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208वां 'शौर्य दिवस'! पुणे के कोरेगांव भीमा में जश्न, रात 12 बजे आतिशबाजी से गूंजा आसमान

पुणे के कोरेगांव भीमा में 208वां शौर्य दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है. रात 12 बजे आतिशबाजी और ‘जय भीम’ के नारों से आसमान गूंज उठा। यह दिन 1818 की ऐतिहासिक लड़ाई की याद दिलाता है, जब महार सैनिकों ने पेशवा की सेना को परास्त किया था. विजय स्तंभ को फूलों और रोशनी से सजाया गया है.

208वां 'शौर्य दिवस'! पुणे के कोरेगांव भीमा में जश्न, रात 12 बजे आतिशबाजी से गूंजा आसमान

Koregaon Bhima Shaurya Diwas 2026: पुणे के कोरेगांव भीमा में आज शौर्य और स्वाभिमान का पर्व मनाया जा रहा है. 208वें 'शौर्य दिवस' के मौके पर लाखों लोग विजय स्तंभ पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे. जैसे ही रात के 12 बजे, आसमान आतिशबाजी की रोशनी से जगमगा उठा और 'जय भीम' के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा. यह उत्सव सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना की याद नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और आत्मसम्मान का प्रतीक है.

इतिहास में दर्ज वीरता की कहानी

1 जनवरी 1818 को भीमा कोरेगांव की धरती पर एक ऐसी लड़ाई लड़ी गई जिसने इतिहास बदल दिया. ब्रिटिश सेना की 'बॉम्बे नेटिव इन्फैंट्री' के 500 महार सैनिकों ने पेशवा बाजीराव द्वितीय की 28,000 सैनिकों वाली विशाल सेना को चुनौती दी. संसाधनों की कमी के बावजूद इन सैनिकों ने अदम्य साहस दिखाया और पेशवा की सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. यह लड़ाई सिर्फ जमीन के लिए नहीं, बल्कि जातिगत भेदभाव के खिलाफ अस्तित्व की लड़ाई थी.

विजय स्तंभ: सम्मान का प्रतीक

इस युद्ध में शहीद हुए वीरों की याद में अंग्रेजों ने कोरेगांव भीमा में विजय स्तंभ का निर्माण कराया. इस स्तंभ पर आज भी उन सैनिकों के नाम अंकित हैं जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी. दलित समुदाय के लिए यह स्थान एक तीर्थ जैसा है, क्योंकि यह बताता है कि साहस किसी जाति का मोहताज नहीं होता. आज विजय स्तंभ को फूलों और रोशनी से सजाया गया है और दूर-दूर से लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे हैं.

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बाबा साहेब का ऐतिहासिक दौरा

हालांकि, यह युद्ध 19वीं सदी में हुआ था, लेकिन इसे सामाजिक न्याय की धारा में लाने का श्रेय डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर को जाता है. 1 जनवरी 1927 को उन्होंने विजय स्तंभ का दौरा किया और इसे दलितों के आत्मसम्मान का प्रतीक बताया. तभी से हर साल लाखों लोग यहां जुटते हैं. बाबा साहेब के विजन ने इस दिन को 'शौर्य दिवस' की पहचान दी, जो आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करता है.

सुरक्षा और श्रद्धा का संगम

जनसैलाब को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. भारी पुलिस बल तैनात है और ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है. रात 12 बजे हुई 'भीम मानवंदना' और आतिशबाजी ने उत्सव को और भव्य बना दिया. शांति और सौहार्द के साथ मनाया जा रहा यह पर्व इस बात का सबूत है कि शौर्य की विरासत आज भी उतनी ही जीवंत है.

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