- छत्तीसगढ़ के महासमुंद की छात्रा रागिनी साहू का चयन अंतरराष्ट्रीय चंद्र मिशन शक्तिसैट के लिए किया गया है.
- रागिनी ने अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से देश के 20 प्रतिभागियों में अपनी जगह बनाई है.
- चयन के लिए रागिनी ने 120 घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण और 550 से अधिक पाठ्य सामग्री का अध्ययन किया.
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की एक छात्रा ने अपने सपनों को नई उड़ान देते हुए अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में बड़ी छलांग लगाई है. शासकीय आशीबाई गोलछा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्रा रागिनी साहू का चयन अंतरराष्ट्रीय चंद्र मिशन 'मिशन शक्तिसैट' के लिए हुआ. देशभर के हजारों विद्यार्थियों के बीच हुई चयन प्रक्रिया में जगह बनाकर रागिनी ने न सिर्फ अपने परिवार और स्कूल का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गर्व का अवसर दिया है.
अब वह देश के चुनिंदा युवा वैज्ञानिकों के साथ मिलकर चंद्र मिशन से जुड़े सैटेलाइट निर्माण का हिस्सा बनेंगी. उनकी यह सफलता प्रदेश के उन छात्रों के लिए भी प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने की हिम्मत रखते हैं.
देश के 20 चुनिंदा प्रतिभागियों में मिली जगह
महासमुंद की रहने वाली रागिनी साहू ने अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. यह कार्यक्रम भारत द्वारा अधिकृत संस्था स्पेस किड्ज इंडिया के माध्यम से संचालित किया जाता है. देशभर से केवल 20 प्रतिभागियों का चयन किया गया, जिनमें रागिनी ने भी अपनी जगह बनाई. यह उपलब्धि उनकी लगन, मेहनत और विज्ञान के प्रति रुचि को दर्शाती है.
कठिन प्रशिक्षण और मूल्यांकन के बाद हुआ चयन
रागिनी का चयन किसी एक परीक्षा के आधार पर नहीं हुआ. इसके लिए उन्होंने करीब 120 घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण पूरा किया. इसके साथ ही 21 तकनीकी मॉड्यूल और अंतरिक्ष विज्ञान व सैटेलाइट तकनीक से जुड़े 550 से अधिक पाठों का अध्ययन किया. तकनीकी मूल्यांकन और राष्ट्रीय स्तर के साक्षात्कार में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद उनका चयन मिशन के लिए किया गया.

चंद्रमा के लिए तैयार होंगे दो विशेष सैटेलाइट
मिशन शक्तिसैट एक अंतरराष्ट्रीय चंद्र अभियान है, जिसमें 108 देशों की भागीदारी है. इस अभियान के तहत छात्राओं की टीम दो मून सैटेलाइट विकसित करेगी. इनमें से एक सैटेलाइट चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया जाएगा, जबकि दूसरा चंद्र सतह पर उतरकर विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोग करेगा. इस महत्वपूर्ण परियोजना में शामिल होकर रागिनी को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर मिलेगा.
स्पेस इंजीनियर बनने का सपना
रागिनी का सपना भविष्य में स्पेस इंजीनियर बनने का है. वह कहती हैं कि मिशन शक्तिसैट में चयनित होना उनके लिए गर्व और उत्साह का विषय है. प्रशिक्षण के दौरान उन्हें सैटेलाइट तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान और रॉकेट की कार्यप्रणाली जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सीखने का अवसर मिला. अब वह चाहती हैं कि दूसरी छात्राएं भी विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ें और ऐसे अभियानों में शामिल हों.
इसरो वैज्ञानिकों से मिलेगा प्रशिक्षण
रागिनी 22 से 31 अगस्त तक उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लेंगी. इस कार्यशाला में इसरो, इन-स्पेस के वैज्ञानिक, भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देंगे. यह प्रशिक्षण उनके ज्ञान और अनुभव को नई दिशा देगा.
अक्टूबर 2026 में होगा सैटेलाइट का प्रक्षेपण
मिशन के तहत तैयार किए जा रहे सैटेलाइट का प्रक्षेपण 11 अक्टूबर 2026 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा. यह प्रक्षेपण इसरो के सहयोग से होगा. कार्यक्रम से जुड़े विद्यार्थियों के लिए यह पल बेहद खास और ऐतिहासिक साबित होगा.
स्कूल में खुशी का माहौल
रागिनी की इस उपलब्धि से उनके विद्यालय में खुशी का माहौल है. अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी एवं भौतिकी व्याख्याता चन्द्रशेखर मिथिलेश ने बताया कि चयन प्रक्रिया में नामांकन और इंटरव्यू के बाद आगे का प्रशिक्षण शुरू हुआ. वहीं विद्यालय के प्राचार्य गोविंद राम सिन्हा ने कहा कि उनके स्कूल की छात्रा का मिशन शक्तिसैट के लिए चयन होना पूरे विद्यालय के लिए गर्व की बात है. उन्होंने रागिनी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरित करेगी.
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