Rajni Raikwar Success Story: आर्थिक अभाव यदि किसी के सपनों को रोक पाते, तो शायद सागर की 14 वर्षीय रजनी रैकवार ( Rajni Raikwar) आज राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान नहीं बना पातीं. लेकिन मजबूत इरादों, कड़ी मेहनत और अपने कोच के सहयोग ने रजनी के सपनों को नई उड़ान दी. विशाखापट्टनम में आयोजित अस्मिता लीग साउथ जोन कैनोइंग-कयाकिंग (National Canoeing-Kayaking) प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए रजनी ने शानदार प्रदर्शन किया और सिल्वर मेडल जीतकर सागर जिले के साथ पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया.
पिता करते हैं मजदूरी
रजनी वर्तमान में कक्षा 10वीं की छात्रा हैं. उनका परिवार बेहद साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है. उनके पिता सागर झील पर मजदूरी करते हैं और झील की साफ-सफाई सहित अन्य कार्यों से परिवार का भरण-पोषण करते हैं. सीमित आय के कारण परिवार को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इन परिस्थितियों के बीच भी रजनी ने अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया.

14 वर्षीय रजनी रैकवार ने राष्ट्रीय कैनोइंग-कयाकिंग प्रतियोगिता में जीता रजत पदक.
झील किनारे बैठकर बुना सपना
रजनी का बचपन सागर झील के किनारे बीता. पिता के साथ झील पर आने-जाने के दौरान वह अक्सर पानी में तेज रफ्तार से दौड़ती नावों और खिलाड़ियों को बड़े ध्यान से देखा करती थीं. उस समय उन्हें यह भी नहीं पता था कि यह कैनोइंग-कयाकिंग जैसा अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल है, लेकिन पानी पर खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और उनका प्रदर्शन रजनी को हमेशा आकर्षित करता था. तभी उनके मन में भी इस खेल में आगे बढ़ने का सपना जन्म लेने लगा.
नेशनल के लिए हुआ चयन
कुछ समय बाद रजनी को पता चला कि उनके एक रिश्तेदार कैनोइंग-कयाकिंग खेल से जुड़े हुए हैं. इसके बाद उन्होंने इस खेल के बारे में जानकारी जुटाई और सागर स्थित वाटर स्पोर्ट्स एकेडमी पहुंचीं. यहां उनकी मुलाकात कैनोइंग-कयाकिंग फेडरेशन के सचिव एवं प्रशिक्षक आकाश तिवारी से हुई. आकाश तिवारी ने रजनी की रुचि और प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें इस खेल की बारीकियों से अवगत कराया और लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित किया. यहीं से रजनी के खेल जीवन की वास्तविक शुरुआत हुई.

रजनी की इस सफलता से परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है.
करीब एक वर्ष तक लगातार कठिन अभ्यास और अनुशासित प्रशिक्षण के बाद रजनी ने अपनी प्रतिभा का ऐसा प्रदर्शन किया कि उनका चयन राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए मध्य प्रदेश टीम में हो गया. यह उपलब्धि उनके लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं थी, लेकिन राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले ही आर्थिक संकट उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया.
पिता के पास नहीं थे टिकट के लिए पैसे
विशाखापट्टनम में आयोजित प्रतियोगिता तक पहुंचने के लिए यात्रा और अन्य खर्चों की व्यवस्था करना परिवार के लिए संभव नहीं था. हालत यह थी कि पिता के पास बेटी के आने-जाने का टिकट कराने तक के पैसे नहीं थे. मजबूरी में उन्होंने रजनी को प्रतियोगिता में भेजने से मना कर दिया. एक समय ऐसा लगा कि आर्थिक तंगी के कारण रजनी का राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना अधूरा रह जाएगा.

झील किनारे देखे सपने ने दिलाई सफलता की उड़ान
इसी दौरान जब यह जानकारी उनके कोच आकाश तिवारी तक पहुंची तो उन्होंने बिना किसी संकोच के रजनी की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली. उन्होंने यात्रा, टिकट और प्रतियोगिता से जुड़े अन्य आवश्यक खर्च स्वयं वहन किए. उनका मानना था कि आर्थिक अभाव किसी भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी की राह में बाधा नहीं बनना चाहिए. कोच के इसी सहयोग ने रजनी को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का अवसर दिया.

राष्ट्रीय कैनोइंग-कयाकिंग प्रतियोगिता में जीता रजत पदक
विशाखापट्टनम में आयोजित अस्मिता लीग साउथ जोन कैनोइंग-कयाकिंग प्रतियोगिता में रजनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया. उनकी इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि प्रतिभा आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती. यदि सही मार्गदर्शन, अवसर और मेहनत का साथ मिले तो छोटे शहरों और साधारण परिवारों के बच्चे भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं.

परिवार में जश्न का माहौल
रजनी की इस सफलता से उनके परिवार में खुशी का माहौल है. वहीं सागर के खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों और शहरवासियों ने भी उनकी उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया है. खेल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और सरकारी सहयोग लगातार मिलता रहे तो वे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी देश का नाम रोशन कर सकते हैं.
पूरे प्रदेश का बढ़ाया मान
रजनी रैकवार की कहानी संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की मिसाल बन गई है. उनकी सफलता उन हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा है जो आर्थिक अभाव के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं. रजनी अब राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का नाम रोशन करने का सपना देख रही हैं. उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि मजबूत हौसलों के आगे गरीबी भी छोटी पड़ जाती है.
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