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This Article is From Nov 07, 2025

1800 करोड़ की जमीन 300 करोड़ में, महाराष्ट्र डिप्टी CM अजित पवार के बेटे पार्थ पर गंभीर आरोप, FIR दर्ज

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की कंपनी पर महाराष्ट्र में दो अलग-अलग जगहों पर करोड़ों की कीमती जमीन कम कीमत में खरीदने का आरोप लगा है. इस मामले में दो FIR भी दर्ज हुई है.

1800 करोड़ की जमीन 300 करोड़ में, महाराष्ट्र डिप्टी CM अजित पवार के बेटे पार्थ पर गंभीर आरोप, FIR दर्ज
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार बेटे पार्थ के साथ.
  • महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार के बेटे पार्थ की कंपनी पर पुणे में जमीन खरीद में गंभीर घोटाले के आरोप लगे.
  • पार्थ की कंपनी अमेडिया होल्डिंग्स LLP पर दलित समुदाय की जमीन और सरकारी डेयरी की हड़पने के मामले दर्ज हैं.
  • दो FIR पुणे में दर्ज हुई हैं, जिनमें पार्थ पवार का नाम अभी नहीं है लेकिन जांच में उनका नाम जुड़ सकता है.
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पुणे:

Parth Pawar Land Scam Pune: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी (AP) गुट के नेता अजित पवार के बेटे पर जमीन घोटाले का गंभीर आरोप लगा है. इससे महाराष्ट्र की सियासत में नया भूचाल मच गया है. अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की कंपनी पर महाराष्ट्र में दो अलग-अलग जगहों पर करोड़ों की कीमती जमीन कम कीमत में खरीदने का आरोप लगा है. इस मामले में दो FIR भी दर्ज हुई है. हालांकि अभी तक दर्ज हुई दोनों FIR में पार्थ पवार का नाम नहीं है. लेकिन पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच बढ़ने पर पार्थ पवार पर भी आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है.

दरअसल अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की कंपनी 'अमेडिया होल्डिंग्स एलएलपी' के खिलाफ जमीन घोटाले का एक और नया और चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है. अभी तक दो प्रमुख जमीन घोटाले सामने आए, जिनमें कई गंभीर वित्तीय अनियमितताएं शामिल हैं.

कहां-कहां की ज़मीन और कुल कितने घोटाले?

  1. पहला मामला (कोरेगांव पार्क/मुंढवा): यह जमीन महार वतन की बताई जा रही है, जिसका मूल्य ₹1800 करोड़ था, लेकिन इसे कथित तौर पर सिर्फ ₹300 करोड़ में खरीदा गया. इस सौदे में स्टैंप ड्यूटी में भी भारी छूट दी गई.
  2. दूसरा मामला (खड़क पुलिस स्टेशन क्षेत्र): यह मामला पुणे में शासकीय डेरी की जमीन को अवैध रूप से हड़पने से संबंधित है, जिसके खुलासे के पार्थ पवार की कंपनी “अमेडिया” कंपनी के खिलाफ खड़क पुलिस ने FIR दर्ज की है.
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कितनी FIR और किन-किन के खिलाफ?

फिलहाल कुल दो FIR दर्ज की गई हैं. एक FIR मुंढवा मामले में —कुल चार आरोपी बनाए गए हैं, इनमें पार्थ का नाम नहीं है लेकिन दिग्विजय पाटिल का नाम है जो पार्थ की कंपनी “अमेडिया” में 1% भागीदार हैं और सुनेत्रा पवार के भांजे हैं! बाक़ी तीन आरोपी हैं- शीतल तेजवानी और तहसीलदार सहित दो सरकारी अधिकारी.

दूसरी FIR शासकीय डेयरी जमीन हड़पने के मामले में पार्थ पवार की कंपनी “अमेडिया” कंपनी के खिलाफ दर्ज हुई है. इस FIR में कुल 6 आरोपी बनाये गए हैं, अमेडिया कंपनी, दिग्विजय पाटिल, शीतल तेजवानी, दो सरकारी अफ़सर, एक अन्य व्यक्ति (लाइज़निंग एजेंट)

अमेडिया कंपनी में 99 फीसदी की हिस्सेदारी पार्थ की

हालांकि, जांच के दौरान पार्थ पवार पर भी मामला दर्ज होने की प्रबल संभावना है, क्योंकि वह अमेडिया कंपनी में 99% की मुख्य भागीदार हैं. जमीन खरीद घोटाला मामले में नए और बड़े विवरण सामने आए हैं. पार्थ पवार की कंपनी पर महार वतन भूमि यानी दलित समुदाय की ज़मीन और शासकीय डेरी की जमीन अवैध रूप से हड़पने का सीधा आरोप है.

जिससे जमीन खरीदी, उसका पति पहले से बैंक घोटाले में फंसा है

₹1800 करोड़ की जमीन सिर्फ ₹300 करोड़ में खरीदने और स्टैंप ड्यूटी में भारी छूट लेने का आरोप लगा है. पार्थ पवार ने जिस शीतल तेजवानी से जमीन खरीदी, वह पहले से ही सेवा विकास सहकारी बैंक घोटाले में फंसे अपने पति सागर सूर्यवंशी के साथ जुड़ी हुई है और उस पर 100 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज़ हैं, जिससे यह पूरा सौदा संदिग्ध हो गया है.

पुणे में दलित समुदाय का विरोध-प्रदर्शन

आज इसको लेकर पुणे में दलित समुदाय ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि अजित पवार का दल शाहू फुले अंबेडकर का नाम लेता है, लेकिन दलितों की जमीन हड़पता है. फिलहाल निलंबित तहसीलदार गायब हैं, तहसीलदार कार्यालय सील कर दिया गया है, और सूत्रों के हवाले से खबर है कि जांच आगे बढ़ने पर पार्थ पवार पर भी आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है.

अन्ना हजारे ने भी साधा निशाना साधा

राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पुत्र पार्थ पवार पर पुणे में जमीन से संबंधित गड़बड़ी करने का आरोप लगाया गया है. इस पर बिना नाम लिए वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अगर किसी मंत्री का बेटा इस तरह का व्यवहार करता है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है.

अन्ना हजारे ने आगे कहा कि इसमें असली दोष मंत्री का ही है, क्योंकि संस्कार सबसे महत्वपूर्ण होते हैं — पहले परिवार से लेकर पूरे समाज तक के संस्कार मायने रखते हैं. मानव जीवन सिर्फ खाने-पीने और ऐशोआराम के लिए नहीं होता. ऐसे मामलों में कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन अगर कार्रवाई नहीं हो पाती, तो सरकार को ऐसी व्यक्तियों पर कठोर नीति अपनाकर सख्त कदम उठाने चाहिए.

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