मुंबई महानगरपालिका भवन.
मुंबई:
चुनाव से पहले मुंबई महानगर पालिका में प्रोजेक्ट मंजूर कराने की होड़ चल पड़ी है. यहां पिछले तीन हफ्तों में तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के ठेके मंजूर कराए गए हैं. बीएमसी में ऐसी तेजी पहले कभी नहीं दिखी.
शिवसेना के कब्जे की इस महानगर पालिका का चुनाव मुहाने पर आ चुका है. किसी भी वक्त आचार संहिता का ऐलान हो सकता है. ऐसे में प्रशासन और पार्षदों ने हाल ही में तीन हजार करोड़ के ठेके चुटकियों में मंजूर कराए हैं. इनमें सड़कों के पुनर्निर्माण के ठेके सबसे अधिक हैं. ठेके बांटने के लिए राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी सबने ओवरटाइम भी किया. तय टाइम टेबल से ज्यादा चार बैठकें की गई. आखिरी बैठक में 115 ठेके दिए गए. यह संख्या पिछले पांच साल में सर्वाधिक है.
ठेके बांटने की दौड़ में कमाल तो नामंजूर ठेकों को लेकर हुआ. बीएमसी कमिश्नर के खुलासे के बाद नेताओं का मन बदला और खुद नामंजूर किए करीब 80 करोड़ रुपये के ठेके बांट दिए. इस काम को सर्वदलीय सहमति तो मिलनी ही थी. लेकिन जवाब पूछे जाने पर राजनेता मामले के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.
बीएमसी में शिवसेना की नेता तृष्णा विश्वासराव ने कहा है कि इतने सारे ठेके बांटने का काम आखिरी मीटिंग तक रुके रहने के लिए प्रशासन जिम्मेदार है. उन्होंने इतने प्रस्ताव अपने पास महीनों से रोककर रखे थे.
जबकि एमएनएस प्रवक्ता संदीप देशपांडे का दावा है कि प्रशासन की मिलीभगत से शिवसेना-बीजेपी अपने-अपने टेंडरों को मंजूरी देने में लगे हैं.
करीब 35 हजार करोड़ रुपये के बजट वाली बीएमसी के चुनाव के लिए बस महीने भर का समय बचा है. और यह संभावना सर्वाधिक है कि आने वाले सोमवार को बीएमसी समेत राज्य की अन्य दर्जन भर महानगर पालिकाओं के लिए चुनाव का ऐलान हो.
शिवसेना के कब्जे की इस महानगर पालिका का चुनाव मुहाने पर आ चुका है. किसी भी वक्त आचार संहिता का ऐलान हो सकता है. ऐसे में प्रशासन और पार्षदों ने हाल ही में तीन हजार करोड़ के ठेके चुटकियों में मंजूर कराए हैं. इनमें सड़कों के पुनर्निर्माण के ठेके सबसे अधिक हैं. ठेके बांटने के लिए राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी सबने ओवरटाइम भी किया. तय टाइम टेबल से ज्यादा चार बैठकें की गई. आखिरी बैठक में 115 ठेके दिए गए. यह संख्या पिछले पांच साल में सर्वाधिक है.
ठेके बांटने की दौड़ में कमाल तो नामंजूर ठेकों को लेकर हुआ. बीएमसी कमिश्नर के खुलासे के बाद नेताओं का मन बदला और खुद नामंजूर किए करीब 80 करोड़ रुपये के ठेके बांट दिए. इस काम को सर्वदलीय सहमति तो मिलनी ही थी. लेकिन जवाब पूछे जाने पर राजनेता मामले के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.
बीएमसी में शिवसेना की नेता तृष्णा विश्वासराव ने कहा है कि इतने सारे ठेके बांटने का काम आखिरी मीटिंग तक रुके रहने के लिए प्रशासन जिम्मेदार है. उन्होंने इतने प्रस्ताव अपने पास महीनों से रोककर रखे थे.
जबकि एमएनएस प्रवक्ता संदीप देशपांडे का दावा है कि प्रशासन की मिलीभगत से शिवसेना-बीजेपी अपने-अपने टेंडरों को मंजूरी देने में लगे हैं.
करीब 35 हजार करोड़ रुपये के बजट वाली बीएमसी के चुनाव के लिए बस महीने भर का समय बचा है. और यह संभावना सर्वाधिक है कि आने वाले सोमवार को बीएमसी समेत राज्य की अन्य दर्जन भर महानगर पालिकाओं के लिए चुनाव का ऐलान हो.