मुंबई:
शहर के प्रसिद्ध एल एच हीरानंदानी अस्पताल में कथित किडनी रैकेट के मामले में मुंबई पुलिस इस मामले में गिरफ्तार किए गए अस्पताल के सीईओ और चार डॉक्टरों के एजेंटों एवं किडनी दान करने वालों के बीच पैसों के लेन-देन से जुड़े आरोपों की सभी पहलुओं पर जांच कर रही है. एक स्थानीय अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान यह बात बताई गई.
इस बीच अदालत ने पांचों लोगों को शनिवार तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है. अस्पताल के सीईओ सुजीत चटर्जी, चिकित्सा निदेशक अनुराग नाइक, मुकेश शेट्टी, मुकेश शाहा और प्रकाश शेट्टी को राज्य स्वास्थ्य सेवा विभाग के निदेशक की रिपोर्ट के आधार पर मानव अंग प्रतिरोपण अधिनियम के तहत मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया. निदेशक ने अपनी रिपोर्ट में उनका नाम लिया है.
पुलिस ने अंधेरी में स्थानीय मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अश्विनी लोखंडे की अदालत को बताया कि गिरफ्तार किए गए डॉक्टर शहर के कई दूसरे अस्पतालों से भी जुड़े हुए थे और वे इस बात की जांच करना चाहते हैं कि क्या यह रैकेट दूसरे अस्पतालों में भी तो नहीं चल रहा था.
पुलिस इस बात की भी पड़ताल करना चाहती है कि कथित रैकेट में शामिल डॉक्टरों, एजेंटों और डोनरों के बीच क्या पैसों की भी लेन-देन हुई है या नहीं. पुलिस डॉक्टरों और रैकेट में शामिल होने के आरोप में पहले गिरफ्तार किए गए लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का भी अध्ययन कर रही है.
पुलिस प्रवक्ता डीसीपी अशोक दुधे ने कहा, '(राज्य स्वास्थ्य सेवा के निदेशक की) रिपोर्ट पढ़ने के बाद हमने उन्हें गिरफ्तार किया. उन पर डॉक्टरों पर दस्तावेजों की जांच न करके लापरवाही करने और किडनी ट्रांसप्लांट संबंधी प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने का आरोप है.'
हालांकि, बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत को बताया कि दस्तावेजों की जांच करना डॉक्टरों का काम नहीं है. उन्होंने यह भी तर्क दिया, एक पृथक आचार समिति ट्रांसप्लांटों को मंजूरी देने से पहले दस्तावेजों को परखती है.
इस रैकेट का पता तब चला, जब पुलिस को सूचना मिली कि पवई स्थित हीरानंदानी अस्पताल में 14 जुलाई को एक किडनी का ऑपरेशन होना था, जहां किडनी देने वाले और प्राप्त करने वाले आपस में संबंधी नहीं थे. इसके बाद किडनी दान करने वाले, प्राप्तकर्ता एवं एजेंटों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था.
पुलिस को यह पता लगा कि किडनी देने वाली महिला और किडनी प्राप्त करने वाले बृजकिशोर जायसवाल द्वारा जमा कराए गए दस्तावेजों के उलट महिला जायसवाल की असली पत्नी नहीं थी, जिसके बाद जायसवाल का ऑपरेशन अंतिम क्षण में रोक दिया गया था.
पुलिस के अनुसार महिला ने खुद को जायसवाल की पत्नी केवल इसलिए बताया था ताकि वह धन प्राप्त करने के लिए उसे अपनी किडनी दे सके. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या किसी अन्य ने भी इस प्रकार का धोखा देकर किडनी प्राप्त की है और क्या अस्पताल प्राधिकारी भी इसमें शामिल हैं या नहीं.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
इस बीच अदालत ने पांचों लोगों को शनिवार तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है. अस्पताल के सीईओ सुजीत चटर्जी, चिकित्सा निदेशक अनुराग नाइक, मुकेश शेट्टी, मुकेश शाहा और प्रकाश शेट्टी को राज्य स्वास्थ्य सेवा विभाग के निदेशक की रिपोर्ट के आधार पर मानव अंग प्रतिरोपण अधिनियम के तहत मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया. निदेशक ने अपनी रिपोर्ट में उनका नाम लिया है.
पुलिस ने अंधेरी में स्थानीय मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अश्विनी लोखंडे की अदालत को बताया कि गिरफ्तार किए गए डॉक्टर शहर के कई दूसरे अस्पतालों से भी जुड़े हुए थे और वे इस बात की जांच करना चाहते हैं कि क्या यह रैकेट दूसरे अस्पतालों में भी तो नहीं चल रहा था.
पुलिस इस बात की भी पड़ताल करना चाहती है कि कथित रैकेट में शामिल डॉक्टरों, एजेंटों और डोनरों के बीच क्या पैसों की भी लेन-देन हुई है या नहीं. पुलिस डॉक्टरों और रैकेट में शामिल होने के आरोप में पहले गिरफ्तार किए गए लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का भी अध्ययन कर रही है.
पुलिस प्रवक्ता डीसीपी अशोक दुधे ने कहा, '(राज्य स्वास्थ्य सेवा के निदेशक की) रिपोर्ट पढ़ने के बाद हमने उन्हें गिरफ्तार किया. उन पर डॉक्टरों पर दस्तावेजों की जांच न करके लापरवाही करने और किडनी ट्रांसप्लांट संबंधी प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने का आरोप है.'
हालांकि, बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत को बताया कि दस्तावेजों की जांच करना डॉक्टरों का काम नहीं है. उन्होंने यह भी तर्क दिया, एक पृथक आचार समिति ट्रांसप्लांटों को मंजूरी देने से पहले दस्तावेजों को परखती है.
इस रैकेट का पता तब चला, जब पुलिस को सूचना मिली कि पवई स्थित हीरानंदानी अस्पताल में 14 जुलाई को एक किडनी का ऑपरेशन होना था, जहां किडनी देने वाले और प्राप्त करने वाले आपस में संबंधी नहीं थे. इसके बाद किडनी दान करने वाले, प्राप्तकर्ता एवं एजेंटों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था.
पुलिस को यह पता लगा कि किडनी देने वाली महिला और किडनी प्राप्त करने वाले बृजकिशोर जायसवाल द्वारा जमा कराए गए दस्तावेजों के उलट महिला जायसवाल की असली पत्नी नहीं थी, जिसके बाद जायसवाल का ऑपरेशन अंतिम क्षण में रोक दिया गया था.
पुलिस के अनुसार महिला ने खुद को जायसवाल की पत्नी केवल इसलिए बताया था ताकि वह धन प्राप्त करने के लिए उसे अपनी किडनी दे सके. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या किसी अन्य ने भी इस प्रकार का धोखा देकर किडनी प्राप्त की है और क्या अस्पताल प्राधिकारी भी इसमें शामिल हैं या नहीं.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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