मुंबई में ताड़ी में मिलावट होने के कारण सरकार ने इसकी 250 दुकानें बंद करने का फैसला लिया है.
- ‘क्लोरल हाइड्रेट’ और ‘अल्प्राजोलम’ दवाइयों की मिलावट
- 250 दुकानों को स्थाई रूप से बंद करने का फैसला
- मुंबई में ताड़ी का एक भी पेड़ नहीं लेकिन दुकानें सैकड़ों
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मुंबई:
महाराष्ट्र आबकारी विभाग ने शहर में ‘क्लोरल हाइड्रेट’ और ‘अल्प्राजोलम’ दवाइयों की मिलावट वाली ताड़ी बेचने वाली 250 दुकानों को स्थाई रूप से बंद करने का फैसला किया है.
आबकारी मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने स्वास्थ्य खतरों के मद्देनजर सिर्फ उत्पादन स्थल पर ही ताड़ी बेचने की इजाजत देने का फैसला किया है. क्लोरल हाइड्रेट का इस्तेमाल नींद नहीं आने से जुड़ी समस्याओं के इलाज में किया जाता है. इसके दुष्प्रभावों में लिवर या किडनी को नुकसान पहुंचना, हृदय से जुड़ी समस्याएं और पेट में जलन होना शामिल है. वहीं, अल्प्राजोलम का इस्तेमाल डर और बेचैनी जैसी समस्याओं के इलाज में किया जाता है.
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ताड़ी उत्पादन वाले पेड़ों के पास ही इन्हें बेचने की इजाजत दी जाएगी. उन्होंने बताया कि पेड़ से उतारी गई ताड़ी सूर्योदय के बाद धीरे-धीरे नुकसानदेह होने लगती है. अधिकारी ने बताया कि राज्य आबकारी विभाग के एक सर्वेक्षण के मुताबिक मुंबई में बेची जाने वाली ताड़ी में क्लोरल हाइड्रेट और अल्पाजोलम पाई गई.
मुंबई, पुणे, सोलापुर और नांदेड़ शहरों में ताड़ी की दुकानों में विभाग ने छापा मारा जिसमें यह पाया गया कि इनमें यह दवाइयां मिली हुई हैं. अधिकारी ने खुलासा किसा कि मुंबई में ताड़ी का एक भी पेड़ नहीं होने के बावजूद शहर में इसकी करीब 250 दुकानें हैं.
इस बीच, राज्य आबकारी विभाग ने महाराष्ट्र में ताड़ी के पेड़ों की गिनती शुरू कर दी. अभी आबकारी विभाग ने राज्य के अन्य क्षेत्रों से मंगाई गई ताड़ी मुंबई में बेचने की इजाजत दी है. अधिकारी ने बताया कि सरकार को राज्य में ताड़ी की बिक्री से करीब 45 करोड़ रुपये का राजस्व आता है.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
आबकारी मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने स्वास्थ्य खतरों के मद्देनजर सिर्फ उत्पादन स्थल पर ही ताड़ी बेचने की इजाजत देने का फैसला किया है. क्लोरल हाइड्रेट का इस्तेमाल नींद नहीं आने से जुड़ी समस्याओं के इलाज में किया जाता है. इसके दुष्प्रभावों में लिवर या किडनी को नुकसान पहुंचना, हृदय से जुड़ी समस्याएं और पेट में जलन होना शामिल है. वहीं, अल्प्राजोलम का इस्तेमाल डर और बेचैनी जैसी समस्याओं के इलाज में किया जाता है.
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ताड़ी उत्पादन वाले पेड़ों के पास ही इन्हें बेचने की इजाजत दी जाएगी. उन्होंने बताया कि पेड़ से उतारी गई ताड़ी सूर्योदय के बाद धीरे-धीरे नुकसानदेह होने लगती है. अधिकारी ने बताया कि राज्य आबकारी विभाग के एक सर्वेक्षण के मुताबिक मुंबई में बेची जाने वाली ताड़ी में क्लोरल हाइड्रेट और अल्पाजोलम पाई गई.
मुंबई, पुणे, सोलापुर और नांदेड़ शहरों में ताड़ी की दुकानों में विभाग ने छापा मारा जिसमें यह पाया गया कि इनमें यह दवाइयां मिली हुई हैं. अधिकारी ने खुलासा किसा कि मुंबई में ताड़ी का एक भी पेड़ नहीं होने के बावजूद शहर में इसकी करीब 250 दुकानें हैं.
इस बीच, राज्य आबकारी विभाग ने महाराष्ट्र में ताड़ी के पेड़ों की गिनती शुरू कर दी. अभी आबकारी विभाग ने राज्य के अन्य क्षेत्रों से मंगाई गई ताड़ी मुंबई में बेचने की इजाजत दी है. अधिकारी ने बताया कि सरकार को राज्य में ताड़ी की बिक्री से करीब 45 करोड़ रुपये का राजस्व आता है.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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