मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रीवा लोकायुक्त की टीम द्वारा रिश्वत लेते हुए पकड़े गए शहडोल के संविदा डॉक्टर महेश चंद शर्मा के मामले में अब चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं.
आरोप है कि डॉक्टर एक तरफ शहडोल में पदस्थ था, वहीं दूसरी ओर श्योपुर जिले में भी संविदा डॉक्टर के रूप में दर्ज रहा और वर्षों तक वहां से वेतन उठाता रहा. इतना ही नहीं, उसका नाम अन्य जिलों से भी जुड़ा बताया जा रहा है. मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है.
रिश्वत कांड के बाद खुली बड़ी परत
दरअसल, डॉक्टर महेश चंद शर्मा का नाम उस समय चर्चा में आया जब रीवा लोकायुक्त की टीम ने उन्हें कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया. इस कार्रवाई के बाद उनके सेवा रिकॉर्ड और पदस्थापना से जुड़ी जानकारियां सामने आने लगीं. जांच में यह बात सामने आई कि डॉक्टर लंबे समय से एक से अधिक स्थानों पर संविदा पदों से जुड़े हुए थे.
शहडोल में नौकरी, श्योपुर से मिलता रहा वेतन
जानकारी के अनुसार, डॉक्टर महेश चंद शर्मा शहडोल में स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रहे थे, जबकि श्योपुर जिले के विजयपुर क्षेत्र स्थित सेहसराम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी संविदा डॉक्टर के रूप में दर्ज थे. आरोप है कि वर्ष 2021 से श्योपुर स्वास्थ्य विभाग की ओर से उन्हें नियमित रूप से वेतन जारी किया जाता रहा. इससे सवाल उठ रहे हैं कि जब डॉक्टर दूसरे जिले में कार्यरत थे तो उनकी उपस्थिति और सेवाओं का सत्यापन कैसे किया.
जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
मामले ने श्योपुर स्वास्थ्य विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है. जिन अधिकारियों पर स्वास्थ्य केंद्रों की निगरानी और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी थी, वे इतने लंबे समय तक इस स्थिति का पता नहीं लगा सके. स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा तेज है कि क्या यह सिर्फ लापरवाही थी या फिर इसके पीछे कोई संगठित मिलीभगत भी थी.
राष्ट्रपति के कुनो दौरे में भी लगी थी ड्यूटी
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह बताया जा रहा है कि डॉक्टर महेश चंद शर्मा की ड्यूटी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कुनो नेशनल पार्क दौरे के दौरान भी लगाई थी. इसके बावजूद उनकी वास्तविक उपस्थिति और कार्य स्थिति की गंभीरता से जांच नहीं की. इससे प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं.
खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप
रिश्वत प्रकरण और कथित दोहरी पदस्थापना की जानकारी सामने आने के बाद श्योपुर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है. अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पूरे घटनाक्रम से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं. विभाग के भीतर भी इस बात को लेकर चर्चा है कि यदि आरोप सही पाए गए तो यह बड़ा प्रशासनिक घोटाला साबित हो सकता है.
जांच के लिए बनाई गई टीम
श्योपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. दिलीप सिकरवार ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की है. उनका कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. साथ ही डॉक्टर महेश चंद शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और अब तक लिए गए वेतन की रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है.
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