मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले सामने आए फर्जी PMO आईडी मामले में जांच एजेंसियों को चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं. पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी रोहन पारिख ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से प्रधानमंत्री कार्यालय का नकली डिजिटल पहचान पत्र तैयार किया था. जांच में सामने आया है कि उसका मकसद किसी तरह का आतंकी या सुरक्षा खतरे को अंजाम देना नहीं, बल्कि अपनी मंगेतर और ससुराल वालों पर प्रभाव और 'रौब' जमाना था. इसी योजना के तहत उसने बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा में वीवीआईपी एंट्री का प्रयास किया. इस हाई-प्रोफाइल मामले ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए थे, लेकिन अब जो कहानी निकलकर सामने आई है, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है.
क्या था आरोपी का मकसद?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी रोहन पारिख की हाल ही में सगाई हुई थी और जल्द ही उसकी शादी होने वाली है. वह अपनी होने वाली पत्नी और ससुराल वालों के सामने खुद को एक बेहद प्रभावशाली व्यक्ति और केंद्र सरकार के उच्च अधिकारी के रूप में पेश करना चाहता था. उन्हें यह दिखाने के लिए कि उसकी पहुंच सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय तक है, उसने यह पूरी साजिश रची.
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AI तकनीक का किया इस्तेमाल
आरोपी ने इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया. रोहन ने साल 2025 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का उपयोग करके प्रधानमंत्री कार्यालय का एक हूबहू असली दिखने वाला डिजिटल पहचान पत्र तैयार किया था. पूछताछ में यह भी साफ हुआ है कि रोहन को कभी भी PMO से कोई आधिकारिक ईमेल, पत्र या दस्तावेज प्राप्त नहीं हुआ था. यह सब केवल उसके द्वारा रचा गया एक दिखावा था.
उसका प्लान था कि वह वहां वीवीआईपी एंट्री लेकर अपने ससुराल वालों को अपनी 'पावर' का एहसास दिला सके.
मामले में अब तक की पुलिस कार्रवाई
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की है. रोहन के इस फर्जीवाड़े में शामिल उसके सुरक्षा गार्ड और ड्राइवर दिलीप कुंदे को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. दिलीप पिछले छह महीने से रोहन के पास 90,000 रुपये प्रति माह के वेतन पर काम कर रहा था.
पुलिस रोहन और उसके साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और वीवीआईपी सुरक्षा में सेंधमारी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कड़ी पूछताछ कर रही है. सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी गहन जांच कर रही हैं कि कहीं इस फर्जीवाड़े के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मकसद तो नहीं था.
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