- महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव का प्रचार अब समाप्ति की ओर हैं
- भाजपा और शिव सेना दोनों एक दूसरे के आमने-सामने थे
- शिवसेना ने अपनी इस पूर्व सहयोगी को पार्टी को 'कोबरा' करार दिया है
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मुंबई:
महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव का प्रचार अब समाप्ति की ओर हैं. इस बार के चुनाव में भाजपा और शिव सेना दोनों एक दूसरे के आमने-सामने थे. दोनों पार्टियों अब आए दिन एक दूसरे पर हमला करती रहती हैं. इसी क्रम में भाजपा पर हमले तेज करते हुए शिवसेना ने अपनी इस पूर्व सहयोगी को पार्टी को 'कोबरा' करार दिया है. शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा के बारे में कहा, "हमारा गठबंधन पिछले 25 साल से कोबरा के साथ था, जो कि अब अपना फन निकाल रहा है. मैं जानता हूं, इसे कैसे कुचला जाता है."
शिव सेना प्रमुख राज्य में 21 फरवरी को होने वाले निकाय चुनाव के लिए कल शाम एक रैली को संबोधित करते हुए ये बातें कह रहे थे. उन्होंने कहा कि सेना पुरानी गलती नहीं दोहराना चाहती थी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि इन्होंने झूठे वादे और आश्वासन देकर जनता के साथ धोखेबाजी की है.
चुनाव प्रचार के शुरआती दौर में उद्धव ने फडणवीस सरकार को ‘नोटिस पीरियड’ पर रखा था और भाजपा के साथ चुनाव के बाद किसी भी तरह के गठबंधन से इंकार कर दिया था. हालांकि राज्य में सरकार को अपनी पार्टी के समर्थन के मुद्दे पर उन्होंने थोड़ी नरमी बरतते हुए कहा कि पार्टी का समर्थन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह राज्य में परेशान किसानों के कर्ज माफी की मांग को पूरा करती है या नहीं.
बीजेपी को लेकर शिवसेना लगातार हमला करने के मूड में रहती है. अभी हाल में एनडीटीवी से एक साक्षात्कार में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मध्यावधि चुनाव के लिए लोगों को तैयार रहने को कहा था. उन्होंने कहा था कि हम बीएमसी चुनाव के बाद समर्थन वापसी पर विचार करेंगे. बीएमसी पर पिछले 20 वर्षों से शिवसेना का राज है. बीएमसी का चुनाव 21 फरवरी को होना है.
शिव सेना प्रमुख राज्य में 21 फरवरी को होने वाले निकाय चुनाव के लिए कल शाम एक रैली को संबोधित करते हुए ये बातें कह रहे थे. उन्होंने कहा कि सेना पुरानी गलती नहीं दोहराना चाहती थी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि इन्होंने झूठे वादे और आश्वासन देकर जनता के साथ धोखेबाजी की है.
चुनाव प्रचार के शुरआती दौर में उद्धव ने फडणवीस सरकार को ‘नोटिस पीरियड’ पर रखा था और भाजपा के साथ चुनाव के बाद किसी भी तरह के गठबंधन से इंकार कर दिया था. हालांकि राज्य में सरकार को अपनी पार्टी के समर्थन के मुद्दे पर उन्होंने थोड़ी नरमी बरतते हुए कहा कि पार्टी का समर्थन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह राज्य में परेशान किसानों के कर्ज माफी की मांग को पूरा करती है या नहीं.
बीजेपी को लेकर शिवसेना लगातार हमला करने के मूड में रहती है. अभी हाल में एनडीटीवी से एक साक्षात्कार में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मध्यावधि चुनाव के लिए लोगों को तैयार रहने को कहा था. उन्होंने कहा था कि हम बीएमसी चुनाव के बाद समर्थन वापसी पर विचार करेंगे. बीएमसी पर पिछले 20 वर्षों से शिवसेना का राज है. बीएमसी का चुनाव 21 फरवरी को होना है.
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