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मराठी भाषा किसी परिवार या व्यक्ति की जागीर नहीं... चुनाव से पहले उद्धव-राज ठाकरे पर बीजेपी का तंज

Maharashtra News: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी महानगरपालिका और स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए मराठी अस्मिता एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गई है. ऐसे में बीजेपी द्वारा ठाकरे बंधुओं पर किया गया आक्रामक हमला यह दर्शाता है कि पार्टी अब मराठी मुद्दे पर रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रणनीति अपना रही है.

मराठी भाषा किसी परिवार या व्यक्ति की जागीर नहीं... चुनाव से पहले उद्धव-राज ठाकरे पर बीजेपी का तंज
मराठी भाषा के लिए BJP का ठोस कदम.
  • महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनाव 2026 के मतदान से पहले मराठी भाषा और अस्मिता पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है
  • बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने ठाकरे बंधुओं पर मराठी अस्मिता का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है
  • बीजेपी ने कहा कि मराठी भाषा उनके लिए केवल भावनात्मक नारा नहीं बल्कि विचार, संस्कृति दृष्टिकोण का आधार है
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मुंबई:

महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनाव 2026 के मतदान में अब कुछ ही घंटों का समय बचा है. इस बीच मराठी भाषा और मराठी अस्मिता को लेकर एक बार फिर से बयानबाजी तेज हो गई है. राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच भारतीय जनता पार्टी ने उद्धव-राज ठाकरे पर सीधा और आक्रामक हमला बोला है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मराठी अस्मिता के नाम पर राजनीति करने का काम ठाकरे बंधु कर रहे हैं, जबकि बीजेपी के लिए मराठी केवल एक भावनात्मक नारा नहीं, बल्कि विचार, संस्कृति और समावेशी दृष्टिकोण का मूल आधार है.

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'मराठी हमारे लिए बहुवचन है' , BJP का वैचारिक दावा

रविंद्र चव्हाण ने कहा कि बीजेपी के लिए “मराठी” शब्द व्याकरण के बहुवचन की तरह है, जिसमें केवल भाषा ही नहीं, बल्कि मराठी संस्कृति, मराठी साहित्य और मराठी अस्मिता भी समान रूप से शामिल हैं. उन्होंने कहा, “हमारा मराठी दृष्टिकोण ‘हम हमारे सब' जैसी सामूहिक और व्यापक सोच का प्रतीक है. यह किसी एक परिवार या व्यक्ति की जागीर नहीं है, बल्कि समाज को जोड़ने वाली सकारात्मक सोच है.”

ठाकरे बंधुओं पर मराठी भाषा के राजनीतिकरण का आरोप

ठाकरे बंधुओं पर निशाना साधते हुए चव्हाण ने कहा कि मराठी भाषा कोई विष-अमृत का खेल नहीं है, जिसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाए. उनका आरोप है कि ठाकरे बंधुओं की मराठी को लेकर भूमिका नकारात्मक राजनीति से भरी हुई है और उसमें संत ज्ञानेश्वर माउली के “विश्वात्मके देवे” जैसे वैश्विक, समावेशी और मानवतावादी विचारों की झलक नहीं दिखाई देती.

बीजेपी मराठी माणूस अलग नहीं हैं

रविंद्र चव्हाण ने जोर देकर कहा कि बीजेपी और मराठी माणूस को अलग-अलग दिखाने की कोशिश एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है, जिसे जनता अब समझ चुकी है. उन्होंने कहा कि मराठी लोगों द्वारा स्थापित मातृ संस्था की विचारधारा ही बीजेपी की वैचारिक नींव है. उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी की राजनीति और नीतियां डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, स्वातंत्र्यवीर सावरकर और बाळासाहेब ठाकरे जैसे तीन महान मराठी भाषी व्यक्तित्वों के विचारों से प्रेरित हैं और इन्हीं मूल्यों के आधार पर बीजेपी वर्षों से देश और समाज के निर्माण का कार्य कर रही है.

ठाकरे राजनीति बनाम BJP की प्रतिबद्धता

चव्हाण ने कहा कि बीजेपी केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में बसे मराठी भाषियों की उन्नति के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. “राज्य की प्रगति, नागरिकों का जीवन सुगम बनाना और देशभक्त व संस्कारित पीढ़ी तैयार करना हमारा लक्ष्य है, न कि भाषा को सत्ता की सीढ़ी बनाना,” ऐसा कहते हुए उन्होंने ठाकरे बंधुओं पर अप्रत्यक्ष रूप से परिवार-केंद्रित राजनीति का आरोप लगाया.

मराठी भाषा के लिए BJP के ठोस कदम

  • बीजेपी के योगदान को रेखांकित करते हुए रविंद्र चव्हाण ने कहा कि मराठी भाषा को अभिजात (Classical) दर्जा दिलाने में भाजपा की निर्णायक भूमिका रही
  • आज देश और दुनिया में भव्य रूप से निकाली जाने वाली गुड़ी पड़वा शोभायात्रा की शुरुआत सबसे पहले बीजेपी कार्यकर्ताओं की संकल्पना से हुई.
  •  मराठी भाषा और अस्मिता के प्रति बीजेपी का “बहुवचन दृष्टिकोण” है, जो सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीन पर दिखाई देता है.

मराठी भाषा पर राजनीति तेज

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी महानगरपालिका और स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए मराठी अस्मिता एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गई है. ऐसे में बीजेपी द्वारा ठाकरे बंधुओं पर किया गया आक्रामक हमला यह दर्शाता है कि पार्टी अब मराठी मुद्दे पर रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रणनीति अपना रही है.

उद्धाव-राज को बीजेपी की दो टूक

मराठी अस्मिता को लेकर चल रही सियासी बहस में बीजेपी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह मराठी पहचान को किसी परिवार या दल की बपौती नहीं मानती. उसका दावा है कि जहां ठाकरे बंधु मराठी के नाम पर राजनीति कर रहे हैं, वहीं बीजेपी मराठी भाषा, संस्कृति और अस्मिता को समावेशी, सकारात्मक और राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने वाला दृष्टिकोण मानती है. आने वाले दिनों में यह टकराव महाराष्ट्र की राजनीति को और तीखा करने वाला है.
 

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