सांसद प्रज्ञा सिंह के विरोध के बाद MP सरकार ने सांडों के बधियाकरण का आदेश लिया वापस

मध्‍य प्रदेश सरकार का यह आदेश बीजेपी-कांग्रेस सबको बुरा लगा, खासतौर पर भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जो इस आदेश पर भी परोक्ष रूप से धर्म को ले आईं. 

सांसद प्रज्ञा सिंह के विरोध के बाद MP सरकार ने सांडों के बधियाकरण का आदेश लिया वापस

विरोध के बाद मध्यप्रदेश सरकार को सांडों के बधियाकरण का आदेश वापस लेना पड़ा है

भोपाल :

Madhya Pradesh: मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने सांडों के बधियाकरण का आदेश निकाला लेकिन भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर (Pragya Singh Thakur) के विरोध के बाद आदेश वापस ले लिया. सरकार ने पहले कहा था जो सांड अनुपयोगी हैं यानी सामान्य समझ में प्रजनन क्षमता नहीं है वो अनुपयोगी हैं, ऐसे में सवाल है जब वो प्रजनन क्षमता खो चुका है तो फिर उसके बधियाकरण करने की आवश्यकता क्या है, लेकिन दूसरी तरफ जब विशेषज्ञों की बात मानें तो लगता है ये जरूरी है खासकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए. करीब 12 करोड़ खर्च कर, लगभग 12 लाख सांडों के बधियाकरण का ये आदेश निकला था, लेकिन ये आदेश बीजेपी-कांग्रेस सबको बुरा लगा, खासतौर पर भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जो इस आदेश पर भी परोक्ष रूप से धर्म को ले आईं. 

प्रज्ञा ठाकुर का कहना था, 'जनसंख्या कम करो, हिन्दुओं ने एक संतान पैदा करना शुरू कर दिया. उसके साथ मैंने कहा देसी गौवंश खत्म करना चाहते हो कौन अमृत देगा, अगर देसी गौवंश खत्म हो गया तो धरती खत्म हो जाएगी, वंश खत्म हो गया तो हम नहीं बचेंगे अगर ये काम सालों से भी हो रहा है तो भी गलत है.' वहीं कांग्रेस प्रवक्ता नरेन्द्र सलूजा का कहना था पशुपालन विभाग का आदेश निकला है कि मप्र में निकृष्ट सांडो का बधियाकरण होगा, अनुमानित राशि 12 करोड़ है, ये गौवंश विरोधी काम है ये बेतुका आदेश गोवंश विरोधी है.विरोध का असर ये हुआ कि 24 घंटों में आदेश वापस हो गया, हालांकि एनडीटीवी के हाथ जो लिस्ट लगी वो बताती है कि बधियाकरण साल दर साल होता आ रहा है.2017 में 10.16 लाख, 2018 में 11.04 लाख, 2019 में 7.61 लाख तो 2020 में 8.26 लाख सांडों का बधियाकरण हुआ.


जानकार कहते हैं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिये ये बेहद जरूरी भी है. एमपी लाइव स्टॉक एंड पोल्ट्री डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के कार्यकारी निदेशक डॉ के एस तोमर ने कहा  यदि उनका बधियाकरण नहीं करेंगे तो एक सांड 100 गायों को फलाता है, मतलब 100 गायों में ऐसे बछिया पैदा होगी जो आधा लीटर दूध देगी लेकिन बधियाकरण करेंगे तो ज्यादा दुग्ध उत्पादन होगा, रोजगार मिलेगा, ये अच्छी योजना है इससे गौवंश खत्म नहीं होगा.  राज्य में पशुधन गणना के मुताबिक 2.90 करोड़ पशुधन है, जिसमें 1.87 करोड़ गाय और 1.03 करोड़ भैंस हैं जो देश के कुल गौवंश का 9.73% है. जबकि दूध उत्पादन में यूपी, राजस्थान के बाद 1.71 करोड़ टन के साथ मध्यप्रदेश तीसरे नंबर पर है. जो देश में कुल दूध उत्पादन का 7% हिस्सा है. खेत की जुताई से लेकर बुआई तक का काम अब ट्रैक्टर और दूसरी मशीनों से हो रहा है। बैल की आवश्यकता सिमट कर रह गई है, ऐसे में कई दफे उन्हें लावारिस छोड़ दिया जाता है, गोशालाओं में भी सांडों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिये अच्छी नस्ल के सांडों को रखने को लेकर बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुधर सके. लेकिन कहते हैं सत्ता का नशा सौ सांड़ के बराबर होता है! अब वैज्ञानिक-तार्किक-अर्थव्यवस्था से जुड़ी बातों में अगर विशेषज्ञों की ना मानकर सियासी राय तो तवज्जो दी जाएगी तो ऐसी कहावत दमदार ही लगती है. सियासी भी मानना था तो उस गौ कैबिनेट की राय ही ले लेते जिसे बड़े धूम-धाम से बनाया गया था, एक और आश्चर्य ये कि ऐसे फैसलों का विरोध भी सर्वदलीय है.

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