- बीएमसी चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और शिवसेना उद्धव दूसरे स्थान पर खिसकी
- उद्धव ठाकरे की शिवसेना बीएमसी के सत्ता केंद्र से ढाई दशक के बाद विदा हो गई है
- भाजपा ने शिवसेना के पारंपरिक मराठी वोटों में सेंध लगाकर अपनी स्थिति मजबूत की है
BMC के नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत दे दिया है. दशकों तक जिस बीएमसी पर शिवसेना का एकछत्र राज रहा, आज उस अभेद्य किले की दीवारें ढहती नज़र आ रही हैं.आंकड़ों में BJP सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) दूसरे स्थान पर सिमटती दिख रही है.
ठाकरे परिवार के लिए झटका
मुंबई की सभी 227 सीटों के रुझान अब साफ हैं, जो सत्ता के नए समीकरण की ओर इशारा कर रहे हैं. बीएमसी केवल एक नगर निगम नहीं, बल्कि शिवसेना के लिए उनकी जीवनरेखा और पावर हाउस रही है. 1990 के दशक से बीएमसी पर काबिज ठाकरे परिवार के लिए 71 का आंकड़ा एक बड़ा झटका है. भाजपा उससे ज्यादा सीटों के साथ उद्धव के वर्चस्व को सीधी चुनौती देकर उनके हाथ से सत्ता की चाबी छीन ली है.
शिंदे ने लगा दी मराठी वोटों में सेंध
एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने भले ही 32 सीटें जीती हों, लेकिन उन्होंने उद्धव के पारंपरिक मराठी मानुस के वोटों में जो सेंध लगाई, उसी का नतीजा है कि आज भाजपा नंबर एक पर खड़ी है. भाजपा के लिए यह जीत उसके वर्षों के संघर्ष का परिणाम है. पिछली बार की तुलना में भाजपा ने अपनी स्थिति काफी मजबूत की है. सीटों का आंकड़ा दर्शाता है कि मुंबई की जनता ने डबल इंजन सरकार और हिंदुत्व के भाजपाई मॉडल पर मुहर लगाई है.
बीजेपी बनाम उद्धव सेना
BJP अब केवल गैर-मराठी वोट बैंक तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने शिवसेना के कोर इलाकों में भी अपना परचम लहराया है. राज ठाकरे की MNS को उम्मीद थी कि इस बार वे सत्ता की चाबी अपने पास रखेंगे, लेकिन 10 सीटों पर सिमटने के बाद उनकी भूमिका सीमित हो गई है. वहीं, कांग्रेस का 14 सीटों पर गिरना यह बताता है कि मुंबई की राजनीति अब BJP बनाम उद्धव सेना होती जा रही है.
मातोश्री खामोश
बीएमसी के इन नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि मुंबई की राजनीति की धुरी अब मातोश्री से खिसककर BJP के पाले में चली गई है. उद्धव ठाकरे के लिए यह आत्ममंथन का समय है, क्योंकि जिस किले के दम पर वे राज्य की राजनीति करते थे, आज वही किला उनके हाथ से निकल चुका है.
उद्धव के अस्तित्व की लड़ाई की शुरुआत
इन नतीजों ने कांग्रेस और MNS जैसे दलों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है. मुंबई अब स्पष्ट रूप से दो ध्रुवों में बंट गई है एक तरफ BJP का कट्टर हिंदुत्व और दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे का समावेशी मराठी कार्ड! राज ठाकरे की मनसे का 10 सीटों पर रुक जाना यह संकेत है कि मुंबई की जनता अब किसी तीसरे विकल्प के मूड में नहीं है. मुंबई की सड़कों पर आज जश्न का शोर है, लेकिन मातोश्री की खामोशी बहुत कुछ कह रही है. बीएमसी का किला ढहना उद्धव ठाकरे के लिए अस्तित्व की लड़ाई की शुरुआत है.
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