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युद्ध की आंच रसोई तक, कहीं गैस के लिए लंबी कतारें, कहीं जमाखोरी तो कहीं कालाबाजारी, सरकार ने दिया आश्वासन

Middle East tension impact on LPG: महाराष्ट्र के कई जिलों से गैस किल्लत, कालाबाजारी और पैनिक बुकिंग की खबरें सामने आने लगी हैं. जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का हवाला देकर कीमतें बढ़ाई जा रही हैं.

युद्ध की आंच रसोई तक, कहीं गैस के लिए लंबी कतारें, कहीं जमाखोरी तो कहीं कालाबाजारी, सरकार ने दिया आश्वासन
Maharashtra LPG crisis News
  • महाराष्ट्र के कई जिलों में गैस सिलेंडर की किल्लत और कालाबाजारी की घटनाएं सामने आई हैं
  • जलगांव में एजेंसियां दाम बढ़ने से पहले बुकिंग कराने वाले ग्राहकों से भी अवैध रूप से अतिरिक्त पैसे वसूल रही हैं
  • अकोला में महंगी गैस और सब्सिडी कटौती के कारण ग्रामीण फिर से मिट्टी के चूल्हे पर खाना पकाने को मजबूर हो गई हैं
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नई दिल्ली/महाराष्ट्र:

मिडिल ईस्ट देशों में बढ़ते तनाव ने भारतीय रसोई का बजट और सुकून दोनों बिगाड़ दिया है. महाराष्ट्र के कई जिलों से गैस किल्लत, कालाबाजारी और पैनिक बुकिंग की खबरें सामने आने लगी हैं. जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का हवाला देकर कीमतें बढ़ाई जा रही हैं. वहीं, दूसरी तरफ आम जनता को गैस सिलेंडर के लिए घंटों कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है. इन सबके बीच, सरकार ने आश्वासन दिया है कि भारत को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. देश के पास पर्याप्त स्टॉक हैं. सरकार ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई कदम उठा चुकी है.

जलगांव: पुरानी बुकिंग पर ₹60 की 'अवैध' वसूली

जलगांव में गैस सिलेंडर को लेकर भारी आक्रोश है. ग्राहकों का आरोप है कि 7 मार्च से गैस के दामों में ₹60 की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन एजेंसियां उन लोगों से भी बढ़े हुए दाम वसूल रही हैं, जिन्होंने दाम बढ़ने से पहले ही बुकिंग करा ली थी. नियमानुसार बुकिंग के समय जो रेट होता है, वही लागू होना चाहिए. ग्राहकों का कहना है कि एक्स्ट्रा पैसे न देने पर सिलेंडर की डिलीवरी रोक दी जा रही है. एजेंसियां ईरान-अमेरिका तनाव का फायदा उठाकर अवैध वसूली और कालाबाजारी कर रही हैं. 

अकोला: फिर जले मिट्टी के चूल्हे

अकोला में स्थिति और भी गंभीर है. यहां गैस की कीमतों में उछाल और सब्सिडी में कटौती ने ग्रामीण महिलाओं को दशकों पीछे धकेल दिया है. महंगी गैस के कारण ग्रामीण इलाकों में महिलाएं एक बार फिर लकड़ी और मिट्टी के चूल्हों पर खाना पकाने को मजबूर हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि घरेलू सिलेंडरों को होटलों और ढाबों में खपाया जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए किल्लत पैदा हो गई है. महिलाओं ने सरकार से जल्द से जल्द कीमतों को नियंत्रित करने और कालाबाजारी रोकने की मांग की है.

रत्नागिरी और कोल्हापुर: पैनिक बुकिंग और लंबी कतारें

तनाव बढ़ने की आशंका के बीच लोगों ने गैस सिलेंडरों के स्टॉक जमा करने की कोशिश कर रहे हैं.  रत्नागिरी में 'शांतादुर्गा गैस एजेंसी' समेत कई केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखी जा रही हैं. लोगों को डर है कि युद्ध बिगड़ने पर सप्लाई बंद हो जाएगी. हालांकि एजेंसियों का दावा है कि स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन ग्राहकों का कहना है कि बुकिंग के 15 दिन बाद भी डिलीवरी नहीं मिल रही. कोल्हापुर के राजारामपुरी जैसे इलाकों में भी गैस एजेंसियों के बाहर नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ रही है. भविष्य की अनिश्चितता के चलते लोग पहले से ही सिलेंडर का स्टॉक रख लेना चाहते हैं.

सरकार ने क्या बताया?

वहीं, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और जनता के पेनिक को देखते हुए केंद्र सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए कदम उठाए हैं. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और उस अतिरिक्त उत्पादन को विशेष रूप से घरेलू उपयोग के लिए आरक्षित करने के निर्देश दिए हैं. 

जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार ने दो बुकिंग के बीच 25 दिनों का अंतराल अनिवार्य कर दिया है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, "भारत 'सुविधाजनक स्थिति' में है. देश में ऊर्जा आयात सभी गैर-हॉर्मुज मार्गों से पूरी गति से जारी है. नागरिकों की ऊर्जा आवश्यकताएं पूरी तरह से पूरी की जा रही हैं."

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