों के प्लांटर, पोटा सहित धारा 302 और रेल कानून के तहत मौत की सजा के हकदार एक मात्र दोषी मुज्जमिल अख्तर अंसारी को फांसी की सजा ना देकर आजीवन कारावास की सजा दी। मुज्जमिल के वकील शरीफ शेख के मुताबिक ये मामला रेयरेस्ट ऑफ द रेयर की कैटेगरी में नहीं आने और वो मामले में सिर्फ एक मोहरा होने की वजह से अदालत ने उसे राहत दी है।
अदालत ने मुज़म्मिल के अलावा फरहान अब्दुल मलिक खोत और डॉक्टर वाहिद जब्बार अंसारी को भी उम्रकैद की सज़ा सुनाई। लेकिन पडघा के साकिब अब्दुल हमीद नाचन सहित आतिफ नासिर मुल्ला, हसीब जुबेर मुल्ला और गुलाम अकबर खोतल को भी 10-10 साल की सजा। तो सिर्फ हथियार रखने के मामले में दोषी मोहम्मद कमील जमील शेख, नूर मोहम्मद अंसारी और अनवर अली जावेद अली को सिर्फ 2-2 साल की सजा सुनाई।
फैसला 13 साल बाद आया है इसलिए 2 साल की सजा पाए दोषी उससे ज्यादा सजा काट चुके हैं और कुछ की सज़ा पूरी होने वाली है। बावजूद इसके बचाव पक्ष के वकील अब्दूल वहाब खान ने फैसले को चुनौती देने की बात कही। मुंबई सेंट्रल, विलेपार्ले और मुलुंड में हुए बम धमाकों में 11 लोगों की मौत हुई थी और 100 के करीब जख्मी हुये थे। मामले मे कुल 13 आरोपियों पर मुकदमा चला और 10 दोषी पाए गए, साल 2005 के बाद रद्द कर दिये गये पोटा कानून के तहत दर्ज देश में ये आखिरी मुकदमा बाताया जा रहा है।
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